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सरकार जनगणना की सोच नहीं रही तो चुनाव आयोग को एस.आई.आर. करवाने की इतनी हड़बड़ी क्यों :आदेश भारद्वाज

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आदेश भारद्वाज
सरकार जनगणना की सोच नहीं रही तो चुनाव आयोग को एस.आई.आर. करवाने की इतनी हड़बड़ी क्यों :आदेश भारद्वाज

सरकार जनगणना की सोच नहीं रही तो चुनाव आयोग को एस.आई.आर. करवाने की इतनी हड़बड़ी क्यों :आदेश भारद्वाज

नई दिल्ली (सी.पी.एन.न्यूज़ ) : सभी विपक्षी दलों द्वारा देश भर में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण एस.आई.आर. अभियान की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने इसे साल भर का काम एक महीने में करवाने का क्रूर दबाव बताया, जिसके चलते बूथ लेवल ऑफिसर्स लगातार आत्महत्या कर रहे हैं और मतदाता सूची में भयानक लापरवाही हो रही है।

उन्होंने इसे मानवीय संवेदनशून्यता की पराकाष्ठा करार दिया है। पहले बिहार और अब 12 राज्यों में मात्र एक माह में करवाए जा रहे एस.आई.आर. से ना सिर्फ सरकार बल्कि चुनाव आयोग की मंशा पर भी सवाल उठने वाजिब हैं, जिसका जवाब चुनाव आयोग को देना पड़ेगा। करावल नगर कांग्रेस जिलाध्यक्ष आदेश भारद्वाज ने भी चुनाव आयोग द्वारा करवाए जा रहे एस.आई.आर. की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष का सवाल विशेष गहन पुनरीक्षण करवाने पर नहीं है बल्कि जिस तरह से यह करवाया जा रहा है उस पूरी प्रक्रिया पर है।

पहले भी इस तरह मतदाता सूचियों के अवलोकन होते रहे हैं और उनको करने में 6 माह से 3 साल तक का समय लगता रहा है। लेकिन अब मात्र एक माह में इस तरह की बड़ी एक्सरसाइज को करने की घोषणा कर दी गई तो सवाल उठेंगे ही उठेंगे। घुसपैठियों का नाम लेकर बिहार में जो हुआ वह आपके सामने है, एक एक घर में सैंकड़ों मतदाताओं के नाम, जिंदा लोगो के नाम काट दिए गए, एक मतदाता के कई कई जगह मतदाता सूचियों में नाम होना ही अपने आप में यह दिखाता है कि यह पूरी की पूरी प्रक्रिया ही बेमानी रह गई।

चुनाव आयोग आज तक बिहार में यह आंकड़े नहीं दे पाया कि कितने लोगों को घुसपैठिए के तौर पर बाहर निकाला? और अगर मोदी जी और डॉ मनमोहन सिंह जी के पिछले कार्यकालों में घुसपैठियों को निकाले जाने के आंकड़े देखे तो जहां मनमोहन सिंह जी ने 2005 से 2013 तक 8 वर्षों में 88792 घुसपैठियों को बाहर निकाला वहीं मोदी जी ने 2014 से 2024 के 10 वर्षों में मात्र 3518 घुसपैठियों को बाहर निकाला। आदेश भारद्वाज ने आगे कहा कि अब यह एक महीने के कम समय में 12 राज्यों पर पुनरीक्षण को लाद दिया गया है। जिसमें कई जगह आर.एस.एस. के लोगो को बी.एल.ओं. बना दिया गया है और वह लोग अपनी मनमर्जी का काम कर रहे हैं, साथ ही दूसरे बी.एल.ओं. ज्यादा कार्य दबाव में आत्महत्या करने लगे हैं मात्र दो से तीन सप्ताह में डेढ़ दर्जन लोग आत्महत्या करने या मानसिक दबाव के कारण अपनी जान गंवा बैठे हैं।

सरकार और चुनाव आयोग पर प्रश्न इसलिए भी उठता है कि अपने तरीके से काम करवाए जाने को लेकर 60 बी.एल. ओं और 7 सुपरवाइजर पर एक DM ने FIR तक करवा दी गई है। इस सबके इतर भी देखा जाए तो सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि सरकार जनगणना करवाने की तैयारी में नहीं उधर चुनाव आयोग ताबड़तोड़ मतदाता सूची के पुनरीक्षण में जुट गए है। जो इस पूरी एक्सरसाइज पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

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