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Rahul Gandhi: ‘रेपिस्ट की पैरवी करने वाले को शिक्षा मंत्री बनाया’, प्रह्लाद जोशी की नियुक्ति पर संसद में हंगामा

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Rahul Gandhi: ‘रेपिस्ट की पैरवी करने वाले को शिक्षा मंत्री बनाया’, प्रह्लाद जोशी की नियुक्ति पर संसद में हंगामा

नई दिल्ली। लोकसभा में मंगलवार को पेपर लीक से जुड़े ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में प्रह्लाद जोशी की नियुक्ति को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्ष ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर सवाल खड़े किए।

लोकसभा में दोपहर करीब 2 बजे से पेपर लीक से संबंधित विधेयक पर चर्चा शुरू हुई। प्रस्तावित संशोधन के जरिए वर्ष 2024 में बनाए गए सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम से जुड़े कानून में बदलाव किए जाने का प्रस्ताव है। सरकार की ओर से केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने विधेयक का पक्ष रखते हुए कहा कि प्रस्तावित बदलावों से पेपर लीक और परीक्षा में होने वाली अनियमितताओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

इसी दौरान लोकसभा में प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपे जाने का मुद्दा भी गरमा गया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संसद के बाहर सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने ऐसे व्यक्ति को शिक्षा मंत्री बनाया है, जिसने कथित तौर पर एक रेपिस्ट की पैरवी की थी।

राहुल गांधी के इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद और तेज हो गया। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी सदन में प्रह्लाद जोशी को लेकर इसी तरह की टिप्पणी की। हालांकि, उनकी टिप्पणी को लोकसभा की कार्यवाही से हटा दिया गया।

प्रियंका गांधी की टिप्पणी पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने कड़ा विरोध जताया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस टिप्पणी पर आपत्ति जताई। सत्ता पक्ष की ओर से आरोप लगाया गया कि प्रियंका गांधी ने प्रह्लाद जोशी के चरित्र पर गंभीर टिप्पणी की है और उन्हें अपने आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करने चाहिए।

सत्ता पक्ष के नेताओं ने प्रियंका गांधी से अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांगने की मांग भी की। इसके बाद सदन में कुछ समय के लिए माहौल काफी गरमा गया और दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस देखने को मिली।

वहीं, पेपर लीक पर चर्चा के दौरान सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार और अनुचित साधनों पर रोक लगाने के लिए प्रस्तावित संशोधनों को जरूरी बताया। सरकार का कहना है कि सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई के लिए कानून को और मजबूत किया जाना आवश्यक है।

NEET-UG समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक को लेकर पिछले कुछ समय से राजनीतिक बहस लगातार तेज रही है। ऐसे में सार्वजनिक परीक्षाओं से जुड़े कानून में प्रस्तावित संशोधन को लेकर संसद में भी विपक्ष और सरकार के बीच तीखी बहस देखने को मिल रही है।

हालांकि, प्रह्लाद जोशी को लेकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों पर सत्ता पक्ष की ओर से कड़ा विरोध दर्ज कराया गया है। आरोपों को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच अब सबकी नजर इस बात पर है कि सदन में पेपर लीक रोकने से जुड़े संशोधन विधेयक पर आगे की चर्चा किस दिशा में जाती है।

 

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