Wazirabad Water Project: वजीराबाद परियोजना दिल्ली के जल ढांचे को मजबूत करने की ओर बड़ा कदम : श्री दत्त शर्मा
नई दिल्ली ( शिवा कौशिक ) : दिल्ली में 2,574 करोड़ रुपये की लागत वाली वजीराबाद जल आपूर्ति सुधार परियोजना को अगस्त 2026 में केंद्र सरकार के आर्थिक कार्य विभाग (डीईए) की स्क्रीनिंग कमेटी से सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। इस परियोजना से उत्तरी और उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के करीब 22 से 25 लाख लोगों को लाभ मिलेगा। इसी विषय पर बात करते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता पूर्व विधायक श्री दत्त शर्मा ने कहा कि वजीराबाद परियोजना दिल्ली के जल ढांचे को मजबूत करने की ओर एक बहुत बड़ा कदम है। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के तहत 10 विधानसभा क्षेत्रों में नई पाइपलाइन डालने समेत पानी सप्लाई नेटवर्क को बेहतर बनाने के कई काम किए जाएंगे। श्री शर्मा ने बताया कि 24 घंटे पानी सप्लाई की योजना के तहत दिल्ली को कुल 8 जोन में बांटा गया है जिनमें चंद्रावल और वजीराबाद वॉटर कमांड एरिया के अलावा ईस्ट, नॉर्थ ईस्ट, साउथ, नॉर्थ वेस्ट, साउथ वेस्ट और वेस्ट जोन शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के तहत पुरानी, क्षतिग्रस्त और कम क्षमता वाली पाइपलाइनों को बदला जाएगा, आवश्यकता के अनुसार नई ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन लाइनें बिछाई जाएंगी व मौजूदा जल नेटवर्क को आपस में बेहतर तरीके से जोड़ा जाएगा जिससे पानी का दबाव, वितरण और आपूर्ति की विश्वसनीयता बेहतर हो सके। श्री शर्मा ने बताया कि वज़ीराबाद वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, अंडरग्राउंड रिजर्वायर, पंपिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को भी अपग्रेड किया जाएगा व घरों तक पहुंचने वाले हाउस सर्विस कनेक्शनों को भी व्यवस्थित और नियमित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों में अभी तक औपचारिक जल कनेक्शन नहीं पहुंचा है, वहां नेटवर्क के विस्तार के साथ तकनीकी रूप से संभव होने पर उन्हें नियोजित जल आपूर्ति व्यवस्था से जोड़ा जाएगा। श्री शर्मा ने बताया कि इस परियोजना का एक प्रमुख उद्देश्य नॉन रेवेन्यू वाटर (एनआरडब्ल्यू) को कम करना है जिसमें लीकेज, भौतिक जल हानि और अनधिकृत उपयोग के कारण होने वाले पानी का नुकसान शामिल है। उन्होंने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य बिल्कुल स्पष्ट है, जितना पानी तैयार हो, उसका अधिक से अधिक हिस्सा लोगों तक पहुंचे व वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से लेकर घर तक पूरे नेटवर्क को मजबूत किया जाए ताकि दिल्ली को एक ऐसी जल व्यवस्था मिले जो कुशल, जवाबदेह और भरोसेमंद हो।



