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NEET Protest: ‘जनता की आवाज मत दबाइए, बातचीत कीजिए’, अन्ना हजारे ने PM मोदी को लिखी चिट्ठी

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NEET Protest: ‘जनता की आवाज मत दबाइए, बातचीत कीजिए’, अन्ना हजारे ने PM मोदी को लिखी चिट्ठी

नई दिल्ली। नीट (NEET) पेपर लीक मामले और दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर समाजसेवी अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सरकार से संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की है। अपने पत्र में उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को दबाने के बजाय उससे बातचीत कर समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने लिखा कि “जनता की आवाज मत दबाइए, बातचीत कीजिए।”

अन्ना हजारे ने पत्र में कहा कि देश के लाखों युवा पेपर लीक, बेरोजगारी और प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार हो रही देरी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे समय में सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं को गंभीरता से सुने और उनके साथ संवाद स्थापित करे।

उन्होंने कहा कि किसी भी व्यवस्था में गड़बड़ी होने पर केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। यदि किसी विभाग में गंभीर लापरवाही होती है तो उसकी नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी वरिष्ठ अधिकारियों और विभाग के मुखिया को भी लेनी चाहिए। उनका कहना था कि सरकार जब उपलब्धियों का श्रेय लेती है, तो कमियों की जिम्मेदारी भी स्वीकार करनी चाहिए।

अन्ना हजारे ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि इस वर्ष लगभग 22 लाख छात्र NEET परीक्षा में शामिल हुए थे। उन्होंने दावा किया कि पेपर लीक और मूल्यांकन से जुड़ी कथित अनियमितताओं के कारण कई छात्र मानसिक तनाव और निराशा का सामना कर रहे हैं। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि इस निराशा के चलते कई छात्रों ने अपनी जान तक गंवा दी, जो बेहद दुखद और चिंताजनक स्थिति है।

पिछले करीब 25 दिनों से दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों और अभिभावकों का समर्थन करते हुए अन्ना हजारे ने लिखा कि प्रदर्शनकारी संबंधित विभाग के प्रमुख के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी मंत्री या अधिकारी का इस्तीफा लेने से सरकार नहीं गिरती, बल्कि इससे पूरे प्रशासनिक तंत्र को यह स्पष्ट संदेश जाता है कि लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी।

उन्होंने कहा कि यदि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की जवाबदेही तय होगी, तो सरकारी व्यवस्था अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी। इससे भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में भी मदद मिलेगी और आम लोगों का सरकारी संस्थाओं पर विश्वास मजबूत होगा।

अन्ना हजारे ने दिल्ली में हाल ही में हुए घटनाक्रम और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को उनके अनशन स्थल से हटाए जाने की घटना का भी उल्लेख किया। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने लंबे समय से आंदोलन चलने के बावजूद सरकार या संबंधित विभाग का कोई जिम्मेदार प्रतिनिधि प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने नहीं पहुंचा।

उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह आंदोलन कर रहे छात्रों और नागरिकों की आवाज को केवल विपक्ष की राजनीति मानकर नजरअंदाज न करे। उनके अनुसार प्रदर्शन करने वाले भी इसी देश के नागरिक हैं और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।

पत्र में अन्ना हजारे ने महात्मा गांधी के सत्याग्रह और भारतीय संविधान की लोकतांत्रिक भावना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में टकराव या दमन के बजाय संवाद और आपसी विश्वास ही सबसे प्रभावी समाधान होता है। मतभेदों को संवेदनशीलता, धैर्य और सम्मान के साथ सुलझाया जाना चाहिए।

उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि सरकार संयम का परिचय देते हुए छात्रों, अभिभावकों और नागरिकों के साथ सकारात्मक संवाद स्थापित करे, ताकि देश के युवाओं का लोकतांत्रिक व्यवस्था और सरकारी संस्थाओं पर भरोसा दोबारा मजबूत हो सके। अन्ना हजारे का मानना है कि बातचीत के जरिए ही विवादों का स्थायी समाधान निकल सकता है और यही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत भी है।

 

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