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Delhi Building Safety: हादसे रोकने के लिए पहले से सतर्क रहना जरूरी, भवन सुरक्षा नीति का कदम सराहनीय : डॉ. यू.के. चौधरी

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Delhi Building Safety: हादसे रोकने के लिए पहले से सतर्क रहना जरूरी, भवन सुरक्षा नीति का कदम सराहनीय : डॉ. यू.के. चौधरी

नई दिल्ली (रविंद्र कुमार ) : राजधानी में लगातार सामने आ रहे भवन हादसों और जर्जर इमारतों से जुड़े खतरे के बीच दिल्ली सरकार द्वारा भवन सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की पहल को भाजपा उत्तर-पूर्वी जिला अध्यक्ष डॉ. यू.के. चौधरी ने महत्वपूर्ण और स्वागत योग्य कदम बताया है। उन्होंने कहा कि भवनों की सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक स्तर पर केवल हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से खतरनाक इमारतों की पहचान, नियमित निरीक्षण और समयबद्ध सुधार की व्यवस्था विकसित करना जरूरी है। सरकार की प्रस्तावित नीति यदि प्रभावी ढंग से लागू होती है तो इससे आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। डॉ. यू.के. चौधरी ने कहा कि दिल्ली में बड़ी संख्या में लोग पुराने मकानों, पीजी, बाजारों, स्कूलों, अस्पतालों और अन्य सार्वजनिक भवनों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में किसी भवन की संरचनात्मक कमजोरी या अग्नि सुरक्षा में कमी को नजरअंदाज करना गंभीर खतरे को न्योता देने जैसा है। उन्होंने कहा कि नगर निगम, डीडीए, दिल्ली अग्निशमन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल के साथ नियमित निरीक्षण की ठोस व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पुराने, जर्जर और नियमों के विपरीत बने भवनों का क्षेत्रवार सर्वे कराया जाना चाहिए। जिन भवनों में गंभीर सुरक्षा खामियां पाई जाएं, उनकी अलग श्रेणी बनाकर तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए। भवन मालिकों को मरम्मत अथवा सुरक्षा मानकों को पूरा करने के लिए निश्चित समय सीमा दी जाए और समय सीमा का पालन नहीं होने पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
भाजपा जिला अध्यक्ष ने कहा कि हालिया भवन हादसों ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि क्या खतरनाक इमारतों की समय रहते पहचान और निगरानी की मौजूदा व्यवस्था पर्याप्त है। सत्य निकेतन हादसे के बाद असुरक्षित भवनों और अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के निर्देश इस दिशा में जरूरी कदम हैं। उन्होंने कहा कि हादसा होने के बाद राहत और बचाव कार्य अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन प्रशासन की पहली प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि ऐसी स्थिति उत्पन्न ही न हो। डॉ. चौधरी ने कहा कि भवन सुरक्षा की जांच केवल ढांचे तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। संरचनात्मक मजबूती के साथ अग्नि सुरक्षा उपकरण, विद्युत व्यवस्था, आपातकालीन निकास, सीढ़ियों की स्थिति और अन्य अनिवार्य सुरक्षा मानकों की भी नियमित जांच होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि निरीक्षण रिपोर्ट को डिजिटल माध्यम से दर्ज किया जाए, ताकि संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ-साथ उच्च स्तर पर भी इसकी निगरानी की जा सके।

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