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वोकल फॉर लोकल’ सोच से मिली घरेलू उद्योग को मजबूती : मुकेश गोयल

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मुकेश गोयल
वोकल फॉर लोकल' सोच से मिली घरेलू उद्योग को मजबूती : मुकेश गोयल

वोकल फॉर लोकल’ सोच से मिली घरेलू उद्योग को मजबूती : मुकेश गोयल

* नरेंद्र मोदी का यह आह्वान वर्तमान दौर में सर्वाधिक प्रासंगिक है

नई दिल्ली ( सी.पी.एन.न्यूज़ ) : वोकल फॉर लोकल’ एक अनूठी सोच है जो देश के नागरिकों से स्थानीय स्तर पर बने उत्पादों का समर्थन करने, आर्थिक उन्नति एवं आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने का आग्रह करती है। यह अभियान, नागरिकों से स्थानीय स्तर पर तैयार वस्तुओं को प्राथमिकता देने तथा बढ़ावा देने का आग्रह करता है, जिससे घरेलू उद्योगों को मजबूती मिलती है। यह कहना है उत्तर पूर्वी दिल्ली के संसद प्रतिनिधि मुकेश गोयल का |

मुकेश गोयल कहते हैं वोकल फॉर लोकल की प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, सांसद और सभी भाजपा के नेताओं के द्वारा अपील की गई जिसका परिणाम यह हुआ कि पूरे देश में लोगों ने बढ़ चढ़ कर लोकल दुकानदारों से खरीददारी की । जिससे लोकल दुकानदारों के चेहरे पर दिवाली की खुशी साफ नजर आई। मुकेश गोयल ने यह बताया की नरेंद्र मोदी और भाजपा के नेताओं के द्वारा अपील के बाद मैने भी खादी ग्राम उद्योग से काफी खरीददारी की और मुझे महसूस हुआ की लोकल मजदूरों के द्वारा तैयार चीज काफी अच्छी बनी हुई होती है और यह काफी किफायती भी होती है और जिसको खरीदने से हमारे सभी मजदूर बहन भाइयों का सीधा-सीधा फायदा होता है और इससे आत्मनिर्भर बनने का भी रास्ता साफ होता है |

मुकेश गोयल कहते हैं स्वदेशी आंदोलन के युग की तरह, यह भविष्योन्मुखी विजन हमारे स्थानीय उत्पादकों और कारीगरों के उत्थान के लिए समर्पित है। इसने आदिवासी कला और कौशल के लिए एक नई पहचान का समर्थन किया है जिसे उसका हक नहीं दिया गया था और अक्सर पिछली सरकारों द्वारा उनकी उपेक्षा की गई थी। वोकल फॉर लोकल को रोजगार के अवसरों, नए राजस्व चैनलों, पुनर्जीवित कृषि उप-क्षेत्रों और स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग में एडवांस टेक्नोलॉजी को व्यापक रूप से अपनाने के माध्यम से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए पेश किया गया है। मुकेश गोयल कहते हैं जिस तरह बूंद-बूंद से सागर बनता है, उसी तरह अगर भारत का हर नागरिक ‘वोकल फॉर लोकल’ के मंत्र को जीने लगे तो देश को आत्मनिर्भर बनते देर नहीं लगेगी। जब सभी देशवासी स्थानीय उत्पादकों के लिए मुखर होंगे तो उनकी गूंज भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में सुनाई देगी।

मुकेश गोयल कहते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह आह्वान वर्तमान दौर में सर्वाधिक प्रासंगिक है, क्योंकि तथ्य इस बात की पुष्टि करते हैं कि स्थानीय हस्तशिल्प और जनजातीय कलाओं के माध्यम से कमाई करना पहले से अधिक लाभदायक हो गया है, स्थानीय और भौगोलिक रूप से व्यापक बाजारों तक पहुंच सरकार के प्रोत्साहन से अधिक सुविधाजनक हो गई है। इन उत्पादों की मांग और बिक्री में भी काफी सुधार हुआ है।

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