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जानलेवा प्रदूषण से निपटने के लिए उठाने होंगे कड़े कदम : निर्मल गुप्ता

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निर्मल गुप्ता
जानलेवा प्रदूषण से निपटने के लिए उठाने होंगे कड़े कदम : निर्मल गुप्ता

जानलेवा प्रदूषण से निपटने के लिए उठाने होंगे कड़े कदम : निर्मल गुप्ता

जनता को भी देना होगा प्रशासन को ईमानदारी से सहयोग

नई दिल्ली ( सी.पी.एन न्यूज़ ) : राजधानी दिल्ली में प्रदूषण भयंकर रूप ले चुका है और प्रशासनिक अमला भी इससे निपटने के लिए सड़कों पर उतरा हुआ है लेकिन जनता को भी प्रदूषण को रोकने में अपना सहयोग देना होगा | यह कहना है आर.डब्लू.ए.विवेक विहार के अध्यक्ष प्रमुख समाजसेवी निर्मल गुप्ता का |

निर्मल गुप्ता कहते हैं कोई भी अभियान जब तक कामयाब नहीं होता जब तक जनता की उसमें सकारात्मक भागीदारी नहीं हो | निर्मल गुप्ता कहते हैं कूड़े से भी प्रदूष्ण बढ़ता है जिसके लिए हमारी जनता की भी भागीदारी रहती है | अनेक लोग इतने बदतर हालात के बीच भी कूड़ा सडकों पर या गलियों के नुक्कड़ पर डाल देते हैं जिन्हें आवारा कुत्ते तो गलियों में फैलाते ही हैं इसके अलावा कबाड़ बीनने वाले लोग भी गलियों में बिखेर कर चले जाते है | निर्मल गुप्ता कहते हैं पाबंदी लगने के बावजूद आज भी गलियों में लोग अलाव जलाकर बैठते हैं या कूड़े के ढेर में आग लगा देते हैं जिनसे प्रदूष्ण को बढ़ावा मिलता है | निर्मल गुप्ता कहते हैं अनेक दुकानदार अपनी दुकानों के आगे डस्टबिन नहीं रखते जिसे चलते उनके ग्राहक वहीं फिजूल के आईटम छोड़ देते हैं जो प्रदूष्ण की वजह बनते हैं |

निर्मल गुप्ता कहते हैं भारत में स्मॉग की समस्या इतनी गंभीर है कि इसे साबित करने के लिए किसी प्रमाण की जरूरत नहीं है. सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर का अनुमान है कि अकेले दिल्ली में ही 2023 में वायु प्रदूषण के कारण करीब 17,000 लोगों की जान गई. कुल मिलाकर खराब हवा राजधानी में हर साल स्वस्थ जीवन के 4.9 लाख साल कम कर देती है निर्मल गुप्ता कहते हैं हवा की गुणवत्ता खराब होने की सबसे बड़ी वजह धूल है.

दिल्ली की बात करें तो गर्मियों के मौसम में हवा में मौजूद पीएम 10 कणों का 40 फीसदी और पीएम 2.5 कणों का 30 फीसदी हिस्सा धूल ही होता है. शहरों में निर्माण कार्य वाली जगहों और खाली पड़ी कच्ची जमीनों से यह धूल उड़ती है और हवा में घुल जाती है. इसे रोकने के लिए निर्माण स्थलों को ढकना और वहां नियमित रूप से पानी का छिड़काव करना बहुत जरूरी है. इसके साथ ही, शहरों और उनके आसपास हरियाली बढ़ाकर भी हम इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकते हैं. आज भी राजधानी दिल्ली में सैकड़ों गलियों तथा सडको पर गड्ढे खुदे पड़े हैं या सडकें बुरी हाल में टूटी पड़ी हैं जिनसे दिनभर धुल मिटटी उडती रहती है जो प्रदूष्ण फैनाने में बड़ा रोल अदा करती है | इतना ही नहीं राजधानी दिल्ली में भवन निर्माण और मरम्मत तक पर पाबंदी लगी हुई है बावजूद इसके अनेक स्थानों पर आज भी यह सिलसिला जारी है | ऐसे में प्रदूष्ण पर बिना जनता के सहयोग के कैसे रोक लग सकती है |

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