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क्या बिहार में लोकसभा के साथ होंगे विधानसभा के चुनाव? सीएम नीतीश के पास हैं ये 5 विकल्प

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क्या बिहार में लोकसभा के साथ होंगे विधानसभा के चुनाव? सीएम नीतीश के पास हैं ये 5 विकल्प

बिहार में सियासी तूफान आ गया है. महागठबंधन से नाता तोड़ जेडीयू के फिर से बीजेपी नीत एनडीए में जाने के कयास लगाए जा रहे हैं. सवाल है कि क्या बिहार में सत्ता परिवर्तन होने वाला है?

बिहार में सत्तारूढ़ ‘महागठबंधन’ में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जेडीयू के फिर से बीजेपी नीत एनडीए में जाने के कयास लगाए जा रहे हैं. इन कयासों से बिहार में राजनीतिक सरगर्मी एकबार फिर से बढ़ गई है और अटकलों का दौर शुरू हो गया है. हाल में जेडीयू और लालू प्रसाद यादव की आरजेडी में दूरी बढ़ी है. इन सबके बीच जेडीयू ने अपने सभी विधायकों को राजधानी पटना बुलाया है. वहीं, दूसरी ओर बीजेपी ने अपने प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी को दिल्ली बुलाया है. सूत्रों के मुताबिक सम्राट चौधरी शाम 7 बजे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात करेंगे. इस सियासी उठा पटक के बीच सवाल है कि क्या बिहार में सत्ता परिवर्तन होने वाला है? क्या विधानसभा भंग कराकर लोकसभा के साथ राज्य में विधानसभा चुनाव करा लिए जाएं? राज्य में अब जो समीकरण बन रहे हैं, उनके मुताबिक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास 5 विकल्प हैं.

पहला विकल्प-

महागठबंधन में बने रहें, लेकिन अपनी शर्तों पर

तमाम उठापटक के बावजूद नीतीश कुमार अभी भी महागठबंधन में बने रह सकते हैं, लेकिन अपनी शर्तों पर. लोकसभा चुनाव सिर पर है. सीट बंटवारे को लेकर महागठबंधन की तीनों पार्टियों जेडीयू, आरजेडी और कांग्रेस में खींचतान चल रही है. ऐसे में नीतीश कुमार चाहेंगे कि जेडीयू को महागठबंधन से मुंह मांगी सीटें मिलें. ऐसा नहीं होता तो नीतीश कुमार महागठबंधन से बाहर निकलने का विकल्प खुला रखेंगे.

दूसरा विकल्प-

इंडिया गंठबंधन में अपनी दावेदारी मजबूत कर सकते हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तीसरी बार सत्ता के शिखर पर बैठने से रोकने के लिए पिछली साल विपक्षी दलों ने INDIA गठबंधन बनाया. तभी से कयास लगाए जा रहे थे कि नीतीश कुमार को INDIA गठबंधन का संयोजक बनाया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. साथ ही सींट बंटवारे को लेकर भी विपक्षी दल तालमेल नहीं बिठा पाए. अगर नीतीश INDIA गठबंधन से बाहर आते हैं तो इससे गठबंधन को बिहार में बड़ा झटका लगेगा. ऐसे में नीतीश कुमार कांग्रेस-आरजेडी से तालमेल बिठाकर गंठबंधन में अपनी दावेदारी मजबूत कर सकते हैं.

तीसरा विकल्प-

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बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बना ली जाए

राजनीति में कब क्या हो जाए, किसी को नहीं पता. 2015 के बिहार विधानसभा चुनावों में नीतीश कुमार ने आरजेडी और कांग्रेस के साथ ‘महागठबंधन’ बनाया. इसके बाद राज्य में महागठबंधन की सरकार बनी और नीतीश कुमार 5वीं बार मुख्यमंत्री बने, लेकिन साल 2017 में उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे. इसके बाद नीतीश ने ‘महागठबंधन’ से नाता तोड़ फिर बीजेपी से नाता जोड़ लिया. 2022 के अगस्त महीने में नीतीश ने बीजेपी का साथ छोड़ा और एक बार फिर लालू से हाथ मिला लिया. अब जब लोकसभा चुनाव सिर पर हैं और इंडिया गठबंधन फेल होता नज़र आ रहा है, ऐसे में हवा का रुख देखकर नीतीश फिर से बीजेपी के साथ हो सकते हैं.

चौथा विकल्प-

विधानसभा भंग कर दी जाए और लोकसभा के साथ चुनाव करा लिए जाएं

चर्चाएं विधानसभा भंग होने की भी हैं. दरअसल नीतीश कुमार ने मंगलवार को अचानक राजभवन पहुंचकर राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात की थी, जिसे लेकर चर्चा का बाजार और गर्म हो गया. हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रमुख जीतन राम मांझी ने तो दावा कर दिया कि बिहार में फिर से खेल हो सकता है. हालांकि जेडीयू और आरजेडी ने इसे सिर्फ औपचारिक मुलाकात बताया, लेकिन कयास लगाए जाने लगे हैं कि राज्य में विधानसभा भंग कर दी जाए और लोकसभा के साथ ही विधनासभा के चुनाव भी करा लिए जाएं.

पांचवां विकल्प-

सीएम पद छोड़ दें और राजनीति से संन्यास ले लें

साल 1985 में पहली बार विधायक बने नीतीश कुमार 8 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं. विपक्ष में चाहे बीजेपी रही हो या आरजेडी-कांग्रेस, सभी पार्टियों ने नीतीश कुमार पर आरोप लगाए कि वह सिर्फ कुर्सी से चिपके रहना चाहते हैं. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि हो सकता है नीतीश कुमार अब सीएम की कुर्सी त्याग दें और राजनीति से संन्यास ले लें. हालांकि इसकी संभावनाएं कम नज़र आती हैं. नीतीश की राजनीति को देखकर तो ऐसा नहीं लगता कि वह इतना बड़ा कदम उठाएंगे, लेकिन राजनीति में एक कहावत है कि उतार-चढ़ाव अक्सर आते रहते हैं, कभी भी मैदान नहीं छोड़ना चाहिए.

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