गोपनीय कार्यवाही लीक पर अजय महावर ने कड़ा रुख अपनाया पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग की
नई दिल्ली, (रविंद्र कुमार): दिल्ली विधानसभा की लोक लेखा समिति की गोपनीय कार्यवाही सोशल मीडिया पर सार्वजनिक किए जाने और उसे राजनीतिक विवाद का विषय बनाए जाने को लेकर समिति के अध्यक्ष एवं घोंडा विधायक अजय महावर ने सोमवार को कड़ा रुख अपनाया। दिल्ली विधानसभा में आयोजित प्रेस वार्ता में महावर ने विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता से पूरे प्रकरण की जांच कराने तथा जांच में विशेषाधिकार हनन सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की। उन्होंने साफ कहा कि PAC की कार्यवाही अंतिम रिपोर्ट सदन में रखे जाने तक गोपनीय रहती है और समिति की अनुमति के बिना उसकी कार्यवाही या जांच से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करना संसदीय मर्यादा और प्रक्रिया की गंभीर अवहेलना है। अजय महावर ने कहा कि PAC किसी राजनीतिक दल के एजेंडे पर काम नहीं कर रही है, बल्कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट, उपलब्ध दस्तावेजों और विधानसभा की निर्धारित प्रक्रियाओं के आधार पर मामलों की जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि समिति का मकसद किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल को निशाना बनाना नहीं, बल्कि सरकारी धन के इस्तेमाल से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर वास्तविक स्थिति सामने लाना है। इसी क्रम में समिति स्टाफ क्वार्टर निर्माण से जुड़े करीब 60 करोड़ रुपये के मामले की भी विस्तृत जांच कर रही है। इस मामले में लगभग 18 रिकॉर्ड और दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है। अजय महावर ने स्टाफ क्वार्टर निर्माण से जुड़े आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि CAG ने निर्माण की लागत निर्धारित करने, पुराने दरों के इस्तेमाल और परियोजना के अनुमान में हुई बढ़ोतरी पर सवाल उठाए हैं। समिति विशेष रूप से इस बात की जांच कर रही है कि निर्माण क्षेत्रफल को करीब 1,397 वर्गमीटर से बढ़ाकर 1,905 वर्गमीटर किए जाने का आधार क्या था और इसके लिए किस स्तर पर मंजूरी ली गई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार क्षेत्रफल में इस बढ़ोतरी से लगभग 18.88 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वित्तीय देनदारी सामने आई। अब PAC यह पता लगाने में जुटी है कि अतिरिक्त खर्च को किसने मंजूरी दी और क्या इसके लिए सक्षम प्राधिकारी की अनुमति ली गई थी। उन्होंने कहा कि निर्माण से संबंधित खर्च में केवल सिविल कार्य ही नहीं, बल्कि विद्युत कार्य, मॉड्यूलर किचन और अन्य मदें भी समिति की जांच के दायरे में हैं। यहां तक कि करीब 45.90 लाख रुपये के पर्दों पर हुए खर्च को लेकर भी सवालों की पड़ताल की जा रही है। समिति का प्रयास है कि दस्तावेजों में दर्ज प्रत्येक खर्च और उसके वास्तविक उपयोग का मिलान किया जाए। कैंप ऑफिस का क्षेत्रफल 700 से बढ़कर 2,600 वर्गमीटर होने पर भी सवाल प्रेस वार्ता में महावर ने 6 फ्लैग स्टाफ रोड से जुड़े मामले में भी CAG की आपत्तियों और PAC की जांच का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि कैंप ऑफिस के क्षेत्रफल में भारी बढ़ोतरी का मामला भी जांच के दायरे में है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसका क्षेत्रफल करीब 700 वर्गमीटर से बढ़ाकर 2,600 वर्गमीटर किया गया। समिति यह जानना चाहती है कि इतनी बड़ी वृद्धि की आवश्यकता क्यों पड़ी, इसका आधार क्या था और इसके लिए किन स्तरों से स्वीकृति ली गई। महावर ने कहा कि पुराने क्वार्टरों को गिराने, नए निर्माण, ठेकेदारों की पात्रता, काम के आवंटन और भुगतान से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है। समिति दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ-साथ मौके की वास्तविक स्थिति का भौतिक सत्यापन करना चाहती है, ताकि कागजों में दर्ज दावों और जमीन पर मौजूद वास्तविकता के बीच किसी अंतर को सामने लाया जा सके। स्टाफ ब्लॉक के करीब 9 करोड़ रुपये का इस्तेमाल भी जांच के घेरे में PAC अध्यक्ष ने स्टाफ ब्लॉक का मुद्दा उठाते हुए कहा कि CAG की रिपोर्ट में एक निर्धारित उद्देश्य के लिए स्वीकृत धनराशि के दूसरे मद में इस्तेमाल किए जाने की ओर संकेत किया गया है। उन्होंने बताया कि स्टाफ ब्लॉक के लिए करीब 9 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत किए जाने के बावजूद निर्माण नहीं होने का सवाल भी समिति के सामने है। अब PAC यह पता लगाएगी कि यदि निर्धारित प्रावधान के अनुरूप निर्माण नहीं हुआ तो स्वीकृत धनराशि को अन्यत्र इस्तेमाल करने की अनुमति किसने दी और संबंधित निर्णय लेने का अधिकार किस सक्षम प्राधिकारी के पास था। PAC अध्यक्ष ने कहा कि समिति की जांच के दौरान उसकी गोपनीय कार्यवाही का सार्वजनिक होना गंभीर विषय है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से मांग की कि सोशल मीडिया पर सामने आई सामग्री और गोपनीय कार्यवाही के सार्वजनिक होने की पूरी जांच कराई जाए। यदि जांच में विशेषाधिकार हनन या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि PAC पर राजनीतिक दबाव बनाने अथवा उसकी जांच को प्रभावित करने का कोई भी प्रयास संसदीय संस्थाओं की गरिमा के लिए उचित नहीं है।



