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दिल्ली के सरकारी स्कूल झेल रहे हैं शिक्षकों की भारी कमी : नीलम चौधरी

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नीलम चौधरी

दिल्ली के सरकारी स्कूल झेल रहे हैं शिक्षकों की भारी कमी : नीलम चौधरी

नई दिल्ली ( स्पर्श भारद्वाज ) : ट्रिपल इंजन सरकार की घोर लापरवाही के चलते दिल्ली के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है | जिसके चलते छात्रों की पढाई प्रभावित हो रही है | यह कहना है समस्त रोहताश नगर आर.डब्लू.ए.जी अध्यक्ष वरिष्ठ कांग्रेस नेता नीलम चौधरी का | नीलम चौधरी कहती है दिल्ली सरकार के स्कूलों में स्थायी शिक्षकों की भारी कमी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में दस हजार से अधिक स्वीकृत शिक्षण पद खाली हैं, और शिक्षकों की कमी से निपटने के लिए सरकारी स्कूल अतिथि शिक्षकों और अस्थायी अनुबंध शिक्षकों पर बहुत अधिक निर्भर हैं। स्कूलों में शिक्षकों की कमी के कारण छात्रों की पढ़ाई अत्यधिक बाधित हो रहा है, जिससे शिक्षा का स्तर लगातार गिर रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा की रेखा गुप्ता सरकार सरकारी स्कूलों में छात्रों और शिक्षकों की दुर्दशा की कोई चिंता नहीं है, जिनका एकमात्र इरादा सरकारी स्कूलों को बंद करना और प्राईवेट स्कूलों की बढ़ोतरी करना प्रतीत होता है। नीलम चौधरी कहती हैं दिल्ली के सरकारी स्कूलों ने 15 साल के कांग्रेस शासन के दौरान एक मजबूत प्रतिष्ठा बनाई और 10 वीं में पास होने वाले छात्रों की दर 34 प्रतिशत से बढ़कर 90 प्रतिशत से अधिक हो गई थी। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार के स्कूल कांग्रेस के 2008-09 के वर्षों से सभी राज्यों में शीर्ष पर रहे थे। उन्होंने कहा कि दिल्ली में कांग्रेस शासन के समय सरकारी स्कूलों के छात्र निकलकर भविष्य में डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, प्रोफेसर, उच्च पदस्थ पेशेवर, शिक्षक आदि बनकर देश को गौरव बढ़ाते थे लेकिन आम आदमी पार्टी और भाजपा सरकारों ने अपने हितों को बढ़ावा देकर सरकारी स्कूलों को नष्ट कर दिया है। नीलम चौधरी कहती है कि 2014 के बाद आम आदमी पार्टी की सरकार के शिक्षा माॅडल की वास्तविकता का यह प्रमाण है कि आज दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक नही है, शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से अतिथि और अनुबंधित शिक्षकों के कंधे पर टिकी हुई है, जो शिक्षा देने के साथ अपनी अजीविका और समय पर वेतन के लिए जूझ रहे है। नए कक्षा रुमों और नए स्कूल भवनों के निर्माण के नाम पर राजस्व की लूट करने वाली केजरीवाल सरकार के शिक्षा माॅडल में पर्याप्त शिक्षकों, प्राचार्यों और उप-प्राचार्यों की नियुक्ति नही करना शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा संकट बना, जिस पर भाजपा सरकार भी कोई ध्यान नही दे रही है।

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