Inflation in Delhi: दिल्ली की महिलाओं की रसोई का बजट बिगड़ चुका है, महंगाई ने त्योहारों की खुशियां कीं प्रभावित : नीलम चौधरी
नई दिल्ली (स्पर्श भारद्वाज)। दशहरा और नवरात्र के बाद अब दीपावली का त्योहार नजदीक है, लेकिन लगातार बढ़ती महंगाई के कारण आम परिवारों के लिए त्योहारों की तैयारियां करना मुश्किल होता जा रहा है। प्रसिद्ध समाजसेविका एवं कांग्रेस नेता नीलम चौधरी ने बढ़ती महंगाई को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि दिल्ली में महिलाओं की रसोई का बजट बुरी तरह प्रभावित हो चुका है। उन्होंने दिल्ली सरकार से अपील की कि दीपावली के अवसर पर महिलाओं और आम परिवारों की आर्थिक परेशानियों को गंभीरता से समझते हुए आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि महंगाई के बोझ से जूझ रहे लोगों को राहत मिल सके।
नीलम चौधरी ने कहा कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि का सीधा असर गरीब, निम्न आय और मध्यम वर्ग के परिवारों पर पड़ रहा है। चीनी, प्याज, खाद्य तेल, सब्जियों और फलों सहित रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से घरेलू खर्च संभालना चुनौती बन गया है। उन्होंने कहा कि घर का बजट तैयार करने और परिवार की जरूरतों को पूरा करने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, लेकिन जब आवश्यक खाद्य पदार्थ महंगे हो जाते हैं, तो सीमित आय में सभी जरूरतों को पूरा करना कठिन हो जाता है। त्योहारों के दौरान घरों में अतिरिक्त खर्च भी बढ़ जाता है, जिससे परिवारों पर आर्थिक दबाव और अधिक महसूस होता है। उनके अनुसार, दीपावली जैसे अवसर पर सरकार को महिलाओं की आर्थिक स्थिति और रसोई के बढ़ते खर्च पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
कांग्रेस नेता ने दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के वादे का उल्लेख करते हुए भाजपा सरकार पर सवाल उठाए। नीलम चौधरी के अनुसार, जनवरी 2025 में प्रकाशित दिल्ली विधानसभा चुनाव की मतदाता सूची में लगभग 71 लाख महिला मतदाता थीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से 8 मार्च 2025 को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं को 2,500 रुपये देने के संबंध में किए गए वादे को लेकर महिलाओं में उम्मीदें बनी थीं, लेकिन उनके अनुसार यह वादा अब तक पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की ओर से इस सहायता के लिए केवल 17.50 लाख महिलाओं को निर्धारित करना दिल्ली की बड़ी महिला आबादी के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि जब महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की बात की जाती है, तो सहायता का लाभ अधिक से अधिक पात्र महिलाओं तक पहुंचाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
नीलम चौधरी ने दिल्ली में महिलाओं के लिए पहले लागू की गई योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में लाडली योजना शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य बेटियों को आर्थिक सहायता देकर उन्हें मजबूत बनाना था। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी की सरकार के दस वर्षों के कार्यकाल में यह योजना लगभग समाप्त होने की स्थिति में पहुंच गई। उन्होंने यह भी कहा कि आम आदमी पार्टी ने महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये देने का वादा किया था, लेकिन उनके अनुसार यह वादा पूरा नहीं किया गया। नीलम चौधरी ने आरोप लगाया कि अब भाजपा की सरकार भी महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के मुद्दे पर उम्मीदों के अनुरूप काम नहीं कर रही है और हजारों महिलाओं को योजनाओं के लाभ से वंचित रखा जा रहा है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए केवल घोषणाएं करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन घोषणाओं को समयबद्ध तरीके से लागू करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि महंगाई के कारण घरेलू खर्च बढ़ने पर सबसे अधिक दबाव उन परिवारों पर पड़ता है, जिनकी आय सीमित है। ऐसे में महिलाओं के लिए घोषित आर्थिक सहायता योजनाओं को स्पष्ट नियमों के साथ लागू किया जाना चाहिए, ताकि पात्र लाभार्थियों को समय पर मदद मिल सके। उन्होंने दिल्ली सरकार से महिलाओं की जरूरतों को प्राथमिकता देने, रसोई के खर्च पर पड़ रहे महंगाई के प्रभाव को समझने और गरीब तथा मध्यम वर्गीय परिवारों को राहत देने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
नीलम चौधरी ने राजनीतिक परिस्थितियों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि दिल्ली की महिलाओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल करते हुए पहले आम आदमी पार्टी की सरकार को सत्ता से बाहर किया था। उन्होंने दावा किया कि यदि भाजपा सरकार भी जनविरोधी नीतियों पर काम करती रही और महिलाओं से किए गए वादों को पूरा नहीं किया गया, तो महिलाएं भविष्य में उसे भी सत्ता से बाहर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं की नाराजगी को नजरअंदाज करना किसी भी सरकार के लिए उचित नहीं है। नीलम चौधरी ने दीपावली के अवसर पर दिल्ली सरकार से आग्रह किया कि वह महंगाई से राहत देने, महिलाओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने और घरेलू बजट पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए ठोस कदम उठाए, ताकि त्योहारों की खुशियां आम परिवारों तक भी पहुंच सकें।





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