टिकिट मिलने से ज्यादा चर्चा कटने की है दिल्ली की सियासत में
* दो मंत्रियों की भी उड़ सकती है टिकिट
– अश्वनी भारद्वाज –
नई दिल्ली ,आज हम आपसे पब्लिक के बीच जो चर्चा चल रही है उसकी बात करने जा रहे हैं | अभी तक सभी पार्टियों के वर्करो को यह इंतजार रहती थी कि हमारे क्षेत्र में किस पार्टी से किसको टिकट मिल रही है लेकिन इस बार यह चर्चा जोरों पर है किसकी टिकिट कट रही है | वैसे तो यह चर्चा भारतीय जनता पार्टी में भी है कि लोकसभा चुनाव की तर्ज पर सात में से छह सीटिंग विधायकों की टिकिट कटने जा रही है या फिर सातों की | इस चर्चा से कांग्रेस भी अछूती नहीं है क्या तीन-तीन चुनाव हारे पूर्व विधायको की भी टिकिट कटने जा रही है | लेकिन आम आदमी पार्टी में यह चर्चा लगातार जोर पकड़ती जा रही है कि अभी तक घोषित 32 सीटों में से जिस तरह 17 सीटिंग विधायकों की टिकिट यानी आधे से भी ज्यादा का पत्ता साफ़ कर नये लोगो को टिकिट थमा दी गई है और यदि यही फार्मुला आगे भी जारी रहा तो बाकी 38 में से करीब 20 विधायकों की टिकिट और कटेगी |
गलियों के नुक्कड़ तथा चौराहों पर इस तरह की चर्चा को सुना जा सकता है | लोग कयास लगा रहे हैं जिस तरह आम आदमी पार्टी नें टिकिट काटने का फार्मुला बनाया है ना तो स्पीकर को बक्शा ,ना पार्टी के संस्थापक सदस्यों को ,और ना ही वरिष्ठ नेताओं को तो क्या इसी तर्ज पर मंत्रियों में से दो के विकेट भी गिराए जा सकते है | समझ गए ना आप ये दो मंत्री कौन हो सकते है जाहिर सी बात है मंत्री हैं तो अरविन्द केजरीवाल की गैरमौजूदगी में मुख्यमंत्री बनने के ख्वाब भी लिए ही होंगे और शायद ये ख्वाब कम से कम आम आदमी पार्टी में बिना अरविन्द के लिए तो नहीं लिए जा सकते |
यह चर्चा भी आम है कि 28 विधायक कुछ और बड़ी ही योजना बना रहे थे, यदि अरविन्द कुछ दिन और जेल में रहते तो शायद उनकी योजना सफल भी हो जाती | अब भला आप ही बताईये कैसे बख्श दें अरविन्द उन्हें, मंत्री हो या संतरी अरविन्द के पैमाने पर सभी बराबर हैं, जीते उनके नाम पर लेकिन बटेंगे दूसरों के नाम पर अब जब वे बट ही चुके थे तो उनकी टिकिट कटने से कौन बचा सकता है | अब समझ आया भाजपा का नारा बटोगे तो कटोगे | कौन कौन है ये 28 इसकी चर्चा बाद में आज बस इतना ही …


