बिहार के छपरा जिले में जहरीली शराब पीने से कथित तौर पर कई लोगों की मौत हो गईं। इन खबरों के सामने आने के बाद से राज्य की राजनीति में जमकर बवाल मचा है। इसे लेकर सरकार और विपक्ष आमने सामने है। घटना के सामने आने के बाद, भारतीय राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इसे लेकर स्वतः संज्ञान लिया है।
गौरतलब है कि बिहार में नितीश सरकार ने 2016 में शराब बिक्री और सेवन पर पूरी तरह से बैन लगा दिया था। इसे लागू करने को लेकर सरकार ने कई सख्त रुख भी अपनाएं हैं। हालांकि अभी भी राज्य में शराब पीने और कथित तौर पर उससे होने वाली मौत की घटनाएं सामने आ रही हैं।
NHRC ने कथित तौर पर शराब पीने से हो रही मौतों की मीडिया रिपोर्ट्स को देखते हुए कहा कि अगर मीडिया रिपोर्ट्स सही हैं, तो वे मानवाधिकारों के लिए चिंता पैदा करती हैं। राज्य में अवैध शराब की बिक्री और खपत पर प्रतिबंध लगाने में बिहार सरकार की विफलता को दर्शाती हैं।
बिहार के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी कर पुलिस की दर्ज प्राथमिकी की स्थिति, अस्पताल में भर्ती पीड़ितों और किसी भी पीड़ित परिवार को मुआवजे की स्थिति सहित मामले पर एक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। आयोग ने दुर्भाग्यपूर्ण त्रासदी के लिए जिम्मेदार दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए भी कहा है। रिपोर्ट 4 सप्ताह के भीतर आने की उम्मीद है।
NHRC के जैमिनी कुमार श्रीवास्तव ने कहा, “जहरीली शराब कांड पर स्वतः संज्ञान लिया गया। बिहार के मुख्य सचिव और डीजीपी को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी गई। NHRC जानना चाहता है कि राज्य में शराब पर प्रतिबंध के बावजूद यह कैसे हुआ और लापरवाह पुलिसकर्मियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जा रही है।”



