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Ratnagiri Landslide: महाराष्ट्र के रघुवीर घाट में भूस्खलन से रास्ता बंद, 15-20 गांवों का संपर्क टूटा; यात्री और बस फंसी

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Ratnagiri Landslide: महाराष्ट्र के रघुवीर घाट में भूस्खलन से रास्ता बंद, 15-20 गांवों का संपर्क टूटा; यात्री और बस फंसी

महाराष्ट्र के रत्नागिरी में रघुवीर घाट पर हुए भूस्खलन ने एक बार फिर स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। रत्नागिरी और सतारा जिलों को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण मार्ग पर गुरुवार रात पहाड़ी से बड़ी मात्रा में मिट्टी और विशाल पत्थर सड़क पर आ गिरे। सड़क का एक हिस्सा भी धंस गया, जिसके कारण इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है।

रघुवीर घाट का रास्ता बंद होने का सबसे अधिक असर सतारा जिले के उन गांवों पर पड़ा है, जो रोजमर्रा की जरूरतों और आवागमन के लिए इस मार्ग पर निर्भर हैं। भूस्खलन के बाद करीब 15 से 20 गांवों का रत्नागिरी की तरफ से सीधा संपर्क प्रभावित हो गया है। सड़क के दोनों तरफ वाहन आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं और लोगों को रास्ता खुलने का इंतजार करना पड़ रहा है।

बताया जा रहा है कि गुरुवार रात घाट क्षेत्र में अचानक सड़क का कुछ हिस्सा धंस गया। इसी दौरान पहाड़ी से मिट्टी और चट्टानों का मलबा नीचे आकर सड़क पर फैल गया। कई बड़े पत्थरों ने सड़क के बड़े हिस्से को घेर लिया, जिससे छोटे वाहनों के लिए भी यहां से निकलना संभव नहीं रहा।

घटना का असर सार्वजनिक परिवहन पर भी पड़ा है। अकल्पे-खेड़ एसटी बस सुबह से भूस्खलन वाले क्षेत्र में फंसी हुई है। बस में छात्रों और महिलाओं के अलावा अन्य यात्री भी सवार हैं। लंबे समय से रास्ता बंद होने के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

इसके अलावा आसपास के गांवों की तरफ जाने वाले कई अन्य यात्री भी रास्ता बंद होने के कारण आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। स्थानीय लोगों के लिए समस्या इसलिए भी गंभीर है क्योंकि रघुवीर घाट रत्नागिरी और सतारा के बीच संपर्क स्थापित करने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। इसके बंद होने से गांवों तक पहुंचने के लिए लोगों को वैकल्पिक रास्तों पर निर्भर होना पड़ रहा है।

भूस्खलन की जानकारी मिलने के बाद संबंधित विभाग की टीमें सड़क बहाल करने के काम में जुट गईं। मलबा हटाने के लिए जेसीबी मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। सड़क पर जमा मिट्टी को हटाने का काम तेजी से चल रहा है, लेकिन मलबे के बीच मौजूद विशाल पत्थर रास्ता खोलने में सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं।

अधिकारियों और कर्मचारियों के सामने चुनौती यह है कि केवल मिट्टी हटाने से सड़क को यातायात के लिए नहीं खोला जा सकता। सड़क पर गिरे बड़े पत्थरों को भी हटाना जरूरी है। इनके आकार को देखते हुए सीधे जेसीबी से हटाना मुश्किल हो रहा है।

ऐसे में बड़े पत्थरों को छोटे हिस्सों में तोड़ने के लिए ब्रेकर का इस्तेमाल किए जाने की तैयारी है। पत्थरों को तोड़ने के बाद मशीनों की सहायता से उन्हें सड़क से हटाया जाएगा। इसके बाद पूरे मार्ग की जांच कर यह देखा जाएगा कि सड़क वाहनों की आवाजाही के लिए सुरक्षित है या नहीं।

भूस्खलन के साथ सड़क का हिस्सा धंसने के कारण मार्ग को खोलने से पहले उसकी स्थिति का आकलन भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मलबा साफ होने के बावजूद कमजोर हिस्से पर तत्काल यातायात शुरू करना जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए सड़क बहाल करने की प्रक्रिया सावधानी के साथ आगे बढ़ाई जा रही है।

फिलहाल राहत और सड़क सफाई का काम युद्धस्तर पर जारी है, लेकिन रघुवीर घाट से सामान्य यातायात कब शुरू होगा, इसे लेकर अभी कोई निश्चित समय सामने नहीं आया है। मलबे की मात्रा और सड़क पर मौजूद बड़ी चट्टानों के कारण बहाली के काम में समय लग सकता है।

मार्ग बंद होने के कारण प्रशासन की ओर से वाहन चालकों को रघुवीर घाट की तरफ जाने से बचने और उपलब्ध वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। इससे एक तरफ यात्रियों को रास्ते में फंसने से बचाया जा सकेगा, वहीं दूसरी तरफ मलबा हटाने में लगी मशीनों और कर्मचारियों को भी काम करने के लिए पर्याप्त जगह मिल सकेगी।

रघुवीर घाट में भूस्खलन की घटना ने पहाड़ी मार्गों पर यात्रा के दौरान सतर्कता की आवश्यकता को भी सामने रखा है। मिट्टी और चट्टानों के खिसकने से सड़क अचानक अवरुद्ध हो सकती है। ऐसे में मार्ग पूरी तरह सुरक्षित घोषित होने तक वाहन चालकों को प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।

अभी प्राथमिकता सड़क पर जमा मलबा और बड़े पत्थर हटाकर सतारा जिले के प्रभावित गांवों का संपर्क दोबारा स्थापित करने की है। सड़क खुलने के बाद ही अकल्पे-खेड़ एसटी बस और अन्य फंसे वाहन आगे बढ़ सकेंगे। तब तक प्रभावित गांवों और यात्रियों को वैकल्पिक व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ेगा।

 

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