Home राजनीति Dalit Purification Row: राहुल गांधी ने उत्तराखंड-राजस्थान में ‘शुद्धिकरण’ का मुद्दा उठाया,...

Dalit Purification Row: राहुल गांधी ने उत्तराखंड-राजस्थान में ‘शुद्धिकरण’ का मुद्दा उठाया, BJP-RSS पर साधा निशाना; बोले- मुझे मोदी की चुप्पी नहीं, एक्शन चाहिए

0
5

Dalit Purification Row: राहुल गांधी ने उत्तराखंड-राजस्थान में ‘शुद्धिकरण’ का मुद्दा उठाया, BJP-RSS पर साधा निशाना; बोले- मुझे मोदी की चुप्पी नहीं, एक्शन चाहिए

नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने उत्तराखंड और राजस्थान में सामने आई कथित ‘शुद्धिकरण’ की घटनाओं को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस तरह की घटनाएं दलितों के प्रति भेदभाव और छुआछूत की मानसिकता को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि किसी दलित व्यक्ति के किसी स्थान पर जाने के बाद उस जगह का ‘शुद्धिकरण’ किया जाना छुआछूत का ही दूसरा रूप है और संविधान ऐसी प्रथा को समाप्त कर चुका है।

राहुल गांधी ने शनिवार को कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन के दौरान यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के हल्द्वानी कार्यक्रम के बाद हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ के साथ राजस्थान में सामने आई इसी तरह की एक घटना का जिक्र किया। राहुल गांधी ने मांग की कि ऐसी घटनाओं में तत्काल FIR दर्ज कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए और आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए।

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया नहीं आने से जुड़े सवाल पर कहा कि उनकी दिलचस्पी इस बात में नहीं है कि प्रधानमंत्री मोदी या दूसरे लोग इस मामले पर चुप हैं। उन्होंने कहा कि वह इन घटनाओं में कार्रवाई चाहते हैं। राहुल गांधी के मुताबिक, यदि कानून का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।

राहुल गांधी ने ‘शुद्धिकरण’ शब्द के सामाजिक अर्थ पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर किसी व्यक्ति के किसी स्थान पर जाने के बाद उस जगह को शुद्ध करने की रस्म की जाती है तो इससे यह संदेश जाता है कि उस व्यक्ति की मौजूदगी से वह स्थान ‘अशुद्ध’ हो गया था। राहुल गांधी ने इसी सोच को छुआछूत से जोड़ते हुए कहा कि “शुद्धिकरण वास्तव में छुआछूत का दूसरा नाम है।”

उनका कहना था कि जब किसी दलित व्यक्ति के किसी स्थान पर जाने के बाद वहां ‘शुद्धिकरण’ किया जाता है तो इससे जाति के आधार पर भेदभाव का संदेश जाता है। राहुल गांधी ने इसे केवल किसी राजनीतिक नेता या व्यक्ति के अपमान का विषय मानने के बजाय व्यापक सामाजिक समानता और दलित सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया।

राहुल गांधी ने अपने आरोपों के समर्थन में राजस्थान की एक घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि राजस्थान में कांग्रेस विधायक दल से जुड़े एक नेता के मंदिर जाने के बाद BJP नेताओं द्वारा कथित रूप से ‘शुद्धिकरण’ किया गया। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि किसी व्यक्ति के मंदिर या सार्वजनिक स्थान पर जाने के बाद वहां शुद्धिकरण करने की आवश्यकता आखिर क्यों महसूस की जाती है और इसके पीछे कैसी मानसिकता काम करती है।

उन्होंने कहा कि ऐसी घटना को केवल किसी एक नेता के अपमान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, यह उस सामाजिक सोच की ओर संकेत करती है जिसमें किसी व्यक्ति के साथ उसकी जाति के आधार पर व्यवहार किया जाता है। कांग्रेस नेता ने इसे सामाजिक समानता और संविधान की भावना के खिलाफ बताया।

राहुल गांधी ने संविधान के अनुच्छेद 17 का भी हवाला दिया। अनुच्छेद 17 भारत में छुआछूत को समाप्त करता है और किसी भी रूप में इसके आचरण को प्रतिबंधित करता है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि कथित ‘शुद्धिकरण’ जैसी घटनाएं उसी मानसिकता को आगे बढ़ाती हैं जिसे संविधान समाप्त कर चुका है।

इस विवाद में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के हल्द्वानी दौरे का मामला प्रमुखता से सामने आया है। खड़गे ने 8 अगस्त को उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान में कांग्रेस की एक रैली को संबोधित किया था। इसके दो दिन बाद 10 अगस्त को श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास संगठन से जुड़े लोगों द्वारा उसी स्थान पर हवन और कथित ‘शुद्धिकरण’ किए जाने का मामला सामने आया।

इस घटना के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे ने संसद में भी मामला उठाया था। खड़गे का कहना था कि उन्होंने हल्द्वानी की रैली में अपने भाषण के दौरान किसी जाति या धर्म के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की और जनता से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी थी। इसके बावजूद कार्यक्रम के बाद मंच के कथित ‘शुद्धिकरण’ से उन्होंने खुद को अपमानित महसूस किया।

खड़गे ने इस घटना को छुआछूत से जोड़ते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। कांग्रेस की ओर से मांग की गई कि घटना की जांच की जाए और यदि छुआछूत से संबंधित कानूनों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई की जाए।

राहुल गांधी ने अब इसी विवाद को आगे बढ़ाते हुए इसे दलित सम्मान और संविधान में दिए गए समानता के अधिकार से जोड़ा है। उन्होंने BJP और RSS पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि इस तरह की घटनाएं जातिगत भेदभाव वाली सोच को प्रदर्शित करती हैं। हालांकि BJP ने कांग्रेस के इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुए कथित शुद्धिकरण कार्यक्रम में BJP का कोई कार्यकर्ता शामिल नहीं था। उन्होंने घटना को BJP से जोड़ने के कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया।

धामी के मुताबिक, खड़गे के कार्यक्रम से पहले एक विशेष समुदाय की ओर से कथित तौर पर धार्मिक भावनाएं भड़काने वाले नारे लगाए गए थे और इसके बाद कुछ धार्मिक संगठनों ने अपनी प्रतिक्रिया के तौर पर वहां कार्यक्रम किया। मुख्यमंत्री ने इसे कुछ संगठनों की प्रतिक्रिया बताया और BJP की भूमिका से इनकार किया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस पर इस मामले को राजनीतिक रंग देने और जातिगत भेदभाव का नैरेटिव खड़ा करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में मल्लिकार्जुन खड़गे का अपमान करने जैसी कोई बात नहीं है और राज्य के लोग उनका सम्मान करते हैं। इस तरह हल्द्वानी की घटना को लेकर कांग्रेस और BJP के दावे आमने-सामने हैं।

यह विवाद ऐसे समय में राजनीतिक मुद्दा बन रहा है जब उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी गतिविधियां तेज करनी शुरू कर दी हैं। मल्लिकार्जुन खड़गे का हल्द्वानी कार्यक्रम भी कांग्रेस की राजनीतिक गतिविधियों का हिस्सा था। ऐसे में ‘शुद्धिकरण’ विवाद अब सामाजिक मुद्दे के साथ राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है।

राहुल गांधी ने हालांकि इसे केवल चुनावी या राजनीतिक विवाद के रूप में देखने के बजाय दलित सम्मान और संवैधानिक अधिकारों का मामला बताया है। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति के साथ उसकी जाति के आधार पर भेदभाव करना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है और ऐसी घटनाओं पर कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

इस पूरे मामले में एक तरफ कांग्रेस BJP-RSS पर दलित विरोधी मानसिकता का आरोप लगाते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग कर रही है, वहीं दूसरी ओर BJP और उत्तराखंड सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए हल्द्वानी के कथित शुद्धिकरण कार्यक्रम से पार्टी का संबंध होने से इनकार किया है।

राहुल गांधी के ताजा बयान के बाद जातिगत भेदभाव, छुआछूत, दलित सम्मान और संविधान के अनुच्छेद 17 को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया है कि उनका मुख्य जोर इस बात पर है कि कथित ‘शुद्धिकरण’ की घटनाओं की जांच हो और कानून का उल्लंघन पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर कार्रवाई की जाए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here