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Delhi Assembly: दिल्ली विधानसभा में प्रदूषण पर भारी हंगामा, आतिशी के खिलाफ BJP का प्रदर्शन, AAP विधायकों का वॉकआउट

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Delhi Assembly: दिल्ली विधानसभा में प्रदूषण पर भारी हंगामा, आतिशी के खिलाफ BJP का प्रदर्शन, AAP विधायकों का वॉकआउट

दिल्ली विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पांचवें दिन प्रदूषण जैसे गंभीर मुद्दे पर चर्चा शुरू होते ही सदन में भारी हंगामा देखने को मिला। आम आदमी पार्टी के विधायकों ने चर्चा की शुरुआत के साथ ही विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया और विधानसभा परिसर में दिल्ली सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इसी दौरान कपिल मिश्रा के इस्तीफे की मांग को लेकर स्थिति और तनावपूर्ण हो गई, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष के निर्देश पर आम आदमी पार्टी के विधायक कुलदीप कुमार, संजीव झा और जरनैल सिंह को मार्शल आउट कर दिया गया। इसके विरोध में शेष आप विधायकों ने भी सदन से वॉकआउट कर दिया।

हंगामे के बीच भारतीय जनता पार्टी ने आम आदमी पार्टी और उसकी नेता आतिशी पर तीखा हमला बोला। दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि विपक्ष को पहले से ही पता था कि प्रदूषण पर चर्चा होने वाली है, इसके बावजूद वे सदन से भाग खड़े हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष की नेता आतिशी सदन में मौजूद नहीं थीं, जो दिल्ली के प्रति उनकी गंभीरता को दर्शाता है। सिरसा ने कहा कि 11 साल तक दिल्ली पर शासन करने के बाद आम आदमी पार्टी अपनी नाकामियों पर चर्चा से बच रही है और जनता के सवालों का जवाब देने से भाग रही है।

दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद ने भी आम आदमी पार्टी पर सदन को बाधित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब प्रदूषण जैसे अहम मुद्दे पर चर्चा का अवसर मिला तो आम आदमी पार्टी अपने 12 साल के कार्यकाल की विफलताओं का जवाब देने से बचने के लिए हंगामा कर रही है। उनके मुताबिक आम आदमी पार्टी का उद्देश्य दिल्ली के वास्तविक मुद्दों पर चर्चा न होने देना है ताकि जनता के सामने उनके कुशासन की सच्चाई न आ सके।

वहीं, मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा कि शीतकालीन सत्र चार दिनों के लिए तय किया गया था, लेकिन विपक्ष ने लगातार सदन की कार्यवाही बाधित की। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी को यह जानकारी थी कि सरकार प्रदूषण पर चर्चा लाने जा रही है, इसके बावजूद उन्होंने उपराज्यपाल के भाषण से लेकर सदन की कार्यवाही तक को बाधित किया। प्रवेश वर्मा ने कहा कि सरकार ने सदन की अवधि बढ़ाकर 9 तारीख को फिर से बुलाने का फैसला इसलिए किया ताकि संशोधित अनुमान पारित किए जा सकें, क्योंकि इनके बिना दिल्ली के विकास कार्य ठप पड़ सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष की नेता आतिशी दिल्ली में रहते हुए भी लगातार सदन से अनुपस्थित हैं और इसके लिए उन्हें माफी नहीं बल्कि सजा मिलनी चाहिए।

सदन में हुए इस पूरे घटनाक्रम के बाद दिल्ली की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। प्रदूषण जैसे गंभीर मुद्दे पर चर्चा के बजाय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और हंगामे ने शीतकालीन सत्र की कार्यवाही को प्रभावित किया, जिससे जनता से जुड़े अहम सवाल एक बार फिर अधूरे रह गए।

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