Cricket Legend: क्रिकेट जगत ने खोया महान ऑलराउंडर, सर गारफील्ड सोबर्स का 89 वर्ष की उम्र में निधन
विश्व क्रिकेट के लिए शुक्रवार का दिन बेहद दुखद रहा। क्रिकेट इतिहास के सर्वकालिक महान ऑलराउंडरों में शुमार वेस्टइंडीज के दिग्गज सर गारफील्ड “गैरी” सोबर्स का 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की पुष्टि वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड ने की है। वह अपने 90वें जन्मदिन से कुछ ही दिन पहले इस दुनिया को अलविदा कह गए। उनके निधन की खबर सामने आते ही क्रिकेट जगत में शोक की लहर दौड़ गई और दुनिया भर के खिलाड़ियों, क्रिकेट बोर्डों तथा प्रशंसकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
28 जुलाई 1936 को बारबाडोस में जन्मे सर गारफील्ड सोबर्स ने महज 17 वर्ष की उम्र में वर्ष 1954 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया था। शुरुआती दिनों से ही उन्होंने अपनी असाधारण प्रतिभा का परिचय दिया और जल्द ही वेस्टइंडीज टीम के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ी बन गए। लगभग दो दशकों तक उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने शानदार प्रदर्शन से दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमियों का दिल जीता।
सर गारफील्ड सोबर्स को क्रिकेट इतिहास का सबसे संपूर्ण ऑलराउंडर माना जाता है। वह बाएं हाथ के बेहतरीन बल्लेबाज थे और गेंदबाजी में भी उनकी बहुमुखी प्रतिभा अद्वितीय थी। वह तेज-मध्यम गति की गेंदबाजी के साथ-साथ बाएं हाथ की ऑर्थोडॉक्स स्पिन और चिनामैन (रिस्ट स्पिन) गेंदबाजी करने में भी माहिर थे। यही कारण है कि आज भी उन्हें क्रिकेट के सबसे बहुमुखी खिलाड़ियों में गिना जाता है।
अपने शानदार टेस्ट करियर में सोबर्स ने 93 मुकाबलों में 8,032 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से 26 शतक और 30 अर्धशतक निकले तथा उनका बल्लेबाजी औसत 57.78 रहा। गेंदबाजी में उन्होंने 235 विकेट हासिल किए, जबकि फील्डिंग में 109 कैच लेकर अपनी उपयोगिता भी साबित की। वनडे क्रिकेट के शुरुआती दौर में होने के कारण उन्हें केवल एक वनडे मैच खेलने का मौका मिला, जिसमें उन्होंने एक विकेट लिया।
उनके करियर की सबसे ऐतिहासिक उपलब्धियों में वर्ष 1958 में पाकिस्तान के खिलाफ खेली गई 365 रन की नाबाद पारी शामिल है। उस समय यह टेस्ट क्रिकेट का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर था और यह विश्व रिकॉर्ड करीब 36 वर्षों तक कायम रहा। इसके अलावा वर्ष 1968 में उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट के एक ओवर में लगातार छह गेंदों पर छह छक्के जड़कर इतिहास रच दिया था। ऐसा करने वाले वह दुनिया के पहले बल्लेबाज बने थे।
क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी सर गारफील्ड सोबर्स खेल से जुड़े रहे और नई पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बने रहे। क्रिकेट में उनके असाधारण योगदान को देखते हुए वर्ष 1975 में उन्हें ब्रिटिश नाइटहुड से सम्मानित किया गया। बाद में उन्हें बारबाडोस का राष्ट्रीय नायक भी घोषित किया गया। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने वर्ष के सर्वश्रेष्ठ पुरुष क्रिकेटर को दिए जाने वाले प्रतिष्ठित पुरस्कार का नाम “सर गारफील्ड सोबर्स ट्रॉफी” रखा, जो उनके महान योगदान का प्रतीक माना जाता है।
उनके निधन पर आईसीसी, वेस्टइंडीज क्रिकेट, बीसीसीआई समेत दुनिया भर के क्रिकेट बोर्डों और पूर्व एवं वर्तमान खिलाड़ियों ने गहरा शोक व्यक्त किया। सभी ने उन्हें क्रिकेट इतिहास का सबसे महान ऑलराउंडर बताते हुए कहा कि खेल के प्रति उनका योगदान और उपलब्धियां आने वाली कई पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी। क्रिकेट जगत में सर गारफील्ड सोबर्स का नाम हमेशा सम्मान और गौरव के साथ लिया जाएगा।



