UP Crime Verdict: बांदा पोर्नोग्राफी केस में JE और पत्नी को फांसी
उत्तर प्रदेश के Banda की एक विशेष अदालत ने बहुचर्चित बाल पोर्नोग्राफी और यौन शोषण मामले में कड़ा फैसला सुनाते हुए सिंचाई विभाग के जूनियर इंजीनियर रामभवन और उसकी पत्नी को दोषी करार दिया है। अदालत ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई है। कोर्ट ने इसे अत्यंत जघन्य और अमानवीय अपराध बताते हुए स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में कठोरतम दंड ही न्याय के अनुरूप है।
यह मामला उस समय सामने आया जब Central Bureau of Investigation को वर्ष 2020 में Interpol के माध्यम से सूचना मिली कि भारत से बच्चों के यौन शोषण से जुड़े वीडियो इंटरनेट पर अपलोड कर विदेशों में प्रसारित किए जा रहे हैं। इन इनपुट के आधार पर जांच शुरू हुई और संदेह की सुई बांदा निवासी जेई रामभवन और उसकी पत्नी पर जाकर टिक गई।
CBI की टीम ने छापेमारी के दौरान आरोपियों के घर से कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, हार्ड डिस्क और पेन ड्राइव बरामद किए। डिजिटल फॉरेंसिक जांच में 34 बच्चों के अश्लील वीडियो और सैकड़ों आपत्तिजनक तस्वीरें मिलीं। जांच में यह भी सामने आया कि इन वीडियो को विदेशी नेटवर्क के माध्यम से बेचा जा रहा था और आरोपियों ने इस अवैध गतिविधि से मोटी रकम कमाई।
CBI ने आरोपियों को 2020 में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। विस्तृत जांच के बाद फरवरी 2021 में अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 74 गवाह पेश किए और डिजिटल साक्ष्यों समेत कई तकनीकी प्रमाण अदालत के सामने रखे। अदालत ने सभी तथ्यों, गवाहों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद करीब 160 पन्नों का विस्तृत फैसला सुनाया।
अपने आदेश में अदालत ने कहा कि आरोपियों ने मासूम बच्चों के साथ जो कृत्य किया वह समाज की नैतिकता, मानवता और कानून तीनों के खिलाफ है। कोर्ट ने इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी का अपराध मानते हुए दोनों को फांसी की सजा सुनाई और आदेश दिया कि उन्हें तब तक फांसी पर लटकाया जाए जब तक उनकी मृत्यु न हो जाए।
साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि पीड़ित बच्चों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए, ताकि उन्हें न्याय के साथ-साथ आर्थिक सहायता भी मिल सके। फैसले के बाद कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय बाल यौन शोषण और ऑनलाइन पोर्नोग्राफी के खिलाफ सख्त संदेश देता है।
यह मामला देश में साइबर अपराध, बाल सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े अपराधों की गंभीरता को उजागर करता है। जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और दोषियों को कानून के दायरे में लाया जा सके।



