सत्य के साथ • आपके साथरविवार, 8 नवंबर 2026
ADVERTISEMENTविज्ञापन के लिए संपर्क करेंCPN NEWS • YOUR BRAND HERE
ताज़ा खबर
Delhi Building Collapse: दिल्ली में इमारतें नहीं, निगम का भ्रष्टाचार और प्रशासनिक व्यवस्था ढह रही है : श्याम सुन्दर अग्रवालFood Adulteration: मिलावट के खिलाफ मुख्यमंत्री का सड़क पर उतरना जन स्वास्थ्य के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण : रोमेश चंद्र गुप्ताFood Adulteration: मुख्यमंत्री की सक्रियता से मिलावटखोरों में मचेगा हड़कंप, जनता की सेहत से समझौता नहीं करेगी सरकार : गुरमीत सिंह सूराPoland Shooting: क्राकोव के मुख्य बाजार में कार से अंधाधुंध फायरिंग, छह लोगों की मौत, 15 घायल; हमलावर गिरफ्तारIND vs NZ: छोटे लक्ष्य का पीछा करने में छूटे भारत के पसीने, दूसरे वनडे में चार रन से जीतकर सीरीज में 2-0 की बढ़तSharad Pawar Health Update: शरद पवार की सेहत में सुधार, तीन दिन बाद मुंबई के अस्पताल से मिली छुट्टी; घर पर जारी रहेगा इलाजSonia Gandhi Memoir: मोदी सरकार पर लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने का आरोप, आपातकाल और राजीव गांधी से रिश्ते पर भी बोलीं सोनिया; भाजपा का पलटवारBismillah Khan House: पुश्तैनी मकान पर बुलडोजर चलने के अखिलेश यादव के दावे को परिवार ने नकारा, खुद करा रहा पुनर्निर्माण; भूतल पर बनेगा संग्रहालय

Harak Singh Rawat Case: 23 साल पुराने मामले में फिर दुष्कर्म के आरोप, महिला ने मांगी नई जांच; रावत ने बताया राजनीतिक साजिश

5 मिनट पढ़ें

Harak Singh Rawat Case: 23 साल पुराने मामले में फिर दुष्कर्म के आरोप, महिला ने मांगी नई जांच; रावत ने बताया राजनीतिक साजिश

देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरक सिंह रावत से जुड़ा करीब 23 साल पुराना मामला एक बार फिर चर्चा में है। आरोप लगाने वाली महिला ने शनिवार को देहरादून में पत्रकार वार्ता कर दुष्कर्म और शोषण के आरोप दोहराए। उन्होंने पहले हुई जांच पर सवाल उठाते हुए नए सिरे से सीबीआई जांच और अपने बेटे का दोबारा डीएनए परीक्षण कराने की मांग की है। दूसरी ओर, हरक सिंह रावत ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें पूर्व जांच में क्लीन चिट मिल चुकी है। उन्होंने मामला दोबारा उठाए जाने को राजनीतिक साजिश बताया है।

महिला ने अपनी शिकायत और मांगों को लेकर उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक को पत्र देने की जानकारी दी है। उनका कहना है कि पहले हुई जांच में उन्हें अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात और पुलिस सुरक्षा की मांग भी की है। महिला ने कहा कि उनकी मांग निष्पक्ष जांच और अपने बेटे को न्याय दिलाने की है।

पत्रकार वार्ता के दौरान महिला ने आरोप लगाया कि घटना के समय वह नाबालिग थीं और उनके साथ दुष्कर्म किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि बाद में उन्हें एक संस्था में रखने के बहाने मानसिक चिकित्सालय में भर्ती करा दिया गया था। उनके अनुसार, उस दौरान उनसे ऐसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए, जिनकी सामग्री उन्हें ठीक से समझाई नहीं गई। ये महिला की ओर से लगाए गए आरोप हैं, जिनका रावत ने खंडन किया है।

महिला ने भाषा की समस्या का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय वह हिंदी ठीक से नहीं समझ पाती थीं, जिसके कारण जांच की कार्यवाही और दस्तावेजों को समझने में कठिनाई हुई। उनका आरोप है कि परिस्थितियों और उनकी स्थिति को ध्यान में रखकर उनकी बात विस्तार से नहीं सुनी गई।

उन्होंने पूर्व सीबीआई जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि अधिकारी संबंधित संस्था में उनसे केवल एक बार मिलने आए थे। महिला का कहना है कि उन्हें अपनी बात रखने और घटनाक्रम स्पष्ट करने का पर्याप्त मौका नहीं दिया गया। उन्होंने पहले हुए डीएनए परीक्षण की प्रक्रिया पर भी संदेह जताया और नए सिरे से परीक्षण कराने की मांग की।

महिला ने कहा कि उनका बेटा अब वयस्क हो चुका है और वह उसके पितृत्व से जुड़े सवाल का स्पष्ट जवाब चाहती हैं। उन्होंने नार्को परीक्षण की मांग भी उठाई। हालांकि, किसी परीक्षण की मांग किए जाने और उसे अधिकृत प्रक्रिया के तहत कराए जाने में अंतर है। फिलहाल नए डीएनए या नार्को परीक्षण का कोई पुष्ट आदेश सामने नहीं आया है।

आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए हरक सिंह रावत ने कहा कि मामले की सीबीआई जांच पहले ही हो चुकी है और उन्हें क्लीन चिट मिली थी। उनका यह भी कहना है कि न्यायालय इस मामले को बंद कर चुका है। रावत ने आरोप लगाया कि पुराने प्रकरण को दोबारा उठाकर उनकी छवि खराब करने का प्रयास किया जा रहा है।

रावत ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और अपनी छवि धूमिल करने का प्रयास करने वाले अन्य लोगों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा करने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि जांच में राहत मिलने के बाद भी मामले को राजनीतिक उद्देश्य से उठाया जा रहा है। दोबारा डीएनए जांच के सवाल पर उन्होंने न्यायालय की अनुमति के आधार पर इसके लिए तैयार होने की बात कही है।

भाजपा ने इस घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य महेंद्र भट्ट ने कहा कि महिलाओं के सम्मान और न्याय की बात करने वाले कांग्रेस नेताओं को अपने वरिष्ठ नेता पर लगे आरोपों पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और उत्तराखंड कांग्रेस नेतृत्व की चुप्पी पर सवाल उठाए।

इसके जवाब में रावत ने भाजपा की मंशा पर प्रश्न खड़े किए। उन्होंने पूछा कि यदि भाजपा उन्हें दोषी मानती थी, तो वर्ष 2016 में उन्हें पार्टी में शामिल क्यों किया गया और बाद में विधायक तथा मंत्री बनने का अवसर क्यों मिला। उनका आरोप है कि राज्य के अन्य मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए इस पुराने मामले को सामने लाया जा रहा है।

यह प्रकरण वर्ष 2003 में उस समय चर्चा में आया था, जब उत्तराखंड में नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी। महिला ने तत्कालीन मंत्री हरक सिंह रावत पर आरोप लगाए थे। विवाद बढ़ने पर रावत ने मंत्री पद से इस्तीफा दिया और मामले की सीबीआई जांच हुई। पूर्व जांच में डीएनए नमूनों का मिलान नहीं होने और रावत को राहत मिलने की बात सामने आई थी। अब महिला उसी जांच और परीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठा रही हैं।

मुख्यमंत्री धामी की ओर से हाल में पुराने मामले का उल्लेख किए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई है। महिला का कहना है कि इससे उन्हें अपनी मांग दोबारा उठाने की उम्मीद मिली। वहीं, रावत इसे आगामी विधानसभा चुनाव से जुड़ी राजनीतिक कवायद बता रहे हैं।

फिलहाल महिला ने नई जांच और परीक्षण की मांग की है, जबकि रावत पूर्व जांच तथा न्यायिक कार्यवाही का हवाला देकर आरोपों को खारिज कर रहे हैं। आगे की स्थिति शिकायत पर संबंधित अधिकारियों के निर्णय, पुराने अभिलेखों और किसी नई जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों से स्पष्ट होगी। आरोपों और राजनीतिक बयानों को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।

इस खबर पर आपकी प्रतिक्रिया?

आपकी राय

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *