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प्रदूष्ण बढ़ रहा है लेकिन सरकार नें घटाया बजट : नीलम चौधरी

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नीलम चौधरी
प्रदूष्ण बढ़ रहा है लेकिन सरकार नें घटाया बजट : नीलम चौधरी

प्रदूष्ण बढ़ रहा है लेकिन सरकार नें घटाया बजट : नीलम चौधरी

जहरीली हवाओं से कैसे मिलेगी मुक्ति

नई दिल्ली ( सी.पी.एन.न्यूज़ ) : राजधानी दिल्ली के प्रदूषण पर देश भर में कई माह से बवाल मचा हुआ है आलम यह कि दिवाली के बाद से ही दिल्ली सहित एनसीआर के लोग जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर है सरकार दावे करती रही है आने वाले समय में प्रदूषण से निजात दिला दी जाएगी लेकिन यह कैसे सम्भव होगा क्योंकि केंद्र सरकार नें अपने सालाना बजट में प्रदूषण से निपटने के लिए पिछले बजट से भी कम प्रावधान किया है | यह कहना है समस्त रोहताश नगर आर.डब्लू.ए.की अध्यक्ष सामाजिक कार्यकर्ता नीलम चौधरी का |

नीलम चौधरी कहती हैं दिल्ली समेत एनसीआर और देश भर में बढ़ते प्रदूषण तथा बिगड़ती वायु गुणवत्ता के बीच केंद्र सरकार द्वारा प्रदूषण नियंत्रण बजट में कटौती करना निंदनीय है | वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए मात्र 1,091 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। यह आंकड़ा पिछले संशोधित बजट (2025-26) के 1,300 करोड़ रुपये की तुलना में 209 करोड़ रुपये कम है। नीलम चौधरी कहती हैं हैरानी की बात है कि एक ओर जहां देश के कई शहर ‘गैस चैंबर’ में तब्दील हो रहे हैं, वहीं राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के तहत मिलने वाली राशि में करीब 200 करोड़ रुपये की कटौती भी केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करती है। आंकड़ों का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि बजट में आवंटित राशि का बड़ा हिस्सा खर्च ही नहीं हो पा रहा है।

नीलम चौधरी कहती हैं केन्द्रीय बजट में दिल्ली के लिए कुछ नया नही मिला है यमुना सफाई, सीवरेज, प्रदूषण नियंत्रण पर कोई ठोस योजना के लिए फंड आवंटित नही किया गया, सिर्फ खानापूर्ति करके पिछले बजट आवंटन पर यमुना सफाई और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को विकसित करने के लिए बजट आवंटित किया। उन्होंने कहा कि बजट घोषणा में साल भर प्रदूषण झेलती दिल्ली की जनसंख्या के स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता दिखाई नही दी। क्या इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाकर, चार्जिंग स्टेशन और ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट की घोषणा से राजधानी का दमघोटू प्रदूषण कम हो सकता है। प्रदूषण के लिए केंद्र और दिल्ली दोनो सरकारों को जमीनी हालात के मद्देनजर निर्णय लेने होंगे, क्योंकि प्रदूषण का मुख्य कारण सरकार और अधिकारियों को मालूम है, सिर्फ उन कारणों पर नियंत्रण करने के लिए काम सिर्फ दस्तावेजों में होता है।

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