ED Action: अनिल अंबानी केस में बड़ा एक्शन, अमिताभ झुनझुनवाला और अमित बापना गिरफ्तार, बैंक लोन धोखाधड़ी की जांच तेज
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बैंक लोन धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (ADAG) के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी अमिताभ झुनझुनवाला को गिरफ्तार कर लिया है। इसके साथ ही अमित बापना को भी इस मामले में गिरफ्तार किया गया है। दोनों पर वित्तीय अनियमितताओं और फंड डायवर्जन में अहम भूमिका निभाने का आरोप है।
जानकारी के अनुसार, यह मामला रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड द्वारा लिए गए बैंक लोन और उसके कथित दुरुपयोग से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियों का दावा है कि इन कंपनियों के जरिए बैंकों और वित्तीय संस्थानों से बड़ी मात्रा में धन जुटाया गया, जिसका एक बड़ा हिस्सा संदिग्ध लेन-देन में इस्तेमाल किया गया।
ED की जांच में सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क में शेल या फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल किया गया, जिनके माध्यम से धन को एक कंपनी से दूसरी कंपनी में ट्रांसफर किया गया। आरोप है कि यह पैसा रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर, रिलायंस पावर, रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस कैपिटल जैसी समूह की अन्य कंपनियों तक पहुंचाया गया।
एजेंसी के अनुसार, इन शेल कंपनियों के पास न तो वास्तविक कारोबार था और न ही पर्याप्त वित्तीय क्षमता, फिर भी इनके जरिए हजारों करोड़ रुपये के लेन-देन किए गए। ED का कहना है कि यह पूरा नेटवर्क सार्वजनिक धन की हेराफेरी और बैंकिंग सिस्टम को नुकसान पहुंचाने के लिए तैयार किया गया था।
अमिताभ झुनझुनवाला लंबे समय तक रिलायंस कैपिटल लिमिटेड में निदेशक रह चुके हैं और उन्हें समूह के वित्तीय निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला व्यक्ति माना जाता है। वहीं अमित बापना भी रिलायंस फाइनेंस से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं।
ED ने दोनों आरोपियों को अदालत में पेश कर कस्टडी रिमांड की मांग की है ताकि मामले की गहराई से पूछताछ की जा सके। एजेंसी का कहना है कि जांच में अब तक बड़े पैमाने पर फंड डायवर्जन और मनी लॉन्ड्रिंग के संकेत मिले हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, अनिल अंबानी समूह की कंपनियों पर लगभग 40,000 करोड़ रुपये तक की वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं, जिनमें से करीब 11,000 करोड़ रुपये एनपीए में बदल चुके हैं। अब तक ED ने लगभग 17,000 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की हैं, जिनमें मुंबई स्थित 3,700 करोड़ रुपये की ‘एबोड’ प्रॉपर्टी भी शामिल है।
ED ने साफ किया है कि इस मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं और जांच लगातार जारी है। एजेंसी का उद्देश्य अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों को जब्त कर सही दावेदारों तक पहुंचाना है।



