Yamuna Pollution: फोटो सेशन करने से न यमुना साफ होगी और न वायु प्रदूषण कम होगा : आदेश भारद्वाज
दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण और यमुना नदी की बदहाल स्थिति को लेकर दिल्ली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं करावल नगर जिला कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष आदेश भारद्वाज ने भाजपा की रेखा गुप्ता सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार यमुना की सफाई और प्रदूषण नियंत्रण को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई ठोस सुधार दिखाई नहीं दे रहा। करोड़ों रुपये की परियोजनाओं और बड़े अभियानों के बावजूद यमुना में जहरीला झाग दिखाई देना सरकार के दावों पर सवाल खड़े करता है।
आदेश भारद्वाज ने कहा कि हाल ही में ‘चलो यमुना’ अभियान के तहत 70 घाटों पर करीब 35 हजार लोगों को जुटाया गया और सफाई अभियान के दौरान 76 हजार किलोग्राम कचरा हटाने का आंकड़ा पेश किया गया। इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 22 अक्टूबर को 8,941 करोड़ रुपये की लागत वाली 43 सीवरेज और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। सरकार का दावा है कि मई 2029 तक यमुना को साफ कर दिया जाएगा, लेकिन इन तमाम घोषणाओं के बावजूद छठ पूजा से ठीक पहले कालिंदी कुंज और ओखला बैराज के पास नदी में जहरीला सफेद झाग दिखाई दिया।
उन्होंने कहा कि दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की रिपोर्टों में कई स्थानों पर बीओडी, सीओडी और फीकल कोलीफॉर्म का स्तर पिछले साल की तुलना में भी अधिक पाए जाने की बात सामने आई है। ऐसे आंकड़े सरकार के उन दावों पर सवाल खड़े करते हैं, जिनमें यमुना की सफाई को लेकर बड़े स्तर पर काम किए जाने की बात कही जा रही है। आदेश भारद्वाज ने सवाल किया कि जब इतने बड़े सफाई अभियान चलाए जा रहे हैं और हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाएं शुरू की जा रही हैं, तो नदी में झाग और अनुपचारित सीवेज आखिर क्यों पहुंच रहा है? क्या घाटों की सफाई और फोटो खिंचवाने भर से यमुना प्रदूषण मुक्त हो जाएगी?
आदेश ने कहा कि दिल्ली में यमुना का करीब 22 किलोमीटर लंबा हिस्सा नदी के प्रदूषण में बड़ा योगदान देता है। इस हिस्से में 22 बड़े नालों से अब भी गंदा पानी नदी में पहुंचने का आरोप है। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या इन नालों को पूरी तरह टैप किया जा चुका है? ओखला में प्रस्तावित 124 एमजीडी क्षमता वाले नए एसटीपी और अन्य संयंत्रों के अपग्रेडेशन का काम कब तक पूरा होगा और इन परियोजनाओं का वास्तविक असर कब दिखाई देगा? उनके अनुसार, जब तक सीवेज और औद्योगिक कचरे को नदी में गिरने से नहीं रोका जाएगा, तब तक यमुना की सफाई के दावे केवल घोषणाओं तक सीमित रहेंगे।
दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर भी आदेश भारद्वाज ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदूषण के बढ़ते स्तर के मद्देनजर सरकार की ओर से 1 नवंबर से निर्माण कार्यों पर रोक, 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम, बाहर के नॉन-बीएस-6 वाहनों पर प्रतिबंध और पार्किंग शुल्क दोगुना करने जैसे कदमों की बात कही गई है। उनका आरोप है कि इन प्रतिबंधों का सबसे ज्यादा असर मजदूरों, छोटे ठेकेदारों, दुकानदारों और आम नागरिकों पर पड़ेगा। निर्माण कार्य बंद होने से हजारों मजदूरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है और रोजमर्रा की आजीविका प्रभावित होगी।
उन्होंने कहा कि गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और सोनीपत जैसे पड़ोसी शहरों से रोजाना दिल्ली आने वाले लाखों लोगों को भी इन पाबंदियों के कारण परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। बाहर से आने वाले वाहनों पर प्रतिबंध और अन्य रोक का असर उन लोगों पर पड़ेगा, जो कामकाज के लिए प्रतिदिन दिल्ली पहुंचते हैं। आदेश भारद्वाज ने सवाल उठाया कि प्रदूषण नियंत्रण की जिम्मेदारी सरकार की है, लेकिन उसकी नीतियों का खामियाजा आम नागरिकों और मेहनतकश लोगों को क्यों भुगतना पड़ रहा है?
आदेश ने कहा कि यमुना प्रदूषण की मुख्य वजहों में सीवेज और औद्योगिक कचरा शामिल हैं। ऐसे में केवल आम जनता पर प्रतिबंध लगाकर प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों में यमुना की सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद नदी की स्थिति ऐसी नहीं बन पाई है कि उसमें सुरक्षित रूप से स्नान किया जा सके। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या यमुना सफाई और प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर हो रही गतिविधियां केवल चुनावी प्रचार और विपक्ष पर आरोप लगाने तक सीमित हैं? भारद्वाज ने कहा कि फोटो सेशन और घोषणाओं के बजाय सरकार को प्रदूषण के वास्तविक कारणों पर काम करते हुए ठोस परिणाम दिखाने चाहिए।





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