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Janmashtami Celebration: श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया गया कान्हा का जन्मोत्सव मंदिरों में हुई महाआरती; सजीं मनमोहक झांकियां

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Janmashtami Celebration: श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया गया कान्हा का जन्मोत्सव मंदिरों में हुई महाआरती; सजीं मनमोहक झांकियां

नई दिल्ली,(रविंद्र कुमार): भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव जन्माष्टमी का पर्व शुक्रवार को यमुनापार में पूरे श्रद्धा, विश्वास और उल्लास के साथ मनाया गया। सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था, जो देर रात तक जारी रहा। जैसे-जैसे शाम ढलती गई, यमुनापार के मंदिर रंग-बिरंगी और आकर्षक विद्युत रोशनी से नहाए हुए नजर आए। फूलों की सजावट, झिलमिलाती झालरों और आकर्षक विद्युत सज्जा ने मंदिर परिसरों की रौनक को और बढ़ा दिया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की बेला नजदीक आते ही मंदिरों में भजन-कीर्तन, शंखनाद और घंटियों की गूंज के बीच वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। कृष्णा नगर, शाहदरा, विवेक विहार, झिलमिल, विश्वास नगर, गीता कॉलोनी, लक्ष्मी नगर, शकरपुर, प्रीत विहार, पांडव नगर, मयूर विहार, आईपी एक्सटेंशन, त्रिलोकपुरी, न्यू अशोक नगर, मंडावली, करावल नगर, गोकलपुरी, भजनपुरा, घोंडा, यमुना विहार और सीलमपुर सहित यमुनापार के विभिन्न इलाकों में जन्माष्टमी को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। प्रमुख मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण का विशेष श्रृंगार किया गया और जन्मोत्सव के लिए विशेष तैयारियां की गईं। कई मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के अवसर पर महाआरती का आयोजन किया गया। मध्यरात्रि में जैसे ही कान्हा का जन्म हुआ, मंदिरों में शंख और घंटियों की ध्वनि के साथ श्रद्धालुओं ने ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारे लगाए। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की और प्रसाद ग्रहण किया।जन्माष्टमी के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने व्रत और उपवास रखा। महिलाओं और बच्चों में पर्व को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दिया। अनेक परिवारों ने अपने घरों में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के लिए विशेष सजावट की। घरों में छोटे-छोटे राधा-कृष्ण की झांकियां, बाल गोपाल के झूले और कृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ी सजावट आकर्षण का केंद्र बनी रही। बच्चों ने राधा-कृष्ण और बाल गोपाल का रूप धारण कर पर्व की खुशियों में चार चांद लगा दिए।

यमुनापार के कई हिस्सों में जगह-जगह लगाए गए पंडालों में भगवान श्रीकृष्ण की आकर्षक झांकियां प्रस्तुत की गईं। कहीं मथुरा-वृंदावन की झलक दिखाई दी तो कहीं कृष्ण की बाल लीलाओं और गोवर्धन पूजा से जुड़ी झांकियों ने लोगों का ध्यान खींचा। पंडालों में आयोजित भजन, कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए। देर शाम से लेकर मध्यरात्रि तक धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला चलता रहा। कृष्णा नगर, शाहदरा, लक्ष्मी नगर, मयूर विहार और करावल नगर समेत कई क्षेत्रों के बाजारों में भी जन्माष्टमी की विशेष रौनक देखने को मिली। दुकानों पर भगवान श्रीकृष्ण की पोशाक, मुकुट, बांसुरी, झूले और पूजा सामग्री की खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ रही। छोटे बच्चों के लिए राधा-कृष्ण की पोशाकों की भी खूब मांग रही। रात के समय जब मंदिरों में महाआरती और जन्मोत्सव के कार्यक्रम अपने चरम पर पहुंचे तो पूरा यमुनापार भक्ति के रंग में डूबा नजर आया। मंदिरों की जगमगाती रोशनी, झांकियों की भव्यता, भजन-कीर्तन और श्रद्धालुओं के जयकारों ने जन्माष्टमी के पर्व को यादगार बना दिया। देर रात तक विभिन्न इलाकों में धार्मिक आयोजनों का दौर चलता रहा और वातावरण ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयकारों से गूंजता रहा।

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