बारिश की हर बूंद सहेजने की योजना से दिल्ली को जल संकट से मिलेगी राहत : संदीप कपूर
नई दिल्ली (रविंद्र कुमार): दिल्ली में लगातार बढ़ती पानी की मांग और भविष्य में गहराते जल संकट की आशंका के बीच बारिश के पानी को संरक्षित करने और भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए मास्टर प्लान-2047 में किए गए प्रावधानों का डेम्स कमेटी, दिल्ली नगर निगम के चेयरमैन संदीप कपूर ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली जैसे महानगर में जल संरक्षण को केवल मौसमी अभियान के रूप में नहीं, बल्कि भविष्य की स्थायी नीति के तौर पर लागू करने की जरूरत है। बारिश की हर बूंद को बचाकर उसका उपयोग भूजल पुनर्भरण के लिए किया जाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। संदीप कपूर ने कहा कि बारिश के दौरान बड़ी मात्रा में पानी सड़कों, नालियों और ड्रेनेज सिस्टम के जरिए बहकर बर्बाद हो जाता है। यदि इस पानी को वैज्ञानिक तरीके से अलग-अलग स्थानों पर रोककर जमीन में उतारने की व्यवस्था की जाए तो इससे दोहरा लाभ मिलेगा। एक तरफ बारिश के दौरान जलभराव की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी ओर जमीन के भीतर पानी का स्तर भी सुधरेगा। उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान में छतों से वर्षा जल संचयन, पार्कों, झीलों, जलाशयों और अन्य उपयुक्त स्थानों को भूजल पुनर्भरण से जोड़ने की सोच स्वागत योग्य है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में पुराने जल स्रोतों, तालाबों और झीलों का संरक्षण एवं पुनर्जीवन भी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। जहां संभव हो वहां कृत्रिम भूजल पुनर्भरण ढांचे विकसित किए जाने चाहिए, ताकि बारिश के पानी का अधिकतम हिस्सा जमीन में पहुंच सके। संदीप कपूर ने कहा कि दिल्ली में बढ़ती आबादी के साथ पानी की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में केवल बाहरी स्रोतों से पानी की आपूर्ति पर निर्भर रहने के बजाय उपलब्ध प्राकृतिक जल संसाधनों का संरक्षण करना भी जरूरी है। संदीप कपूर ने कहा कि जल संकट का समाधान किसी एक विभाग या सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें दिल्ली सरकार, नगर निगम, संबंधित एजेंसियों, आरडब्ल्यूए और आम नागरिकों की भी भागीदारी जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपने घरों और संस्थानों में वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने की अपील करते हुए कहा कि यदि योजना को धरातल पर पूरी गंभीरता से लागू किया गया तो आने वाले वर्षों में दिल्ली के भूजल स्तर में सुधार के साथ जल संकट से काफी हद तक निजात मिल सकती है।



