Hidma Encounter: छत्तीसगढ़ में बड़ा ऑपरेशन, टॉप नक्सल कमांडर हिडमा पत्नी सहित ढेर, सुकमा में 6 नक्सलियों का खात्मा
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में चल रहे एक बड़े एंटी-नक्सल ऑपरेशन में सुरक्षाबलों को ऐतिहासिक सफलता मिली है। देश के सबसे कुख्यात और सबसे शक्तिशाली नक्सल कमांडरों में से एक माडवी हिडमा को उसकी पत्नी राजे (राजक्का) सहित मार गिराया गया है। हिडमा पर 50 लाख रुपये का इनाम घोषित था और वह सीपीआई (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी का सबसे युवा और सबसे खतरनाक कमांडर माना जाता था।
सूत्रों के मुताबिक, अब तक 6 नक्सलियों के मारे जाने की आधिकारिक पुष्टि की गई है, जिसमें कुछ वरिष्ठ कैडर भी शामिल हैं।
ऑपरेशन कैसे चला?
छत्तीसगढ़-आंध्र प्रदेश बॉर्डर के अल्लूरी सीताराम राजू जिले के घने जंगलों में ग्रेहाउंड्स और अन्य सुरक्षा बल संयुक्त रूप से सर्च ऑपरेशन चला रहे थे। इसी दौरान नक्सलियों के एक बड़े समूह से मुठभेड़ हो गई। दोनों ओर से भारी गोलीबारी के बाद कई नक्सली ढेर हुए।
घटना के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके में कॉम्बिंग ऑपरेशन तेज कर दिया है। एर्राबोर पुलिस स्टेशन क्षेत्र में अभी भी रुक-रुक कर फायरिंग की आवाजें सुनाई दे रही हैं, जिससे अंदेशा है कि कुछ नक्सली जंगलों में छिपे हुए हैं।
कौन था माडवी हिडमा?
माडवी हिडमा, जिसे संतोष नाम से भी जाना जाता है, बस्तर क्षेत्र का सबसे कुख्यात नक्सली और कई बड़े हमलों का मास्टरमाइंड था।
- जन्म: 1981, पूवर्ति गांव, सुकमा
- पद: PLGA बटालियन नंबर 1 का प्रमुख (नक्सलियों की सबसे हमलावर यूनिट)
- CPI (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी का सबसे युवा सदस्य
- बस्तर क्षेत्र से सेंट्रल कमेटी में शामिल होने वाला एकमात्र आदिवासी नेता
- उसके सिर पर 50 लाख रुपये का इनाम
- उसकी दूसरी पत्नी राजे (राजक्का) भी मुठभेड़ में मारी गई
हिडमा किन-किन हमलों का मास्टरमाइंड था?
हिडमा पिछले 15 सालों में कई बड़े और खौफनाक नक्सली हमलों को संचालित करने के लिए जिम्मेदार रहा है—
- 2010 दंतेवाड़ा हमला: 76 सीआरपीएफ जवान शहीद
- 2013 झीरम घाटी नरसंहार: 27 लोग मारे गए, जिनमें कांग्रेस के शीर्ष नेता शामिल
- 2021 सुकमा-बीजापुर मुठभेड़: 22 सुरक्षा कर्मी शहीद
- 2017 सुकमा हमला: CRPF के कई जवान शहीद
हिडमा को अत्यंत क्रूर, प्रशिक्षण में माहिर और जंगलों की भौगोलिक स्थिति का मास्टर माना जाता था। वह नक्सलियों की रणनीति, घात लगाकर हमले और एंबुश प्लानिंग का प्रमुख जिम्मेदार था।
ऑपरेशन क्यों है ऐतिहासिक?
हिडमा पिछले एक दशक से सुरक्षा बलों की मोस्ट वांटेड लिस्ट में था। जंगलों में मजबूत पकड़ और कैडरों पर नियंत्रण के कारण उसे पकड़ना लगभग असंभव माना जा रहा था। लेकिन इस ऑपरेशन ने नक्सलियों की सबसे शक्तिशाली कमांड संरचना को एक बड़ा झटका दिया है।
सुरक्षाबलों का मानना है कि हिडमा के मारे जाने से दक्षिण बस्तर और उससे सटे एपी बॉर्डर पर माओवादी नेटवर्क कमजोर हो जाएगा और कई जिलों में नक्सलवाद पर काबू पाने में तेजी आएगी।



