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तीन तीन बार हार चुके चुनाव लड़ने की हिम्मत नही जुटा पा रहे कांग्रेस नेता

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तीन तीन बार हार चुके चुनाव लड़ने की हिम्मत नही जुटा पा रहे कांग्रेस नेता
तीन तीन बार हार चुके चुनाव लड़ने की हिम्मत नही जुटा पा रहे कांग्रेस नेता

तीन तीन बार हार चुके चुनाव लड़ने की हिम्मत नही जुटा पा रहे कांग्रेस नेता

* गठ्बन्धन टूटने से चिंता में डूबे हैं ज्यादातर

– अश्वनी भारद्वाज –

नई दिल्ली ,अब यह लगभग तय है आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन नहीं होने वाला | आम आदमी पार्टी तथा कांग्रेस दोनों की ओर से ही राज्य इकाईयां यह घोषणा कर चुकी है | लगभग तीन माह तक चले गठबंधन के बाद दोनों पार्टियाँ आमने सामने है | हालांकि आम आदमी पार्टी अभी ज्यादा आक्रामक नहीं है लेकिन दिल्ली कांग्रेस के नेता आम आदमी पार्टी की सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं चूक रहे |गठबंधन रहे या टूटे से आम आदमी पार्टी पर फर्क नहीं पड़ने वाला क्योंकि जनता के बीच उनका पपलू सैट है | अलबत्ता कांग्रेस के उन हवा हवाई नेताओं की नींद जरुर हराम हो गई है जो यह उम्मीद पाले थे आम आदमी पार्टी के सहारे शायद इस बार उनकी हार का सिलसिला खत्म हो जाए | लेकिन उन्हें ऐसा होता नहीं दिख रहा | दरअसल पिछले तीन चुनावो से कांग्रेस की हालत आम आदमी पार्टी नें पतली कर रखी है ,लगातार दो विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का खाता तक नहीं खुल सका और इसी तरह तीन लगातार लोकसभा चुनावों में कांग्रेस बैरंग ही लौटी है | पार्टी के ज्यादातर पूर्व विधायक लगातार तीन -तीन बार हार चुके हैं तो कई हार का चौका भी जड़ चुके हैं | और ज्यादातर को यह आभास भी है दिल्ली उनसे बहुत दूर जा चुकी है |

कांग्रेस के लगभग पूरे वोट बैंक पर आप पार्टी नें कब्जा जमा लिया है ,जो आसानी से हिलने वाला नहीं है | जमीनी हकीकत समझ करीब आधा दर्जन पूर्व विधायक तो भाजपा का दामन थाम ही चुके है और करीब दो दर्जन तैयार बैठे है लेकिन भाजपा ज्यादा फ्यूज बल्बों को अपने पाले में लेना नहीं चाहती और आम आदमी पार्टी का भी तकरीबन यही स्टैंड रहने वाला है लिहाजा कांग्रेस के पूर्व विधायकों के सामने कोई विकल्प बचता नही और हार का चौका ज्यादातर लगाने के मूड में भी नहीं है | शायद यही वजह है चंद पूर्व विधायकों को छोड़ ज्यादातर सक्रिय भी नहीं दिख रहे या हैं भी तो अन्य पार्टियों की ओर हसरत भरी निगाहों से निहार रहे हैं | आज बस इतना ही …

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