Home देश दुनिया Doda Road Accident: डोडा का दर्दनाक हादसा बर्फीली ढलान और ब्लैक आइस...

Doda Road Accident: डोडा का दर्दनाक हादसा बर्फीली ढलान और ब्लैक आइस ने छीन ली 10 जवानों की जिंदगी

0
68

Doda Road Accident: डोडा का दर्दनाक हादसा बर्फीली ढलान और ब्लैक आइस ने छीन ली 10 जवानों की जिंदगी

जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में खन्नी टॉप की बर्फीली ढलान ने गुरुवार को देश को झकझोर देने वाला दर्दनाक मंजर दिखा दिया। कड़ाके की ठंड के बीच देश की सुरक्षा में तैनात 10 जांबाज जवान अपनी ड्यूटी पर निकले थे, लेकिन नियति ने उन्हें मंज़िल तक पहुंचने का मौका नहीं दिया। खन्नी टॉप इलाके में उनका वाहन भीषण सड़क हादसे का शिकार हो गया और देखते ही देखते 10 परिवारों के अरमान बिखर गए।

यह हादसा केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं था, बल्कि पहाड़ी इलाकों में बुनियादी सुरक्षा इंतजामों की कमी और प्रकृति की मार की एक भयावह तस्वीर भी सामने लाया। खन्नी टॉप ऊंचाई पर स्थित इलाका है, जहां सर्दियों में तापमान लगातार शून्य से नीचे बना रहता है। रात के समय सड़क पर जमा पानी जमकर बर्फ की पतली परत बना लेता है, जिसे तकनीकी भाषा में ब्लैक आइस कहा जाता है। यही ब्लैक आइस इस हादसे की सबसे बड़ी वजह बनकर सामने आई।

डोडा जिले के भद्रवाह क्षेत्र में जिस जगह यह हादसा हुआ, वहां का मंजर बेहद डरावना था। सड़क के खतरनाक मोड़ पर न तो कोई मजबूत पैराफिट था और न ही कोई चेतावनी बोर्ड, जो वाहन चालकों को आगे खतरे के प्रति सचेत कर सके। संकरी और जर्जर सड़क पर भारी वाहनों का गुजरना वैसे ही जोखिम भरा रहता है, ऊपर से बर्फ और फिसलन ने हालात और भी भयावह बना दिए।

स्थानीय जानकारों का कहना है कि अगर सड़क के किनारे मजबूत कंक्रीट का पैराफिट या क्रैश बैरियर मौजूद होता, तो संभव है कि अनियंत्रित हुआ वाहन खाई में गिरने से पहले रुक जाता। इसके अलावा रात में चमकने वाले रिफ्लेक्टर और चेतावनी संकेतों की कमी ने भी हादसे के खतरे को कई गुना बढ़ा दिया।

ब्लैक आइस को पहाड़ी इलाकों में ‘अदृश्य मौत’ भी कहा जाता है। यह सड़क पर नजर नहीं आती, लेकिन कांच की तरह बेहद फिसलन भरी होती है। बुधवार रात भद्रवाह और आसपास के इलाकों में तापमान माइनस 1.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। पहाड़ों से रिसता पानी सड़क पर फैल गया और रात के पाले ने उसे जमाकर ब्लैक आइस में बदल दिया।

एक प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक, हादसे वाली जगह के पास एक छोटा नाला है, जिसका पानी सड़क तक आ गया था। रात की ठंड और पाले की वजह से वहां कांच जैसी फिसलन बन गई थी। जैसे ही वाहन मोड़ पर पहुंचा और चालक ने ब्रेक लगाने की कोशिश की, टायरों ने सड़क से पकड़ खो दी। दोपहर तक धूप न पहुंचने के कारण वह बर्फ और नमी पिघल नहीं पाई, जिसने बुलेटप्रूफ वाहन को भी बेबस कर दिया।

इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में सड़कों की सुरक्षा, नियमित रखरखाव और सर्दियों के दौरान विशेष इंतजामों की जरूरत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। देश की रक्षा में तैनात जवानों की यह शहादत सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here