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चिराग पासवान की सहभागिता से गोवा महोत्सव से युवाओं के लिए संदेश पर्यटन से आगे बढ़कर आध्यात्मिक चेतना का संदेश

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चिराग पासवान
चिराग पासवान की सहभागिता से गोवा महोत्सव से युवाओं के लिए संदेश पर्यटन से आगे बढ़कर आध्यात्मिक चेतना का संदेश

चिराग पासवान की सहभागिता से गोवा महोत्सव से युवाओं के लिए संदेश पर्यटन से आगे बढ़कर आध्यात्मिक चेतना का संदेश

नई दिल्ली (रविंद्र कुमार ) गोवा की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित गोवा स्पिरिच्युअल फेस्टिवल 2026 इस वर्ष पर्यटन उत्सव से आगे बढ़कर आध्यात्मिक चेतना के व्यापक मंच के रूप में सामने आया है। यह महोत्सव 19 से 24 फरवरी तक सतगुरु फाउंडेशन के तत्वावधान में पद्मश्री सद्गुरु ब्रह्मेशानंद आचार्य स्वामीजी की प्रेरणा से तथा मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत के नेतृत्व में आयोजित किया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की उपस्थिति ने इस आयोजन को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि गोवा को अब केवल “सूर्य, रेती और समुद्र” के रूप में नहीं, बल्कि उसकी समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के लिए भी जाना जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे आधुनिक जीवनशैली के साथ-साथ भारतीय आध्यात्मिक मूल्यों को भी अपनाएं और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहें। गोवा आध्यात्मिक महोत्सव 2026 का मुख्य उद्देश्य राज्य की छवि को केवल समुद्र तटों और मनोरंजन तक सीमित दृष्टिकोण से बाहर निकालना है।

यह आयोजन गोवा की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को विश्व पटल पर स्थापित करने का प्रयास है। योग, ध्यान, समुद्र आरती और विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि आधुनिक पर्यटन और प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा एक साथ आगे बढ़ सकती हैं। युवाओं को नई दिशा चिराग पासवान ने कहा कि सांस्कृतिक विरासत भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितना आधुनिक विकास। वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वह इस विरासत को संरक्षित करे और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाए। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के आयोजन गोवा की पहचान को और मजबूत करेंगे तथा आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देंगे। इससे स्थानीय संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे और सामाजिक समरसता को बल मिलेगा।

महोत्सव के दौरान कळंगुट समुद्र तट पर भव्य समुद्र आरती का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों ने भाग लिया। शोभायात्रा, ढोल-ताशों की गूंज, जयघोष और हरिनाम संकीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। यह दृश्य गोवा की पारंपरिक आस्था और आधुनिक पर्यटन के सुंदर संगम को दर्शाता है। योग और ध्यान सत्रों में युवाओं, स्थानीय नागरिकों तथा विदेशी पर्यटकों की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही। संत-महंतों और आध्यात्मिक गुरुओं के प्रवचनों ने लोगों को शांति, सद्भाव और नैतिक मूल्यों को अपनाने का संदेश दिया। आयोजकों के अनुसार, इन सत्रों का उद्देश्य केवल शारीरिक स्वास्थ्य नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन और आत्मिक जागरूकता को भी बढ़ाना है। महोत्सव में सद्गुरु ब्रह्मेशानंद स्वामी सहित अनेक संत-महंतों ने लोगों को संबोधित किया।

उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा होनी चाहिए। योग और ध्यान के माध्यम से व्यक्ति न केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ रहता है, बल्कि मानसिक रूप से भी सशक्त बनता है। ऐसे आयोजनों से समाज में सकारात्मक सोच और आपसी भाईचारे को बढ़ावा मिलता है। क्यों है। यह आयोजन गोवा की संस्कृति और धर्म परंपरा को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का सशक्त प्रयास है। महोत्सव का उद्देश्य “गोवा की आध्यात्मिक विरासत से वैश्विक शांति का संदेश” देना है। अलग-अलग स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में देश-विदेश से आए श्रद्धालु और साधक भाग ले रहे हैं। आयोजकों का कहना है कि आने वाले वर्षों में यह महोत्सव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाएगा और गोवा की आध्यात्मिक परंपरा को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। यह आयोजन न केवल गोवा की छवि को नए आयाम देगा |

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