Delhi BJP vs AAP: होली के बाद दिल्ली में केजरीवाल की भाजपा सरकार को घेरने की तैयारी एक साल की चुप्पी के बाद अरविन्द आएगें केजरीवाल के रूप में: अश्वनी भारद्वाज
नई दिल्ली ,हैडलाइन पढकर आप सोच रहे होंगे होली से पहले ही पंडित जी आज होली के रंग में दिख रहे हैं लेकिन जब हमारा यह लेख आपके सम्मुख होगा तो उस दिन देशभर में होली की धूम मच रही होगी फिर हम काहे उस धूम से दूर रहें | यह बात अलग है कालेज समय के बाद हम होली से दूर ही रहना पसंद करते है लेकिन लेखक हैं तो कलम तो चलेगी ही और वह भी बंद कमरे में दीन दुनिया से दूर होकर | होली के दिन हमने सोचा केजरीवाल जी पर ही कुछ खंगाल लिया जाए ,वैसे भी यह होली उनके लिए बड़ा खास लेकर आई है उन पर लगे काले और बदरंग दाग भले ही कुछ समय के लिए लेकिन धुल गए है, और न्यायलय से उन्हें बड़ी राहत जो मिली है माननीय न्यायालय नें जिस तरह से जांच एजेंसियों को कटघरे में खड़ा किया है जनता के बीच एक बार फिर से केजरीवाल की चर्चा शुरू हो गई है |
एक साल जिस तरह से केजरीवाल नें वनवास काटा है ये वही जानते है एक-एक दिन उन्होंने किन हालात में बिताया है | सियासी ताना -बाना बुनने में माहिर अरविन्द इतनी बड़ी राहत मिलने के बाद चुप रहने वाले नहीं है सियासी लोग इस बात को अच्छे से जानते हैं | अब क्या करेगें अरविन्द इसकी जानकारी बेहद कम लोगो को हैं लेकिन जितना हम उन्हें जानते हैं वे चुप रहने वाले नहीं है और उन्होंने अपनी रणनीति बनानी शुरू भी कर दी है | और उनकी रणनीति कोई साधारण नहीं होती यह भी किसी से छिपा नहीं है एक दो बार नहीं अपितु तीन-तीन बार दोनों दिग्गज पार्टियों को अपनी रणनीति की ताकत दिखा चुके अरविन्द एक बार फिर से नये रूप में जनता के सामने आयें इस सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता | जिसकी शुरुवात वे मीडीया के सामने आंसू बहाकर कर भी चुके है | जहां तक उनके एक साल चुप रहने का सवाल है घर बैठकर वे कोई कबड्डी तो खेल नहीं रहे थे, एक आम आदमी से सियासी हस्ती बने अरविन्द फिर से केजरीवाल बनने के सपने जरुर बुन रहे होंगे | आप सोच रहे होंगे हम केजरीवाल शब्द पर जोर क्यों दे रहें है, जी हां पूर्व सी.एम. अरविन्द नाम से कम और केजरीवाल नाम से ज्यादा फेमस हैं | देश भर में आन्दोलन की बदौलत ही केजरीवाल नाम की पहचान बनी थी | जहां तक अब उनकी रणनीति का सवाल है दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार को घेरने और साल भर की उनकी नाकामियों की लिस्ट वे बना चुके हैं |
दिल्ली की जनता भी रेखा गुप्ता सरकार का साल भर का लेखा जोखा देख चुकी है और दोनों सरकारों के काम काज की तुलना भी जनता करने लगी है | दिल्ली की जनता से जुड़े सीधे मुददों जैसे राशन कार्डों के रद्द होने पर अरविन्द की पूरी टीम काम कर रही है ,भाजपा के चुनावी वादों को जनता को याद कराने का रोडमैप भी अरविन्द तैयार करने में लगे है | अरविन्द एक बार फिर से जनता की अदालत में कूदने की तैयारी कर रहे हैं जिसका आगाज वे दो दिन पहले कर भी चुके हैं | दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव भी रेखा गुप्ता सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं चूकते लेकिन इलोक्ट्रोनिक मीडिया उनकी पहुंच से बाहर है और यह आप जानते ही हैं जो दिखता है वही बिकता है | इतना ही नहीं जो रणनीति वे बनाते हैं निचले स्तर पर उसे उतनी गति भीं नहीं मिल पाती लिहाजा केजरीवाल एक बार फिर से फुल फॉर्म में दिखें इसकी सम्भावना बेहद ज्यादा है और होली के बाद अरविन्द एक अलग ही अंदाज़ में दिखेगें इस सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता | आज बस इतना ही …



