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सरकार तो बदल गई लेकिन नहीं बदल पाया बदहाल सिस्टम : सुमित शर्मा

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सुमित शर्मा
सरकार तो बदल गई लेकिन नहीं बदल पाया बदहाल सिस्टम : सुमित शर्मा

सरकार तो बदल गई लेकिन नहीं बदल पाया बदहाल सिस्टम : सुमित शर्मा

नई दिल्ली ( सी.पी.एन.न्यूज़ ) : राजधानी दिल्ली में सरकार तो बदल गई और डबल इंजन की सरकार भी बन भी गई बावजूद इसके सरकार के कामकाज का सिस्टम नहीं बदला | यह कहना है लक्ष्मी नगर विधानसभा से कांग्रेस से चुनाव लड़े वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुमित शर्मा का | सुमित शर्मा कहते है कोई भी सिस्टम देख लो ,शिक्षा का सिस्टम पहले से भी खराब हो रहा है निजी स्कूल प्रबन्धक अपनी मनमर्जी चला रहे हैं जितना चाह रहे हैं फीस बढ़ा रहे हैं | सफाई सिस्टम भी जस का तस है उसमें भी कोई सुधार नहीं दिख रहा |

आंकड़े बता रहे हैं कूड़े के पहाड़ और ऊँचे हो गए है ,परिवहन सिस्टम में भी कोई सुधार नहीं दिखाई दे रहा ,प्रदूष्ण की हालत भी पुराने ढर्रे पर चल रही है नालों की सफाई का पता मानसून के दौरान ही पता चलेगा | भ्रस्टाचार के मामले भी रोजाना सामने आ रहे हैं कुल मिलाकर कोई भी सिस्टम ठीक से पटरी पर नहीं आ सका है |

सुमित शर्मा कहते हैं जहां तक भाजपा के वादों की बात है एक भी वादा अभी पूरा नहीं होता देख रहा ,केवल योजनाओं के ख्वाब जरुर परोसे जा रहे है जिनके पूरे होने को कोई सम्भावना दूर-दूर तक नहीं दिखाई देती | सुमित शर्मा कहते हैं पिछले 11 वर्षों से दिल्ली के लोगों की जिंदगी बचाने में पिछली केजरीवाल सरकार और मौजूदा भाजपा सरकार ने सिर्फ लोगों को गुमराह करने वाली झूठी बयानबाजी की है। उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य दिवस पर जारी रिपोर्ट के आंकड़े चौकाने वाले है क्योंकि देश की राजधानी दिल्ली में हर दिन 20 नवजात शिशुओं की मौत हो रही है और यह अत्यंत भयावह है कि दिल्ली में पिछले वर्ष 7हजार से अधिक नवजात शिशु मौत की भेट चढ़ गए, जिनकी मृत्यु दर हर वर्ष बढ़ रही है।अत्यधिक शिशु मृत्यु दर का कारण कुपोषण, ठीक से विकास न होना, निमोनिया व सेप्टिसीमिया होने के साथ-साथ सरकारी अस्पतालों में एनआईसीयू की कमी और नवजात शिशुओं को बचाने में सुविधाओं की भारी कमी है। करोड़ों के स्वास्थ्य बजट मिलने के बावजूद अधिकतर सरकारी अस्पतालों में इमरजेंसी सिजेरियन सर्जरी की सुविधा नही है। ज्यादातर सरकारी अस्पतालों में आउट बार्न एनआईसीयू व पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट की भारी कमी है, जिसके कारण संकट में जरुरतमंद शिशुओं को इलाज नही मिल पाता। अस्पतालों में दवाईओं की भी भारी कमी है, जिसके कारण गरीब मातृ शिशु का समय पर पूर्ण रखरखाव नही किया जाता है।

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