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Delhi Building Safety:  भवन हादसों ने एक बार फिर नगर निगम और दिल्ली सरकार की भवन

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Delhi Building Safety:  भवन हादसों ने एक बार फिर नगर निगम और दिल्ली सरकार की भवन सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं : हाजी जरीफ

नई दिल्ली ( रविंद्र कुमार ) :राजधानी दिल्ली में एक के बाद एक सामने आ रहे भवन हादसों ने एक बार फिर नगर निगम और दिल्ली सरकार की भवन सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालिया सत्य निकेतन भवन हादसे के बाद प्रशासन द्वारा जांच, निरीक्षण और कार्रवाई का सिलसिला शुरू किया गया है, लेकिन विपक्ष का सवाल है कि आखिर हर बार किसी बड़े हादसे के बाद ही सरकारी तंत्र क्यों जागता है। दिल्ली कांग्रेस के महासचिव एवं कबीर नगर वार्ड के निगम पार्षद हाजी जरीफ ने आरोप लगाया कि पिछले वर्षों में भवन हादसों में अनेक लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन हर घटना के बाद कुछ घोषणाएं और कार्रवाई होने के बाद मामला धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चला जाता है। हाजी जरीफ ने कहा कि राजधानी में बड़ी संख्या में पुराने, जर्जर और नियमों की अनदेखी कर बनाए गए भवन मौजूद हैं। इनमें बड़ी संख्या में लोग रहते हैं और रोजाना स्कूलों, अस्पतालों, पीजी, कोचिंग सेंटरों, दुकानों, गोदामों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में हजारों-लाखों लोग पहुंचते हैं। ऐसे में भवनों की सुरक्षा को केवल हादसे के बाद जांच का विषय बनाना बेहद गंभीर लापरवाही है। उन्होंने कहा कि सत्य निकेतन जैसे हादसे यह सवाल पूछने को मजबूर करते हैं कि यदि संबंधित एजेंसियां समय रहते भवनों की जांच करतीं, अवैध निर्माण की पहचान करतीं और खतरनाक इमारतों पर कार्रवाई करतीं तो क्या जानमाल के नुकसान को रोका नहीं जा सकता था। उन्होंने कहा कि हादसे के बाद अधिकारियों को निलंबित करना या कुछ भवनों पर कार्रवाई करना जरूरी हो सकता है, लेकिन असली जिम्मेदारी हादसा होने से पहले खतरे को पहचानने की है। हालिया हादसे के बाद एमसीडी ने कई इलाकों में अवैध निर्माण और असुरक्षित भवनों के खिलाफ कार्रवाई तेज की है। हाजी जरीफ ने कहा कि दिल्ली नगर निगम के पास भवनों की निगरानी और नियमों के उल्लंघन के खिलाफ कार्रवाई के लिए व्यवस्था है, फिर भी यदि कोई भवन वर्षों तक नियमों का उल्लंघन करता रहता है तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल कागजों में निरीक्षण रिपोर्ट तैयार करने से लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी। अधिकारियों को मौके पर जाकर भवन की वास्तविक स्थिति का आकलन करना होगा कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि राजधानी में अब तक कितने जर्जर और खतरनाक भवनों को चिन्हित किया गया है, कितने भवनों पर नोटिस जारी हुए और कितने मामलों में वास्तव में कार्रवाई हुई। उन्होंने कहा कि नागरिकों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई के लिए समय सीमा तय होनी चाहिए।

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