Category: राज्य

  • Family Tragedy: बेटे की एक छलांग ने उजाड़ दिया पूरा परिवार, बचाने दौड़े पिता भी खदान में गिरे; कुछ देर बाद मां ने भी दे दी जान

    Family Tragedy: बेटे की एक छलांग ने उजाड़ दिया पूरा परिवार, बचाने दौड़े पिता भी खदान में गिरे; कुछ देर बाद मां ने भी दे दी जान

    Family Tragedy: बेटे की एक छलांग ने उजाड़ दिया पूरा परिवार, बचाने दौड़े पिता भी खदान में गिरे; कुछ देर बाद मां ने भी दे दी जान

    छत्रपति संभाजीनगर। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में शुक्रवार को एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत की दर्दनाक घटना सामने आई है। पारिवारिक विवाद के बाद 18 वर्षीय युवक खव्यदा डोंगर के ऊपरी हिस्से में पहुंच गया और एक खतरनाक चट्टान के किनारे खड़ा हो गया। करीब तीन घंटे तक पुलिस, दमकल विभाग, रिश्तेदार और स्थानीय लोग उसे सुरक्षित वापस लाने की कोशिश करते रहे, लेकिन युवक गहरी पत्थर की खदान में गिर गया। बेटे को बचाने की कोशिश में पिता भी संतुलन खोकर नीचे गिर गए। प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार, इसके कुछ ही क्षण बाद मां भी खदान में गिर गईं। हादसे में तीनों की मौत हो गई।

    घटना की शुरुआत शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे हुई। बताया जा रहा है कि परिवार में किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद 18 वर्षीय युवक घर से निकलकर खव्यदा डोंगर के ऊपरी हिस्से की तरफ चला गया। यहां पहुंचने के बाद वह एक बेहद खतरनाक चट्टान के किनारे खड़ा हो गया।

    पूर्व तिसगांव सरपंच और घटना के प्रत्यक्षदर्शी संजय जाधव के मुताबिक, युवक के डोंगर पर पहुंचने की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों ने उसके परिवार को इसकी सूचना दी। युवक के माता-पिता भी तुरंत मौके पर पहुंचे और बेटे को चट्टान के किनारे से सुरक्षित वापस आने के लिए समझाने लगे।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और दमकल विभाग को भी सूचना दी गई। कुछ समय बाद पुलिसकर्मी और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। युवक जिस स्थान पर खड़ा था, वहां से नीचे गहरी पत्थर की खदान थी, जिसके कारण बचाव अभियान बेहद संवेदनशील हो गया था।

    पुलिस, दमकलकर्मी, माता-पिता, रिश्तेदार और स्थानीय लोग लगातार युवक से बातचीत करते रहे। उससे सुरक्षित स्थान की तरफ आने और कोई जोखिम भरा कदम नहीं उठाने की अपील की जाती रही। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, युवक बार-बार नीचे छलांग लगाने की बात कह रहा था।

    करीब तीन घंटे तक उसे समझाने का सिलसिला चलता रहा। मौके पर मौजूद लोगों ने अलग-अलग तरीके से युवक को शांत करने और चट्टान के किनारे से पीछे लाने का प्रयास किया। माता-पिता भी लगातार अपने बेटे को वापस आने के लिए कहते रहे, लेकिन वह खतरनाक किनारे के आसपास ही घूमता रहा।

    दमकल विभाग ने किसी अनहोनी की आशंका को देखते हुए नीचे सुरक्षा जाल की व्यवस्था भी की थी। बचावकर्मी कोशिश कर रहे थे कि किसी तरह युवक को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया जाए। इसके बावजूद स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी रही।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोपहर करीब एक बजे अचानक युवक गहरी पत्थर की खदान में गिर गया। घटना इतनी तेजी से हुई कि मौके पर मौजूद लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

    बेटे को नीचे गिरते देखकर उसके पिता ने उसे बचाने के लिए तत्काल हाथ बढ़ाया। इसी कोशिश के दौरान पिता का भी संतुलन बिगड़ गया और वह भी खदान में जा गिरे। कुछ ही क्षण के भीतर पिता और पुत्र दोनों गहरी खदान में गिर चुके थे।

    पूर्व सरपंच संजय जाधव के अनुसार, अपने बेटे और पति को खदान में गिरते देखकर मां भी खुद को संभाल नहीं सकीं और कुछ ही समय बाद वह भी खदान में गिर गईं। अचानक हुए इस घटनाक्रम से वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई।

    एक ही परिवार के तीन लोगों के खदान में गिरने के बाद बचाव अभियान शुरू किया गया। हालांकि तीनों की जान नहीं बचाई जा सकी। घटना में माता-पिता और उनके 18 वर्षीय बेटे की मौत हो गई।

    जिस स्थान पर घटना हुई, वहां पत्थर की गहरी खदान होने के कारण बचाव कार्य भी चुनौतीपूर्ण रहा। पुलिस और दमकल विभाग की टीमों ने घटनास्थल पर आवश्यक कार्रवाई की और तीनों को बाहर निकालने की प्रक्रिया पूरी की।

    घटना के बाद इलाके में शोक का माहौल है। सुबह जिस परिवार के सदस्य अपने बेटे को सुरक्षित घर वापस लाने के लिए मौके पर पहुंचे थे, कुछ ही घंटों के भीतर उसी परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई।

    पुलिस अब घटना से जुड़ी परिस्थितियों की जांच कर रही है। पारिवारिक विवाद किस बात को लेकर हुआ था, युवक डोंगर तक कैसे पहुंचा और तीनों लोगों के खदान में गिरने के पूरे घटनाक्रम से संबंधित जानकारी जुटाई जा रही है। मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी जांच के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

    घटना के संबंध में प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी और पुलिस की जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम की अंतिम तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत से छत्रपति संभाजीनगर के संबंधित इलाके में मातम पसरा हुआ है।

  • Mumbai Crane Accident: कुर्ला में JCB शिफ्टिंग के दौरान घर पर गिरी क्रेन, कई लोग घायल; रेलवे ट्रैक तक पहुंचा मलबा

    Mumbai Crane Accident: कुर्ला में JCB शिफ्टिंग के दौरान घर पर गिरी क्रेन, कई लोग घायल; रेलवे ट्रैक तक पहुंचा मलबा

    Mumbai Crane Accident: कुर्ला में JCB शिफ्टिंग के दौरान घर पर गिरी क्रेन, कई लोग घायल; रेलवे ट्रैक तक पहुंचा मलबा

    मुंबई। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई के कुर्ला इलाके में शुक्रवार को एक बड़ा हादसा हो गया। कुरैशी नगर इलाके में चल रहे निर्माण कार्य के दौरान क्रेन की मदद से JCB मशीन को शिफ्ट किया जा रहा था, तभी अचानक क्रेन और JCB अनियंत्रित होकर गिर गईं। हादसे के दौरान क्रेन का हिस्सा एक घर पर भी जा गिरा। घटना में कई लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। फिलहाल किसी की मौत की सूचना नहीं है।

    बताया जा रहा है कि हादसा 21 अगस्त को देर रात करीब 2 बजकर 40 मिनट पर हुआ। इलाके में मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) से संबंधित निर्माण कार्य चल रहा था। इसी काम के दौरान एक भारी JCB मशीन को क्रेन के जरिए दूसरी जगह शिफ्ट किया जा रहा था।

    जानकारी के मुताबिक, भारी मशीन को उठाने के दौरान क्रेन का संतुलन बिगड़ गया। इसके बाद क्रेन और उसके जरिए उठाई जा रही JCB नीचे गिर गई। हादसा इतना अचानक हुआ कि आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। क्रेन का एक हिस्सा नजदीक स्थित मकान पर भी गिरने की जानकारी सामने आई है।

    स्थानीय लोगों के मुताबिक, हादसे में करीब 8 से 10 लोग घायल हुए हैं। हालांकि सेंट्रल रेलवे ने दो लोगों के घायल होने की पुष्टि की है। घायलों की वास्तविक संख्या को लेकर अलग-अलग जानकारी सामने आई है। राहत की बात यह है कि फिलहाल किसी व्यक्ति की मौत की सूचना नहीं है और किसी के गंभीर रूप से घायल होने की भी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    घटना के बाद स्थानीय लोग भी मौके पर जमा हो गए। पुलिस और संबंधित एजेंसियों को हादसे की सूचना दी गई, जिसके बाद राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। घायलों को उपचार उपलब्ध कराया गया और घटनास्थल को सुरक्षित करने की कार्रवाई की गई।

    सेंट्रल रेलवे के मुताबिक, MMRDA की ओर से पास के कार्यस्थल पर इस्तेमाल की जा रही क्रेन कुर्ला और ट्रॉम्बे के बीच स्थित रेलवे की ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइन पर भी गिर गई। इसके कारण रेलवे की संरचना को लेकर भी सुरक्षा संबंधी स्थिति पैदा हो गई।

    हालांकि जिस रेलवे लाइन पर क्रेन गिरी, उसका इस्तेमाल मुख्य रूप से मालगाड़ियों के संचालन के लिए किया जाता है। इस वजह से मुंबई की नियमित उपनगरीय ट्रेन सेवाओं पर हादसे का कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ा। रेलवे ने बताया कि यात्री ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित नहीं हुई है।

    कुर्ला से ट्रॉम्बे के बीच मौजूद यह सिंगल लाइन रेलवे ट्रैक मुख्य रूप से माल ढुलाई के लिए इस्तेमाल होता है। हादसे के बाद रेलवे अधिकारियों ने भी स्थिति का जायजा लिया और यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि रेलवे ट्रैक तथा ओवरहेड इलेक्ट्रिक सिस्टम को सुरक्षित किया जाए।

    बताया जा रहा है कि JCB की शिफ्टिंग से पहले आसपास के क्षेत्र को खाली कराने की प्रक्रिया भी की गई थी। इसके बावजूद हादसे में लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आने के बाद अब सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि भारी मशीन उठाने के दौरान सभी निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।

    हादसे के बाद घटनास्थल पर क्रेन, JCB और अन्य मलबे को हटाने का काम शुरू किया गया। भारी मशीनों के गिरने के कारण क्षेत्र को पूरी तरह साफ करने और रेलवे लाइन को सुरक्षित बनाने में सावधानी बरती जा रही है।

    पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है। हादसा किस वजह से हुआ, इसका पता लगाने के लिए क्रेन की क्षमता, JCB का वजन, मशीन को उठाने की प्रक्रिया और ऑपरेशन के दौरान अपनाए गए सुरक्षा उपायों की जांच महत्वपूर्ण होगी।

    यह भी जांच का विषय है कि क्रेन किस एजेंसी या ठेकेदार द्वारा संचालित की जा रही थी और ऑपरेशन के दौरान मौके पर आवश्यक तकनीकी एवं सुरक्षा कर्मचारी मौजूद थे या नहीं। किसी तरह की तकनीकी खराबी, ऑपरेटर की चूक या सुरक्षा मानकों की अनदेखी हुई थी या नहीं, इसका पता विस्तृत जांच के बाद ही चलेगा।

    सेंट्रल रेलवे ने घटना को MMRDA से संबंधित कार्य के दौरान हुआ हादसा बताया है। वहीं पुलिस और संबंधित विभाग घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं। घायल लोगों की संख्या की आधिकारिक स्थिति भी संबंधित एजेंसियों से पूरी जानकारी मिलने के बाद स्पष्ट होने की उम्मीद है।

    कुरैशी नगर में हुए इस हादसे ने घनी आबादी वाले इलाकों के आसपास भारी निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा व्यवस्था का मुद्दा एक बार फिर सामने ला दिया है। क्रेन जैसी भारी मशीनों के संचालन में छोटी सी तकनीकी या मानवीय चूक भी आसपास रहने वाले लोगों के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।

    फिलहाल घटनास्थल से मलबा हटाने और प्रभावित हिस्से को सुरक्षित करने का काम जारी है। पुलिस हादसे के कारणों की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि क्रेन और JCB गिरने की वास्तविक वजह क्या थी और हादसे के लिए किसी स्तर पर लापरवाही जिम्मेदार थी या नहीं।

  • Mohali Building Collapse: मोहाली एयरोसिटी में निर्माणाधीन अस्पताल की इमारत का हिस्सा ढहा, एक की मौत; राहत-बचाव जारी

    Mohali Building Collapse: मोहाली एयरोसिटी में निर्माणाधीन अस्पताल की इमारत का हिस्सा ढहा, एक की मौत; राहत-बचाव जारी

    Mohali Building Collapse: मोहाली एयरोसिटी में निर्माणाधीन अस्पताल की इमारत का हिस्सा ढहा, एक की मौत; राहत-बचाव जारी

    मोहाली एयरोसिटी के ए-ब्लॉक में गुरुवार को बड़ा हादसा हो गया। यहां निर्माणाधीन अस्पताल की इमारत का एक हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया। हादसे में एक व्यक्ति की मौत होने की सूचना है, जबकि एक अन्य व्यक्ति घायल बताया जा रहा है। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

    जानकारी के मुताबिक, निर्माणाधीन इमारत का हिस्सा गिरने के बाद मलबे के नीचे दो लोगों के दबे होने की आशंका जताई गई। सूचना मिलते ही पुलिस और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंचे और तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। बचाव टीमों ने मलबा हटाकर लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया।

    बताया जा रहा है कि मलबे से एक व्यक्ति को बाहर निकाला गया, लेकिन उसकी मौत हो चुकी थी। वहीं दूसरे व्यक्ति को गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका उपचार किया जा रहा है। फिलहाल राहत एवं बचाव टीमें मलबे को हटाकर यह सुनिश्चित करने में जुटी हैं कि कहीं कोई अन्य व्यक्ति तो उसमें नहीं दबा है।

    हादसे के बाद पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित कर लिया है। प्रशासन और संबंधित विभागों के अधिकारी भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा ले रहे हैं। इमारत का निर्माण किस स्तर पर चल रहा था और अचानक उसका हिस्सा गिरने की वजह क्या रही, इसकी जांच की जा रही है।

    फिलहाल हादसे में मृतक की पहचान और घटना में प्रभावित लोगों की कुल संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन की ओर से भी मामले से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस और राहत टीमों की कार्रवाई पूरी होने के बाद हादसे की वास्तविक स्थिति और कारणों की तस्वीर साफ हो सकेगी।

  • School Death: टीचर की पिटाई के बाद 6 साल के बच्चे की मौत, कक्षा में बेहोश होकर गिरा; परिवार ने लगाए गंभीर आरोप

    School Death: टीचर की पिटाई के बाद 6 साल के बच्चे की मौत, कक्षा में बेहोश होकर गिरा; परिवार ने लगाए गंभीर आरोप

    School Death: टीचर की पिटाई के बाद 6 साल के बच्चे की मौत, कक्षा में बेहोश होकर गिरा; परिवार ने लगाए गंभीर आरोप

    आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में एक निजी स्कूल में छह वर्षीय यूकेजी छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद हड़कंप मच गया। वन टाउन इलाके में स्थित स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे प्रणय तेजा की मौत को लेकर उसके परिवार ने शिक्षिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का दावा है कि होमवर्क पूरा नहीं करने पर शिक्षिका ने बच्चे को डांटा और कथित तौर पर डंडे से पीटा, जिसके बाद वह कक्षा में ही बेहोश होकर गिर पड़ा।

    परिवार के अनुसार, प्रणय तेजा गुरुवार सुबह पूरी तरह स्वस्थ था। बच्चे के पिता ने बताया कि सुबह करीब 8 बजे उनका बेटा खुद स्कूल जाने की जिद कर रहा था। परिवार ने पहले उसे स्कूल जाने से रोकने की कोशिश की, लेकिन परीक्षाएं नजदीक होने के कारण उसे स्कूल भेज दिया गया। पिता के मुताबिक, घर से निकलने से पहले बच्चे को बुखार, बीमारी या किसी अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के कोई लक्षण नहीं थे। वह पिछली रात भी सामान्य रूप से खेल रहा था और सुबह खुश होकर स्कूल गया था।

    परिजनों का कहना है कि दोपहर के समय उन्हें अचानक बच्चे की तबीयत बिगड़ने की जानकारी मिली। पिता ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन की ओर से उन्हें सीधे सूचना नहीं दी गई और उन्हें अन्य लोगों के माध्यम से बच्चे की हालत के बारे में पता चला। इसके बाद परिवार तत्काल किंग जॉर्ज अस्पताल पहुंचा, जहां डॉक्टरों ने प्रणय तेजा को मृत घोषित कर दिया।

    बच्चे के पिता ने स्कूल के सीसीटीवी फुटेज का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि शिक्षिका बच्चे को डांटती और कथित तौर पर डंडे से मारती दिखाई दे रही है। परिवार का आरोप है कि पिटाई और डर के कारण बच्चा सदमे में आ गया और कक्षा में ही गिर पड़ा। हालांकि, बच्चे की मौत का वास्तविक कारण क्या था, यह अभी स्पष्ट नहीं हुआ है।

    घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी अस्पताल पहुंचे। राजस्व विभाग के अधिकारियों ने भी मामले की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और बच्चे के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है।

    अधिकारियों का कहना है कि मौत की सही वजह पोस्टमॉर्टम और मेडिकल जांच की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस स्कूल में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज सहित अन्य साक्ष्यों की भी जांच कर रही है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    घटना के बाद अस्पताल में बच्चे के परिजन और बड़ी संख्या में रिश्तेदार पहुंच गए। परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

    परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि स्कूल में अन्य बच्चों के साथ भी मारपीट की जाती थी। पुलिस अब इन आरोपों की भी जांच कर रही है। फिलहाल बच्चे की मौत ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और अनुशासन के नाम पर होने वाली कथित शारीरिक सजा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • Lucknow Double Murder-Suicide: बैंक कर्मी ने पहले पत्नी और बहन को मारी गोली, फिर खुद की जान ली, तीन मौतों से मचा हड़कंप

    Lucknow Double Murder-Suicide: बैंक कर्मी ने पहले पत्नी और बहन को मारी गोली, फिर खुद की जान ली, तीन मौतों से मचा हड़कंप

    Lucknow Double Murder-Suicide: बैंक कर्मी ने पहले पत्नी और बहन को मारी गोली, फिर खुद की जान ली, तीन मौतों से मचा हड़कंप

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गुरुवार को डबल मर्डर और सुसाइड की सनसनीखेज वारदात से हड़कंप मच गया। गोमतीनगर इलाके में बैंक कर्मचारी मानस बाजपेई ने कथित तौर पर पहले अपनी पत्नी दिव्या मिश्रा की गोली मारकर हत्या की। इसके बाद वह हुसड़िया स्थित अपनी बहन के घर पहुंचा, जहां उसने अपनी बहन तुलिका बाजपेई को गोली मार दी। इसके बाद मानस ने खुद को भी गोली मारकर आत्महत्या कर ली। घटना में तीनों की मौत हो गई।

    वारदात की शुरुआत गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे मिठाईवाला चौराहे के पास हुई। यहां एसबीआई में अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत मानस बाजपेई ने अपनी पत्नी दिव्या मिश्रा को गोली मार दी। दिव्या एक निजी बैंक में रिलेशनशिप मैनेजर के पद पर कार्यरत थीं। गोली लगने के बाद वह गंभीर रूप से घायल हो गईं और उनकी मौत हो गई।

    पत्नी की हत्या के बाद मानस वहां से ई-रिक्शा के जरिए हुसड़िया चौराहे की ओर गया। वहां वह अपनी बहन के घर पहुंचा और अपनी बहन तुलिका बाजपेई को गोली मार दी। इसके बाद उसने खुद को भी गोली मार ली। गोली चलने की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। तुलिका और मानस को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।

    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस आयुक्त तरुण गाबा, संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून-व्यवस्था बबलू कुमार समेत अन्य अधिकारियों ने घटनास्थलों का निरीक्षण किया। पुलिस ने दोनों स्थानों को सुरक्षित कर फोरेंसिक टीम को बुलाया। टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए और घटनाक्रम से जुड़े सबूतों की जांच शुरू कर दी।

    पुलिस के मुताबिक, मानस और दिव्या ने वर्ष 2017 में प्रेम विवाह किया था। दोनों बैंकिंग क्षेत्र में कार्यरत थे। मानस भारतीय स्टेट बैंक में अकाउंटेंट था, जबकि दिव्या आईसीआईसीआई बैंक में रिलेशनशिप मैनेजर के पद पर काम करती थीं। दोनों हुसड़िया इलाके में रहते थे। बताया जा रहा है कि वर्ष 2024 से दोनों के बीच वैवाहिक विवाद चल रहा था।

    इसी वर्ष जनवरी में मानस ने तलाक के लिए अदालत में याचिका भी दाखिल की थी। इसके बाद दोनों के बीच बातचीत लगभग बंद हो गई थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, कुछ दिन पहले मानस को दिव्या की किसी अन्य व्यक्ति से दोस्ती के बारे में जानकारी मिली थी, जिसके बाद दोनों के बीच विवाद और बढ़ गया। हालांकि, पुलिस अभी इस दावे की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है और वारदात की वास्तविक वजह सामने लाने के लिए परिवार के लोगों से भी पूछताछ कर रही है।

    प्रारंभिक जांच के अनुसार, गुरुवार सुबह दिव्या आईसीआईसीआई बैंक में एक बैठक में शामिल थीं। मानस बैंक के बाहर पहुंचा और ऑटो में बैठकर उनके बाहर आने का इंतजार करने लगा। बैठक खत्म होने के बाद वह बैंक के अंदर गया और दिव्या को बाहर बुलाया। दोनों के बीच कुछ देर बातचीत हुई। इसके बाद मानस ने कथित तौर पर अपने पास मौजूद हथियार निकाले और दिव्या पर हमला कर दिया।

    पुलिस के अनुसार, मानस ने पहले दिव्या के सिर पर हथियार की बट से हमला किया और फिर गोली मार दी। वारदात को अंजाम देने के बाद वह वहां से हुसड़िया की ओर चला गया। इसी दौरान उसने अपने मोबाइल फोन पर एक व्हाट्सऐप स्टेटस लगाया, जिसमें पत्नी की हत्या करने और इसके बाद अपनी बहन तथा खुद को भी नुकसान पहुंचाने की बात लिखे जाने की जानकारी सामने आई है।

    पुलिस इस व्हाट्सऐप स्टेटस को जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रही है। स्टेटस में मानस ने पत्नी पर धोखा देने का आरोप लगाया था। उसने कुछ अन्य लोगों के नामों का भी उल्लेख किया था और दावा किया था कि उन्हें मामले की जानकारी है। पुलिस मोबाइल फोन की गतिविधियों, व्हाट्सऐप स्टेटस, संदेशों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वारदात की पूरी योजना कब और कैसे बनाई गई।

    दिव्या की हत्या की सूचना मिलने के बाद गोमतीनगर पुलिस घटनास्थल पर जांच कर ही रही थी कि पुलिस को हुसड़िया इलाके में गोली चलने की सूचना मिली। पुलिस टीम वहां पहुंची तो तुलिका का शव पड़ा मिला और उसके पास मानस गंभीर हालत में मिला। पुलिस ने दोनों को अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    पुलिस के अनुसार, तुलिका मानसिक रूप से अस्वस्थ थीं और घर पर रहती थीं। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि मानस ने अपनी बहन को किस वजह से निशाना बनाया और क्या यह घटना पहले से तय थी या पत्नी की हत्या के बाद उसने अचानक यह कदम उठाया।

    घटनास्थल से पुलिस को तीन हथियार मिले हैं। मानस के शव के पास से दो पिस्टल और एक तमंचा बरामद होने की जानकारी दी गई है। पुलिस इन हथियारों को कब्जे में लेकर फोरेंसिक जांच करा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि तीनों में से किस हथियार से गोली चलाई गई और हथियार मानस के पास कैसे पहुंचे।

    पुलिस आयुक्त लखनऊ तरुण गाबा ने बताया कि मानस और उसकी पत्नी के बीच विवाद चल रहा था, लेकिन अचानक इस तरह की वारदात को अंजाम देने के पीछे वास्तविक कारण क्या था, इसकी जांच की जा रही है। पुलिस परिवार के सदस्यों और घटना से जुड़े अन्य लोगों से संपर्क कर जानकारी जुटा रही है।

    डीसीपी पूर्वी डॉ. दीक्षा शर्मा ने बताया कि पुलिस को पहले गोमतीनगर थाना क्षेत्र में एक महिला को गोली मारे जाने की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचने पर पता चला कि महिला को उसके पति ने गोली मारी थी। इसके कुछ ही समय बाद पुलिस को सूचना मिली कि एक व्यक्ति ने अपनी बहन की हत्या कर खुद को भी गोली मार ली है। जांच में दोनों घटनाओं को एक ही व्यक्ति यानी मानस बाजपेई से जुड़ा पाया गया।

    पुलिस अब हत्या से लेकर आत्महत्या तक की पूरी घटनाक्रम की कड़ी जोड़ने में जुटी है। इसमें बैंक के बाहर हुई बातचीत, दिव्या की हत्या, मानस की हुसड़िया तक आवाजाही, बहन तुलिका की हत्या, व्हाट्सऐप स्टेटस और बरामद हथियारों समेत सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।

    दिव्या मिश्रा यूट्यूबर प्रज्ञा मिश्रा की बहन थीं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिव्या ने करीब एक वर्ष पहले अपने पति से तलाक के लिए अदालत का रुख किया था और बाद में अलग रह रही थीं। दूसरी ओर मानस हुसड़िया चौराहे के पास अपनी बहन के किराए के मकान में रह रहा था। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि पति-पत्नी के बीच चल रहा विवाद ही इस पूरी वारदात की मुख्य वजह था या इसके पीछे कोई अन्य कारण भी मौजूद था।

    लखनऊ में दिनदहाड़े हुई इस वारदात के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस ने दोनों घटनास्थलों से साक्ष्य जुटा लिए हैं और मामले की विस्तृत जांच जारी है। तीन मौतों से जुड़े इस मामले में पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, फोरेंसिक रिपोर्ट और परिजनों के बयानों के आधार पर घटनाक्रम की पूरी तस्वीर सामने लाने की कोशिश कर रही है।

  • Himachal Road Accident: चंडीगढ़-मनाली हाईवे की हणोगी टनल में दो ट्रकों की जोरदार भिड़ंत, 4 की मौत और 7 घायल

    Himachal Road Accident: चंडीगढ़-मनाली हाईवे की हणोगी टनल में दो ट्रकों की जोरदार भिड़ंत, 4 की मौत और 7 घायल

    Himachal Road Accident: चंडीगढ़-मनाली हाईवे की हणोगी टनल में दो ट्रकों की जोरदार भिड़ंत, 4 की मौत और 7 घायल

    हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में चंडीगढ़-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग पर हणोगी टनल में गुरुवार सुबह भीषण सड़क हादसा हो गया। टनल के अंदर दो ट्रकों के बीच हुई जोरदार टक्कर में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि सात लोग घायल हो गए। हादसा इतना गंभीर था कि दोनों ट्रकों के आगे के हिस्से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और टनल के अंदर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    जानकारी के मुताबिक, हादसा सुबह करीब पौने आठ बजे हुआ। चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे पर स्थित हणोगी टनल से दो ट्रक गुजर रहे थे। इसी दौरान दोनों के बीच जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर की आवाज के बाद टनल में मौजूद लोगों में दहशत फैल गई और आसपास के लोग मदद के लिए आगे आए।

    हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और राहत-बचाव दल की टीमें मौके पर पहुंचीं। दुर्घटना में चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि सात अन्य घायल हुए। राहत एवं बचाव टीमों ने घायलों को क्षतिग्रस्त वाहनों से बाहर निकाला और तत्काल अस्पताल पहुंचाया।

    घायलों की स्थिति को देखते हुए उन्हें आगे के उपचार के लिए नेरचौक मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, घायलों का उपचार कराया जा रहा है और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। हादसे की पुष्टि डीएसपी लोकेंद्र नेगी ने की है।

    टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों ट्रकों को भारी नुकसान पहुंचा है। खास तौर पर एक ट्रक का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया। दुर्घटना के बाद क्षतिग्रस्त ट्रक टनल के बीच में ही खड़ा रह गया, जिसके कारण हाईवे पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई।

    पुलिस और प्रशासन की टीमों ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव अभियान चलाया। दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई, ताकि सड़क को जल्द से जल्द साफ कर यातायात सामान्य किया जा सके। हादसे के कारण चंडीगढ़-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग पर कुछ समय तक यातायात प्रभावित रहा।

    पुलिस ने हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर दो ट्रकों के बीच टक्कर की बात सामने आई है, लेकिन दुर्घटना किस वजह से हुई, इसकी विस्तृत जांच की जा रही है। पुलिस हादसे से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है और प्रत्यक्षदर्शियों से भी जानकारी जुटाई जा सकती है।

    हणोगी टनल हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में चंडीगढ़-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है। यह टनल पंडोह और औट के बीच पड़ती है और कुल्लू-मनाली की ओर जाने वाले प्रमुख मार्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस मार्ग पर रोजाना बड़ी संख्या में वाहन आवाजाही करते हैं।

    हणोगी टनल में हुए इस हादसे ने एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में हाईवे पर भारी वाहनों की आवाजाही और सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। टनल के भीतर हादसा होने की स्थिति में राहत और यातायात प्रबंधन भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे में पुलिस और प्रशासन की टीमों को दुर्घटना के बाद तत्काल राहत कार्य शुरू करना पड़ा।

    इसी बीच कुछ दिन पहले मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर भी भीषण सड़क हादसा हुआ था। वहां तेज रफ्तार कार सड़क किनारे खड़े एक ट्रक से टकरा गई थी। हादसे में पति-पत्नी समेत चार लोगों की मौत हुई थी, जबकि पांच अन्य लोग घायल हुए थे। हादसे में जान गंवाने वाले लोग धार और इंदौर जिले के रहने वाले बताए गए थे।

    रतलाम हादसे में घायलों को उपचार के लिए रतलाम के चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल भेजा गया था। पुलिस के अनुसार, सड़क हादसों में तेज रफ्तार, वाहनों की स्थिति और सड़क पर खड़े भारी वाहनों जैसे पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण होती है।

    फिलहाल हिमाचल प्रदेश के हणोगी टनल हादसे में पुलिस की जांच जारी है। क्षतिग्रस्त ट्रकों को हटाने के बाद हाईवे पर यातायात पूरी तरह सामान्य होने की उम्मीद है। हादसे में चार लोगों की मौत के बाद उनके परिजनों को सूचना देने की प्रक्रिया भी की जा रही है, जबकि घायल सात लोगों का अस्पताल में उपचार जारी है।

  • Shamli Land Dispute: जमीन विवाद में किसान ने राजस्व टीम के सामने खुद को लगाई आग, रिश्वत मांगने के आरोपों की जांच

    Shamli Land Dispute: जमीन विवाद में किसान ने राजस्व टीम के सामने खुद को लगाई आग, रिश्वत मांगने के आरोपों की जांच

    Shamli Land Dispute: जमीन विवाद में किसान ने राजस्व टीम के सामने खुद को लगाई आग, रिश्वत मांगने के आरोपों की जांच

    उत्तर प्रदेश के शामली जिले के गोहरनी गांव में भूमि विवाद को लेकर उस समय हड़कंप मच गया, जब चहारदीवारी हटाने पहुंची राजस्व और पुलिस टीम के सामने 22 वर्षीय किसान आदित्य ने कथित तौर पर खुद पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगा ली। घटना में किसान गंभीर रूप से झुलस गया। आसपास मौजूद लोगों और परिजनों ने किसी तरह आग बुझाई और उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां से हालत गंभीर होने के कारण उसे दिल्ली रेफर कर दिया गया।

    घटना के बाद किसान के परिवार ने सदर तहसील के कानूनगो अमरीश शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का दावा है कि चहारदीवारी नहीं गिराने के बदले कानूनगो ने कथित तौर पर 50 हजार रुपये की मांग की थी। परिवार का आरोप है कि रकम नहीं देने के बाद प्रशासन और राजस्व विभाग की टीम चहारदीवारी गिराने के लिए गांव पहुंची। हालांकि, कानूनगो ने रिश्वत मांगने के आरोप को बेबुनियाद बताया है।

    जानकारी के अनुसार, गोहरनी गांव निवासी आदित्य के परिवार का करीब 1.0256 हेक्टेयर भूमि को लेकर परिवार के ही सदस्यों से विवाद चल रहा है। इस जमीन से संबंधित मामला एसडीएम न्यायालय में विचाराधीन बताया गया है। परिवार का कहना है कि भूमि विवाद को लेकर न्यायालय में मामला चल रहा है और इसके बावजूद सोमवार शाम को राजस्व विभाग की टीम चहारदीवारी हटाने के लिए गांव पहुंची।

    बताया गया है कि सोमवार शाम कानूनगो अमरीश शर्मा और राजस्व विभाग के अन्य कर्मचारी गांव पहुंचे। टीम ने विवादित भूमि की चहारदीवारी हटाने की कार्रवाई शुरू करने का प्रयास किया। इस पर आदित्य और उसके परिवार के सदस्यों ने विरोध किया। परिवार का आरोप है कि उन्हें चहारदीवारी हटाने से संबंधित कोई नोटिस नहीं दिया गया था और वे प्रशासन से कार्रवाई का आदेश दिखाने की मांग कर रहे थे।

    इसी दौरान मौके पर विवाद बढ़ गया। परिजनों के मुताबिक, आदित्य ने एक बोतल से ज्वलनशील पदार्थ अपने ऊपर डाल लिया और खुद को आग लगा ली। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। परिजन और ग्रामीण तुरंत उसकी मदद के लिए दौड़े और आग बुझाने का प्रयास किया।

    आदित्य गंभीर रूप से झुलस गया था। ग्रामीणों और परिजनों ने उसे तत्काल शामली के जिला अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे बेहतर उपचार के लिए दिल्ली रेफर कर दिया। फिलहाल उसका उपचार जारी है और परिवार उसकी हालत को लेकर चिंतित है।

    घटना के बाद किसान के पिता मनोज ने पुलिस से शिकायत की है। शिकायत में उन्होंने भूमि विवाद और चहारदीवारी हटाने की कार्रवाई के साथ-साथ कानूनगो पर कथित रूप से रिश्वत मांगने का आरोप लगाया है। परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

    परिजनों और ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के समय मौके पर मौजूद कुछ अधिकारी और कर्मचारी तत्काल किसान की मदद करने के बजाय स्थिति देखते रहे। उनका आरोप है कि तहसीलदार, कानूनगो और राजस्व टीम के अन्य सदस्य मौके पर मौजूद थे। घटना के बाद यह आरोप भी सामने आया कि एक दरोगा कथित तौर पर घटना का वीडियो बना रहा था। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और पूरे मामले की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    मामले को लेकर एसडीएम सचिन राजपूत ने कहा है कि प्रकरण की जांच कराई जा रही है। प्रशासन की ओर से घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है, जिसमें भूमि विवाद, चहारदीवारी हटाने की कार्रवाई और किसान के लगाए गए आरोप शामिल हैं।

    वहीं, कानूनगो अमरीश शर्मा ने किसान के परिवार की ओर से लगाए गए रिश्वत मांगने के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि रिश्वत मांगने का आरोप बेबुनियाद है। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर राजस्व टीम कार्रवाई के लिए मौके पर गई थी।

    इस घटना के बाद भूमि विवाद को लेकर प्रशासन की कार्रवाई और मौके पर मौजूद अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। किसान परिवार का कहना है कि जब मामला न्यायालय में विचाराधीन था तो चहारदीवारी हटाने की कार्रवाई किस आधार पर की जा रही थी, इसकी जांच होनी चाहिए। वहीं प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आएगी।

    फिलहाल पुलिस और प्रशासन मामले से जुड़े तथ्यों को जुटाने में लगे हैं। किसान आदित्य की हालत गंभीर बताई जा रही है और उसका दिल्ली में उपचार चल रहा है। घटना के बाद ग्रामीणों में भी रोष है। परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच, कथित रिश्वत मांगने के आरोपों की जांच और घटना के दौरान अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल की मांग की है।

     

  • Farmers Protest: खनौरी बॉर्डर पर किसानों का धरना और अर्धनग्न मार्च स्थगित, 4 सितंबर को मनोहर लाल खट्टर से होगी बातचीत

    Farmers Protest: खनौरी बॉर्डर पर किसानों का धरना और अर्धनग्न मार्च स्थगित, 4 सितंबर को मनोहर लाल खट्टर से होगी बातचीत

    Farmers Protest: खनौरी बॉर्डर पर किसानों का धरना और अर्धनग्न मार्च स्थगित, 4 सितंबर को मनोहर लाल खट्टर से होगी बातचीत

    हरियाणा के जींद जिले में दाता सिंहवाला-खनौरी बॉर्डर पर किसानों का चल रहा धरना और प्रस्तावित अर्धनग्न पैदल मार्च फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। किसानों और स्थानीय प्रशासन के बीच बुधवार सुबह हुई वार्ता के बाद यह फैसला लिया गया। प्रशासन की ओर से किसानों को आश्वासन दिया गया कि उनकी लंबित मांगों को केंद्र सरकार तक पहुंचाने के लिए 4 सितंबर को केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ बैठक निर्धारित की गई है।

    बुधवार सुबह नरवाना के एसडीएम जगदीश चंद्र और डीएसपी कमलदीप राणा के नेतृत्व में प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने किसान प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की। बैठक के दौरान किसानों की लंबित मांगों और उनके प्रस्तावित आंदोलन को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों पक्षों के बीच बातचीत के बाद प्रशासन ने किसानों को भरोसा दिलाया कि उनकी मांगों को केंद्र स्तर पर रखने के लिए 4 सितंबर को मनोहर लाल खट्टर के साथ बैठक कराई जाएगी।

    प्रशासन की ओर से मिले इस आश्वासन के बाद एसडीएम जगदीश चंद्र और डीएसपी कमलदीप राणा स्वयं दाता सिंहवाला-खनौरी बॉर्डर पर पंजाब की ओर धरने पर बैठे किसानों के पास पहुंचे। अधिकारियों ने वहां किसान नेताओं और प्रदर्शनकारियों को बैठक में हुए निर्णय की जानकारी दी और आगामी बातचीत को लेकर प्रशासन की ओर से दिए गए आश्वासन के बारे में बताया।

    इसके बाद किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने 51 किसानों के जत्थे द्वारा प्रस्तावित पैदल मार्च और अर्धनग्न प्रदर्शन को तत्काल प्रभाव से स्थगित करने की घोषणा की। किसानों ने प्रशासन के साथ बातचीत के बाद फिलहाल अपने प्रस्तावित कार्यक्रम को रोकने पर सहमति जताई है।

    जगजीत सिंह डल्लेवाल ने हालांकि स्पष्ट किया कि आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि 4 सितंबर को होने वाली बैठक के परिणाम के बाद ही किसानों की आगे की रणनीति तय की जाएगी। किसान नेताओं का कहना है कि उनकी मांगों को लेकर संघर्ष जारी रहेगा और सरकार के साथ होने वाली बातचीत के परिणाम को देखने के बाद अगला कदम उठाया जाएगा।

    किसान नेताओं को उम्मीद है कि 4 सितंबर को केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ होने वाली बैठक के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री के साथ भी बातचीत का एक और दौर संभव हो सकता है। किसानों का कहना है कि उनकी लंबित मांगों को लेकर केंद्र सरकार के साथ बातचीत के जरिए समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश की जाएगी।

    प्रशासन की ओर से नरवाना के एसडीएम जगदीश चंद्र ने बताया कि किसानों के साथ हुई वार्ता सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुई। प्रशासन ने किसानों की बात सुनी और उनकी मांगों को आगे रखने के लिए निर्धारित बैठक की जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, किसानों की ओर से फिलहाल प्रस्तावित पैदल मार्च और अर्धनग्न प्रदर्शन को स्थगित करने का निर्णय लिया गया है।

    एसडीएम ने यह भी बताया कि जैसे ही किसान बॉर्डर से वापस लौटना शुरू करेंगे, हरियाणा की तरफ सुरक्षा के लिए लगाई गई बैरिकेडिंग को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। बैरिकेडिंग हटने से आम लोगों और वाहन चालकों को राहत मिलने की उम्मीद है। खनौरी बॉर्डर क्षेत्र में आंदोलन के कारण यातायात और आम लोगों की आवाजाही प्रभावित रही है।

    किसानों के प्रदर्शन के बीच प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को भी बनाए रखा है। अब 4 सितंबर को प्रस्तावित केंद्रीय स्तर की बैठक पर सभी की नजरें टिकी हैं। किसान नेता इस बैठक के परिणाम के आधार पर आंदोलन को आगे बढ़ाने या सरकार के साथ बातचीत की दिशा तय करेंगे।

    जगजीत सिंह डल्लेवाल ने किसानों से फिलहाल प्रस्तावित मार्च और प्रदर्शन को स्थगित रखने की घोषणा की है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया है कि किसानों की लड़ाई समाप्त नहीं हुई है। अब सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच होने वाली अगली बातचीत इस आंदोलन की आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  • Badrinath Highway: भल्लेगांव के पास पहाड़ से गिरा मलबा और पत्थर, हाईवे पर आवाजाही बंद, रास्ता खोलने में जुटी टीम

    Badrinath Highway: भल्लेगांव के पास पहाड़ से गिरा मलबा और पत्थर, हाईवे पर आवाजाही बंद, रास्ता खोलने में जुटी टीम

    Badrinath Highway: भल्लेगांव के पास पहाड़ से गिरा मलबा और पत्थर, हाईवे पर आवाजाही बंद, रास्ता खोलने में जुटी टीम

    उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश के बीच पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और पहाड़ों से मलबा व पत्थर गिरने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। बद्रीनाथ-केदारनाथ नेशनल हाईवे-07 पर भल्लेगांव के पास पहाड़ से अचानक भारी मलबा और पत्थर सड़क पर आ गिरा। मलबा सड़क पर जमा होने के बाद हाईवे पर दोनों ओर से वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई।

    अचानक पहाड़ से मलबा गिरने के कारण हाईवे पर यातायात प्रभावित हो गया। सड़क पर बड़ी मात्रा में पत्थर और मलबा जमा होने से वाहनों को आगे जाने का रास्ता नहीं मिल सका। इसके चलते हाईवे के दोनों तरफ वाहन रुक गए और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

    घटना की जानकारी मिलते ही संबंधित टीम मौके पर पहुंची और सड़क को यातायात के लिए दोबारा खोलने का काम शुरू किया गया। मलबा हटाने के लिए मशीनों की मदद ली जा रही है। टीम सड़क पर जमा पत्थरों और मलबे को हटाकर रास्ता साफ करने में जुटी हुई है।

    बारिश के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क पर मलबा और पत्थर गिरने का खतरा लगातार बना रहता है। लगातार बारिश के कारण पहाड़ों की मिट्टी कमजोर होने से कई स्थानों पर भूस्खलन की स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे में बद्रीनाथ-केदारनाथ हाईवे जैसे महत्वपूर्ण मार्गों पर यात्रियों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सतर्कता जरूरी हो जाती है।

    हाईवे बंद होने के कारण इस मार्ग से गुजर रहे यात्रियों को फिलहाल रास्ता खुलने का इंतजार करना पड़ रहा है। सड़क साफ होने के बाद ही वाहनों की आवाजाही सामान्य हो सकेगी। मौके पर मौजूद टीम की ओर से मलबा हटाने का काम तेजी से किया जा रहा है, ताकि यातायात को जल्द बहाल किया जा सके।

    स्थानीय स्तर पर लगातार बारिश को देखते हुए सड़क पर आने वाले संभावित मलबे और पत्थरों को लेकर निगरानी भी रखी जा रही है। पहाड़ी मार्गों पर सफर करने वाले यात्रियों से मौसम और सड़क की स्थिति को ध्यान में रखते हुए सावधानी बरतने की अपील की जाती है।

    बद्रीनाथ-केदारनाथ नेशनल हाईवे-07 उत्तराखंड के महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है और चारधाम यात्रा के दौरान इसका विशेष महत्व रहता है। ऐसे में हाईवे पर मलबा आने से यात्रियों और स्थानीय लोगों की आवाजाही प्रभावित होती है। प्रशासन और सड़क से जुड़ी टीमें मार्ग को जल्द से जल्द साफ कर यातायात बहाल करने के प्रयास में जुटी हैं।

    फिलहाल भल्लेगांव के पास मलबा हटाने का काम जारी है। रास्ता पूरी तरह साफ होने और सुरक्षा की स्थिति सुनिश्चित होने के बाद ही हाईवे पर वाहनों की आवाजाही सामान्य किए जाने की संभावना है।

  • Mahoba Protest: महोबा में खराब सड़क और जलभराव से परेशान स्कूली बच्चों ने हाईवे किया जाम, पुलिस पर बदसलूकी के आरोप

    Mahoba Protest: महोबा में खराब सड़क और जलभराव से परेशान स्कूली बच्चों ने हाईवे किया जाम, पुलिस पर बदसलूकी के आरोप

    Mahoba Protest: महोबा में खराब सड़क और जलभराव से परेशान स्कूली बच्चों ने हाईवे किया जाम, पुलिस पर बदसलूकी के आरोप

    महोबा में खराब सड़क, जलभराव और स्कूल आने-जाने में हो रही परेशानी से नाराज स्कूली बच्चों ने मंगलवार को झांसी-मिर्जापुर हाईवे पर प्रदर्शन करते हुए जाम लगा दिया। रैपुरा कलां गांव के बच्चों ने बारिश के बीच सड़क पर उतरकर अपनी समस्याओं को लेकर विरोध जताया। करीब तीन घंटे तक चले प्रदर्शन के कारण हाईवे के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। इस दौरान बच्चों के प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो भी सामने आए हैं, जिन्हें सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है।

    जानकारी के मुताबिक, महोबा सदर तहसील क्षेत्र के रैपुरा कलां गांव को जोड़ने वाला करीब तीन किलोमीटर लंबा रास्ता लंबे समय से बदहाल स्थिति में है। ग्रामीणों और छात्रों का आरोप है कि सड़क पर जगह-जगह बड़े गड्ढे हैं और बारिश के बाद जलभराव की स्थिति और गंभीर हो जाती है। ऐसे में बच्चों के लिए स्कूल पहुंचना मुश्किल हो गया है।

    प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि रास्ते की स्थिति इतनी खराब है कि आए दिन ई-रिक्शा और ऑटो पलटने की घटनाएं होती रहती हैं। इन घटनाओं में कई बच्चे चोटिल भी हो चुके हैं। बारिश के मौसम में सड़क पर जमा पानी और गड्ढों के कारण स्थिति और ज्यादा खतरनाक हो जाती है। छात्रों का कहना है कि कई बार इस समस्या की शिकायत जिम्मेदार अधिकारियों से की गई, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।

    बच्चों और ग्रामीणों ने सड़क की बदहाली के लिए इलाके में संचालित दाल मिलों से निकलने वाले भारी वाहनों और गंदे पानी को भी जिम्मेदार बताया है। छात्रों का आरोप है कि मिलों से जुड़े बड़े और ओवरलोडेड ट्रकों की लगातार आवाजाही के कारण सड़क की स्थिति खराब हुई है। इसके अलावा मिलों का गंदा पानी सड़क पर बहने से भी रास्ते की हालत बिगड़ती जा रही है।

    प्रदर्शन कर रहे बच्चों का आरोप है कि जब ग्रामीण और बच्चे सड़क की स्थिति तथा गंदे पानी की समस्या का विरोध करते हैं तो मिल संचालकों की ओर से उन्हें कथित तौर पर धमकाया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन समस्या का समाधान नहीं होने के कारण आखिरकार बच्चों को सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करना पड़ा।

    मंगलवार को बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे बारिश के बीच झांसी-मिर्जापुर हाईवे पर पहुंच गए। बच्चों ने लकड़ी और पत्थर रखकर सड़क को जाम कर दिया। देखते ही देखते हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। करीब तीन घंटे तक यातायात प्रभावित रहा और यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    प्रदर्शन के दौरान मौके पर पहुंची पुलिस ने जाम खुलवाने का प्रयास किया। इसी दौरान पुलिस पर प्रदर्शन कर रहे बच्चों के साथ कथित तौर पर बदसलूकी करने के आरोप लगे हैं। आरोप है कि कुछ बच्चों को पुलिसकर्मियों ने घसीटा और प्रदर्शन खत्म कराने के लिए उनके साथ कथित तौर पर मारपीट तथा लात मारने जैसी हरकत की। घटना से जुड़े वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया है।

    हालांकि, पुलिस की कार्रवाई और बच्चों के साथ कथित बदसलूकी से जुड़े आरोपों की पूरी स्थिति आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। सामने आए वीडियो और तस्वीरों को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। बच्चों के साथ पुलिस के व्यवहार को लेकर सवाल भी उठाए जा रहे हैं।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि रैपुरा कलां के अलावा मझलवारा, बनियातला और महानपुरा को जोड़ने वाले मार्ग की स्थिति भी लंबे समय से खराब है। इस मार्ग का इस्तेमाल बड़ी संख्या में ग्रामीणों और स्कूली बच्चों द्वारा किया जाता है। सड़क की खराब हालत और जलभराव के कारण लोगों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

    ग्रामीणों की मांग है कि सड़क की तत्काल मरम्मत कराई जाए, जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए और मिलों से निकलने वाले गंदे पानी तथा भारी वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित किया जाए। लोगों का कहना है कि बच्चों को सुरक्षित तरीके से स्कूल पहुंचने के लिए बेहतर सड़क और जल निकासी की व्यवस्था जरूरी है।

    महोबा में स्कूली बच्चों के हाईवे पर प्रदर्शन ने इलाके की बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को सामने ला दिया है। बारिश के बीच बच्चों का सड़क पर बैठकर विरोध करना इस बात को लेकर सवाल खड़े कर रहा है कि उनकी शिकायतों पर पहले ही प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई। वहीं, पुलिस पर लगे बदसलूकी के आरोपों के बाद इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी उठ रही है।