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Vivek Tiwari Case: आठ साल बाद लखनऊ कोर्ट का फैसला, सिपाही प्रशांत चौधरी गैर-इरादतन हत्या का दोषी; संदीप कुमार बरी

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Vivek Tiwari Case: आठ साल बाद लखनऊ कोर्ट का फैसला, सिपाही प्रशांत चौधरी गैर-इरादतन हत्या का दोषी; संदीप कुमार बरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बहुचर्चित एप्पल कंपनी के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी की मौत के मामले में करीब आठ साल बाद अदालत ने फैसला सुनाया है। लखनऊ की जिला अदालत ने तत्कालीन सिपाही प्रशांत चौधरी को गैर-इरादतन हत्या का दोषी करार दिया है। वहीं मामले के दूसरे आरोपी सिपाही संदीप कुमार को पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण बरी कर दिया गया है।

अदालत ने प्रशांत चौधरी को हत्या की धारा 302 के बजाय गैर-इरादतन हत्या से संबंधित धारा 304 के तहत दोषी माना है। प्रशांत को कितनी सजा दी जाएगी, इस पर अदालत अलग से सुनवाई करेगी। इस फैसले के साथ करीब आठ वर्षों से चल रहे इस चर्चित मामले का ट्रायल एक महत्वपूर्ण चरण पर पहुंच गया है।

यह मामला सितंबर 2018 में लखनऊ के गोमतीनगर एक्सटेंशन इलाके में हुई घटना से जुड़ा है। विवेक तिवारी एप्पल कंपनी में एरिया सेल्स मैनेजर के पद पर कार्यरत थे। घटना की रात वह अपनी सहकर्मी सना के साथ कार से लौट रहे थे।

गोमतीनगर एक्सटेंशन में मकदूमपुर पुलिस चौकी के पास मोटरसाइकिल पर गश्त कर रहे सिपाही प्रशांत चौधरी और संदीप कुमार ने कथित तौर पर विवेक की कार को रोकने का इशारा किया था। इसके बाद हुए घटनाक्रम के दौरान प्रशांत चौधरी ने अपनी सर्विस पिस्टल से गोली चला दी थी।

गोली विवेक तिवारी को लगी और उनकी कार आगे जाकर डिवाइडर से टकरा गई थी। गंभीर रूप से घायल विवेक को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। घटना के समय कार में मौजूद उनकी सहकर्मी इस मामले की प्रमुख प्रत्यक्षदर्शियों में शामिल थीं।

घटना सामने आने के बाद लखनऊ से लेकर पूरे देश में मामला चर्चा का विषय बन गया था। पुलिसकर्मियों की भूमिका और बल प्रयोग को लेकर सवाल उठे थे। इसके बाद दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया और जांच शुरू हुई।

मामले में प्रशांत चौधरी और संदीप कुमार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ी। जांच पूरी होने के बाद अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई और लंबी न्यायिक प्रक्रिया शुरू हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से घटना से जुड़े गवाहों के साथ फॉरेंसिक और अन्य साक्ष्य अदालत के सामने रखे गए।

विवेक तिवारी के साथ कार में मौजूद सना ने भी अदालत में अपना बयान दर्ज कराया था। इसके अलावा विवेक की पत्नी कल्पना तिवारी, पुलिसकर्मियों, चिकित्सकों और मामले की जांच से जुड़े अधिकारियों समेत कई गवाहों के बयान अदालत के सामने दर्ज किए गए।

कई वर्षों तक चली सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से अपने-अपने तर्क प्रस्तुत किए गए। मामले में अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद 17 सितंबर 2026 को अदालत ने फैसला सुनाया।

अदालत ने उपलब्ध गवाहियों और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद प्रशांत चौधरी को धारा 302 के तहत हत्या का दोषी नहीं माना। इसके बजाय उन्हें गैर-इरादतन हत्या से संबंधित धारा 304 के तहत दोषी ठहराया गया। वहीं दूसरे आरोपी संदीप कुमार के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण अदालत ने उन्हें बरी कर दिया।

फैसले के बाद विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना तिवारी ने असंतोष जताया है। उन्होंने इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत का रुख करने की बात कही है। परिवार की आपत्ति विशेष रूप से प्रशांत चौधरी को हत्या के बजाय गैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराए जाने और संदीप कुमार को बरी किए जाने को लेकर सामने आई है।

फिलहाल मामले की कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। दोषी करार दिए गए प्रशांत चौधरी की सजा पर अदालत को अभी फैसला सुनाना है। इसके अलावा विवेक तिवारी का परिवार ट्रायल कोर्ट के फैसले को उच्च अदालत में चुनौती देने की बात कह चुका है।

करीब आठ साल पुराने इस मामले में अदालत का यह फैसला महत्वपूर्ण पड़ाव है। अब नजर प्रशांत चौधरी को सुनाई जाने वाली सजा और परिवार की ओर से संभावित अपील पर रहेगी।

 

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