Sagar Liquor Tragedy: सागर शराब कांड में मृतकों की संख्या बढ़कर 16 हुई, 32 मरीज अस्पताल में भर्ती; अब तक 16 आरोपी गिरफ्तार
सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले में संदिग्ध जहरीली शराब के सेवन से जुड़ा मामला लगातार गंभीर बना हुआ है। दैनिक भास्कर की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक इस कांड में मरने वालों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है, जबकि 32 लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। पुलिस ने अवैध शराब के कथित नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करते हुए अब तक 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामले में फरार आरोपियों की तलाश के साथ शराब तैयार करने के लिए इस्तेमाल की गई स्पिरिट के स्रोत और पूरे सप्लाई नेटवर्क की जांच की जा रही है।
मामला सागर जिले के बंडा और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ा है। सितंबर के पहले सप्ताह में संदिग्ध अवैध शराब के सेवन के बाद कई ग्रामीणों की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी थी। प्रभावित लोगों को उल्टी, बेहोशी और शरीर में झटके आने जैसी शिकायतों के बाद अस्पतालों में पहुंचाया गया। घटना सामने आने के बाद प्रशासन ने प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य टीमें भेजकर लोगों की जांच भी शुरू कराई थी।
शुरुआत में मौतों की संख्या कम थी, लेकिन उपचार के दौरान गंभीर मरीजों की मौत होने के साथ आंकड़ा बढ़ता गया। 9 सितंबर तक अलग-अलग विश्वसनीय रिपोर्टों में 15 मौतों की पुष्टि की गई थी। अब दैनिक भास्कर की ताजा रिपोर्ट में यह आंकड़ा 16 बताया गया है। अस्पतालों में भर्ती लोगों की स्थिति पर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी बनी हुई है।
घटना के बाद पुलिस ने अवैध शराब के निर्माण और बिक्री से जुड़े नेटवर्क की जांच तेज कर दी। सागर पुलिस ने बंडा और विनायका थाना क्षेत्रों में कार्रवाई करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक अब तक 16 आरोपियों को पकड़ा जा चुका है, जबकि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।
पुलिस जांच में कथित अवैध शराब तैयार करने के तरीके को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस का दावा है कि आरोपियों ने स्पिरिट का इस्तेमाल कर शराब तैयार की थी और इसे ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचाया गया। जांच में शराब तैयार करने, उसकी पैकिंग करने और फिर अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाने वाले लोगों की भूमिकाओं की पड़ताल की जा रही है।
पुलिस के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवालों में से एक शराब में इस्तेमाल हुई स्पिरिट के वास्तविक स्रोत का पता लगाना है। जांच अधिकारियों ने गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर इसकी सप्लाई चेन को खंगालना शुरू किया है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि स्पिरिट कहां से हासिल की गई, किसके जरिए आरोपियों तक पहुंची और अवैध शराब तैयार करने में किन लोगों की भूमिका रही।
पुलिस के मुताबिक पूछताछ में अवैध शराब तैयार करने और उसके वितरण से जुड़े कई नाम सामने आए हैं। कुछ मुख्य आरोपियों की तलाश की जा रही है और फरार लोगों पर इनाम भी घोषित किया गया है। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारियां केवल शराब बेचने वालों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे नेटवर्क की कड़ियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि अवैध शराब तैयार करने के बाद उसे ग्रामीण इलाकों में सप्लाई किया जाता था। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि यह नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था और इसके जरिए किन-किन क्षेत्रों में शराब पहुंचाई गई।
इस मामले की जांच केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं है। जिला प्रशासन ने घटना की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश भी दिए हैं। कलेक्टर प्रतिभा पाल ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 196 के तहत जांच कराने के निर्देश दिए और इसकी जिम्मेदारी जैसीनगर के अनुविभागीय दंडाधिकारी को सौंपी गई।
मजिस्ट्रियल जांच में मौतों के वास्तविक कारण का पता लगाने के साथ यह भी जांचा जाएगा कि संदिग्ध शराब कहां तैयार हुई, उसका भंडारण किस स्थान पर किया गया और उसे ग्रामीणों तक किसने पहुंचाया। घटना के दौरान प्रशासनिक या अन्य स्तर पर किसी प्रकार की लापरवाही हुई या नहीं, इससे जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल की जानी है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने अस्पताल पहुंचकर भर्ती मरीजों से मुलाकात की और उनका हाल जाना। मुख्यमंत्री ने मामले में दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की बात कही है। राज्य सरकार की ओर से पूरे घटनाक्रम की जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
घटना के बाद प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग को भी सतर्क किया गया। शुरुआती चरण में मेडिकल टीमों ने गांवों में घर-घर जाकर ऐसे लोगों की पहचान करने की कोशिश की थी, जिन्होंने संदिग्ध शराब का सेवन किया हो और जिनमें स्वास्थ्य संबंधी लक्षण दिखाई दे रहे हों। गंभीर मरीजों को उच्च चिकित्सा केंद्रों में रेफर करने की व्यवस्था भी की गई।
जांच एजेंसियां जब्त शराब और अन्य सामग्री की भी पड़ताल कर रही हैं। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि शराब में कौन से पदार्थ मौजूद थे और लोगों की तबीयत बिगड़ने तथा मौतों का वास्तविक चिकित्सकीय कारण क्या था। शुरुआती स्तर पर जहरीले पदार्थ की आशंका जताई गई थी, लेकिन अंतिम निष्कर्ष जांच और परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर ही सामने आएगा।
पुलिस ने अवैध शराब के कथित नेटवर्क में शामिल लोगों की भूमिका अलग-अलग स्तर पर जांचनी शुरू की है। इसमें शराब तैयार करने वाले, कच्चा माल या स्पिरिट उपलब्ध कराने वाले, पैकिंग करने वाले और उसे ग्रामीण क्षेत्रों में बेचने या पहुंचाने वाले लोग शामिल हो सकते हैं।
मामले का दायरा मध्य प्रदेश से बाहर तक जाने की आशंका को देखते हुए पुलिस अन्य राज्यों से जुड़े संभावित संपर्कों की भी जांच कर रही है। पुलिस कार्रवाई में इसे अंतरराज्यीय नेटवर्क से जोड़कर भी देखा गया है और इसी आधार पर आगे की कड़ियों को तलाशा जा रहा है।
फिलहाल पुलिस के मुताबिक 16 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और फरार लोगों की तलाश जारी है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ, डिजिटल और वित्तीय कड़ियों तथा शराब की सप्लाई चेन के आधार पर पूरे नेटवर्क तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।
दूसरी तरफ अस्पतालों में भर्ती मरीजों के उपचार पर स्वास्थ्य विभाग की नजर बनी हुई है। मौतों की संख्या बढ़ने के कारण प्रशासन के लिए गंभीर मरीजों का समय पर उपचार और प्रभावित इलाकों में अन्य संभावित मरीजों की पहचान भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।
सागर शराब कांड ने अवैध शराब के निर्माण और बिक्री पर निगरानी व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था, शराब बनाने के लिए सामग्री कहां से आ रही थी और इसे रोकने में किसी स्तर पर लापरवाही हुई थी या नहीं।
फिलहाल मामले में पुलिस और प्रशासन की अलग-अलग जांच जारी हैं। मृतकों की संख्या 16 तक पहुंचने और 32 लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की ताजा जानकारी के बीच सबसे बड़ा फोकस मरीजों के उपचार, फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और कथित जहरीली शराब की पूरी सप्लाई चेन का पता लगाने पर है।



