Omar Abdullah on IAS Officer: महिला अधिकारी से बदसलूकी पर भड़के उमर अब्दुल्ला, बोले- जम्मू-कश्मीर पूर्ण राज्य होता तो तुरंत होती कार्रवाई
जम्मू-कश्मीर में एक वरिष्ठ IAS अधिकारी पर जूनियर महिला अधिकारी के साथ ऑनलाइन सरकारी बैठक के दौरान कथित तौर पर बदसलूकी करने और धमकी देने का आरोप लगा है। सोशल मीडिया पर बैठक का वीडियो वायरल होने के बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस मामले पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिकारी का व्यवहार पहली नजर में उस स्तर के अनुरूप नहीं था, जिसकी एक वरिष्ठ IAS अधिकारी से अपेक्षा की जाती है। उमर अब्दुल्ला ने मामले को मुख्य सचिव के सामने गंभीरता से उठाते हुए निर्देश दिया है कि संबंधित महिला अधिकारी के खिलाफ किसी भी तरह की बदले की कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
विवाद में घिरे वरिष्ठ IAS अधिकारी की पहचान कुमार राजीव रंजन के रूप में हुई है, जो जम्मू-कश्मीर के श्रम एवं रोजगार विभाग में सचिव हैं। वहीं, महिला अधिकारी बीनीश वानी जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक सेवा (JKAS) की अधिकारी और रोजगार विभाग में सहायक निदेशक हैं। सामने आए वीडियो में दोनों के बीच तीखी बहस होती दिखाई देती है। आरोप है कि बैठक के दौरान रंजन ने महिला अधिकारी पर गुस्सा करते हुए अपशब्दों का इस्तेमाल किया और उनसे कहा कि वह उनके बॉस हैं। वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों के व्यवहार और सरकारी बैठकों में महिला कर्मचारियों की गरिमा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने ऑनलाइन सरकारी बैठक का वायरल वीडियो देखा है। उनके अनुसार, पहली नजर में वरिष्ठ अधिकारी का आचरण अपेक्षित प्रशासनिक मानकों के अनुरूप नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि इसके बाद जूनियर JKAS अधिकारी को कथित तौर पर दी गई धमकियों ने मामले को और गंभीर बना दिया है। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव अतुल डुल्लू के सामने यह मुद्दा मजबूती से उठाया और निर्देश दिया कि महिला अधिकारी को किसी भी प्रकार की प्रताड़ना या प्रतिशोध का सामना न करना पड़े।
उमर अब्दुल्ला ने इस विवाद को जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं होने से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि यदि जम्मू-कश्मीर पूर्ण राज्य होता, तो संबंधित IAS अधिकारी के आचरण की जांच पूरी होने तक उन्हें सामान्य प्रशासन विभाग से संबद्ध किया जा सकता था। मुख्यमंत्री के मुताबिक, केंद्र शासित प्रदेश होने के कारण IAS अधिकारियों पर प्रशासनिक नियंत्रण उपराज्यपाल के अधीन लोक भवन के पास है। उन्होंने उम्मीद जताई कि संबंधित अधिकारी इस मामले में उचित कदम उठाएंगे और दुर्व्यवहार तथा धमकी जैसे आरोपों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
यह विवाद 14 अक्टूबर को मिशन युवा की समीक्षा बैठक के दौरान शुरू हुआ था। बैठक में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) की प्रगति और उससे जुड़े कामकाज की समीक्षा की जा रही थी। इसी दौरान कुमार राजीव रंजन और बीनीश वानी के बीच किसी मुद्दे पर तीखी बहस हुई। बैठक के कुछ वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर सामने आए, जिनमें वरिष्ठ अधिकारी को कथित तौर पर महिला अधिकारी से ऊंची आवाज में बात करते और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते सुना जा सकता है। वीडियो सामने आने के बाद JKAS अधिकारियों ने बीनीश वानी के साथ कथित दुर्व्यवहार और सार्वजनिक रूप से अपमानित किए जाने पर आपत्ति जताई तथा निष्पक्ष जांच की मांग की।
बीनीश वानी ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि वायरल वीडियो न तो मॉर्फ किया गया है और न ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जरिए तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि पैर में फ्रैक्चर होने और छुट्टी पर रहने के बावजूद वह घर से ऑनलाइन बैठक में शामिल हुई थीं। उन्होंने महिला अधिकारियों की गरिमा की रक्षा किए जाने पर जोर देते हुए कहा कि किसी के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए।
दूसरी ओर, कुमार राजीव रंजन ने कहा कि यदि उन्होंने गुस्से में कुछ अनुचित कह दिया, तो उन्हें इसका खेद है। हालांकि, उन्होंने यह भी दावा किया कि महिला अधिकारी के बार-बार जवाब देने और कथित तौर पर उकसाने के कारण बहस बढ़ी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि समीक्षा बैठकों में अधिकारियों से सवाल नहीं पूछे जाएंगे, तो कामकाज की समीक्षा और जिम्मेदारी तय करना कैसे संभव होगा। रंजन ने पूरे एक घंटे की बैठक का संदर्भ देखने की बात भी कही और आरोप लगाया कि महिला अधिकारी ने भी उनके प्रति अनुचित भाषा का इस्तेमाल किया था। इन दावों और आरोपों की जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
इस बीच, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी मामले पर संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव से घटना की रिपोर्ट मांगी है। विवाद ने प्रशासनिक व्यवस्था में वरिष्ठ और कनिष्ठ अधिकारियों के बीच व्यवहार, कार्यस्थल पर सम्मान तथा महिला अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर बहस तेज कर दी है। अब जांच और प्रशासन की कार्रवाई पर नजर रहेगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि शिकायत उठाने वाली महिला अधिकारी के खिलाफ प्रतिशोध की कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए, जबकि संबंधित अधिकारी के आचरण को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकाला जा सकेगा।



