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Delhi Building Safety:  भवन हादसों के बाद रेखा सरकार की घोषणाएं, कार्रवाई के नाम पर सन्नाटा : भीष्म शर्मा

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Delhi Building Safety:  भवन हादसों के बाद रेखा सरकार की घोषणाएं, कार्रवाई के नाम पर सन्नाटा
: भीष्म शर्मा

नई दिल्ली, (रविंद्र कुमार): राजधानी में सार्वजनिक भवनों की सुरक्षा को लेकर सरकार द्वारा प्रस्तावित नई नीति पर सवाल उठाते हुए दिल्ली कांग्रेस के उपाध्यक्ष एवं घोंडा के पूर्व विधायक भीष्म शर्मा ने आरोप लगाया है कि ट्रिपल इंजन सरकार हादसों के बाद घोषणाएं करने तक सीमित रह गई है, जबकि धरातल पर भवन सुरक्षा व्यवस्था में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में भवन हादसों में अनेक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, लेकिन हर घटना के बाद जांच, निरीक्षण और नई नीति की घोषणा कर जिम्मेदारी पूरी मान ली जाती है और कुछ समय बीतने के बाद वही घोषणाएं हवा-हवाई साबित हो जाती हैं। भीष्म शर्मा ने कहा कि राजधानी में स्कूलों, अस्पतालों, नर्सिंग होम, पीजी, कोचिंग सेंटर, गोदामों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में प्रतिदिन लाखों लोग पहुंचते हैं। इसके बावजूद कई स्थानों पर भवनों की संरचनात्मक मजबूती, अग्नि सुरक्षा, विद्युत व्यवस्था और आपातकालीन निकास जैसे महत्वपूर्ण मानकों की नियमित निगरानी को लेकर गंभीर सवाल बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि नई नीति की जरूरत आज क्यों महसूस हुई और इससे पहले मौजूद नियमों का प्रभावी ढंग से पालन क्यों नहीं कराया गया। कांग्रेस नेता ने कहा कि किसी हादसे के बाद अधिकारियों को निरीक्षण के निर्देश देना और नई व्यवस्था बनाने की घोषणा करना आसान है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि हादसा होने से पहले खतरनाक भवनों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि संबंधित विभाग नियमित रूप से भवनों का निरीक्षण करते और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ समय रहते कार्रवाई करते तो कई संभावित हादसों को रोका जा सकता था। उन्होंने कहा कि भवन सुरक्षा के नाम पर केवल कागजी ऑडिट और प्रमाणपत्र जारी करने से लोगों की जान सुरक्षित नहीं होगी। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि निरीक्षण वास्तव में मौके पर हो, रिपोर्ट निष्पक्ष हो और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर बिना राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि जनता को घोषणाएं नहीं, बल्कि सुरक्षित भवन और जवाबदेह प्रशासन चाहिए। भीष्म शर्मा ने कहा कि दिल्ली में अवैध निर्माण और नियमों की अनदेखी कोई नई समस्या नहीं है। यदि सरकार के पास भवनों की सुरक्षा को लेकर नई नीति बनाने की इच्छाशक्ति है तो उसे सबसे पहले यह बताना चाहिए कि अब तक लागू नियमों के उल्लंघन पर कितनी कार्रवाई हुई और कितने खतरनाक भवनों को चिन्हित किया गया। उन्होंने कहा कि हादसा होने के बाद जिम्मेदारी तय करने के बजाय सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिसमें लापरवाही की गुंजाइश ही न रहे। उन्होंने कहा कि नगर निगम, दिल्ली विकास प्राधिकरण, अग्निशमन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। अलग-अलग विभागों में जिम्मेदारी डालने के बजाय सरकार को एक ऐसी जवाबदेह व्यवस्था बनानी चाहिए जिसमें किसी शिकायत या सुरक्षा खामी पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित हो।

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