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मदिरा सेवन करने वालों पर होली पर भी मेहरबान हुई दिल्ली सरकार

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मदिरा सेवन करने वालों पर होली पर भी मेहरबान हुई दिल्ली सरकार

मदिरा सेवन करने वालों पर होली पर भी मेहरबान हुई दिल्ली सरकार

होली और रविदास जयंती को हटाया ड्राई डे सूची से

– अश्वनी भारद्वाज –

नई दिल्ली ,हेडलाइंस पढ़ कर मदिरा का अक्सर ज्यादा सेवन करने वाले तो निश्चित रूप से झूम उठेगें, लेकिन लॉ एंड आर्डर को मानने और समझने वालों को गुस्सा भी आ रहा होगा | समझ गए ना आप जब होली पर कई दशकों से ड्राई डे रहने के बावजूद मदिरा का ज्यादा सेवन करने वाले लोग किस तरह से शहर की सडकों पर उत्पात मचाते रहे हैं और अब तो उनके शहर में होली पर शराब के ठेके खुले रहेगें तो कानून व्यवस्था का क्या हाल होगा |

हम गलत नहीं कह रहे ड्राई डे के बावजूद होली पर शहर में कानून व्यवस्था का क्या हाल रहता है पुलिस को उस दिन उत्पातियों को काबू करने के लिए कितनी मशक्त करनी पडती है ये तो पुलिस कर्मी ही बता सकते हैं लेकिन रिकार्ड बताते हैं उस दिन अन्य दिनों के मुकाबले शहर में ज्यादा झगड़े ,फसाद ,रोड एक्सीडेंट होते हैं, और अब तो उन्हें शराब के लिए ना तो अवैध शराब कारोबारियों से महंगी, तकरीबन दोगुना दाम पर शराब खरीदनी पड़ेगी और ना ही शराब के लिए दिल्ली से बाहर भटकना पड़ेगा बल्कि उन्हें उनके घरों के पास ही सरकारी ठेकों से शराब मिल जायेगी | जी हाँ दिल्ली की सरकार के आबकारी आयुक्त नें जो आदेश जारी किया है उसके मुताबिक दिल्ली में केवल गणतन्त्र दिवस,महाशिवरात्रि ,ईद उल फ़ितर,राम नवमी और महावीर जयंती ही ड्राई दे रहेगें |

समझ गए ना आप यानी होली और रविदास जयंती जो पिछले साल तक ड्राई डे थे इस बार उन्हें उस सूची से हटा दिए गया है | इसी तरह स्वामी दयानन्द सरस्वी जयंती को भी उस सूची से हटा दिया गया है | जो सरकार पिछली सरकार की आबकारी नीति की आलोचना करती थी और उसके विरोध को मुद्दा बना सत्ता पर काबिज हुई थी आज उसी सरकार नें विवादस्पद निर्णय ले खुद नये विवाद को जन्म दे दिया है | इस मुद्दे पर विपक्ष और दिल्ली की जनता भाजपा सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ेगी इस सम्भावना से इनकार नहीं किया जा सकता |

होली का वर्नण तो हमने विस्तार से कर दिया रविदास जयंती भी लाखों लोगो की आस्था से जुडी है, यह निर्णय भी भाजपा सरकार पर भारी पड़ेगा इससे भी इंकार नहीं किया जा सकता और इसी तरह स्वामी दयानन्द सरस्वती जयंती से भी बड़ी संख्या में यहाँ तक कि भाजपा समर्थक भी असहज महसूस करेगें | जहां तक होली पर कानून व्यवस्था का सवाल है सरकार नें इसके विपरीत प्रभावों पर विचार नहीं किया लेकिन शराब के ठेकों पर काम करने वालों को कितनी परेशानी होगी बिना पुख्ता सुरक्षा के उस दिन ठेकों पर ड्यूटी देना कितना जोखिम भरा काम होगा और दिल्ली की सीमाओं पर क्या हाल होगा इसका अंदाज़ा लगाना भी मुश्किल है |

हमारा सरकार से आग्रह है इस फैंसले पर एक बार फिर से विचार करे अन्यथा यह मुद्दा क्या गुल खिला सकता है इसकी चर्चा फिर कभी | आज बस इतना ही …

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