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Northeast Flood 2025: पूर्वोत्तर भारत में कुदरत का कहर: बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से अब तक 30 मौतें, जनजीवन ठप

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Northeast Flood 2025: पूर्वोत्तर भारत में कुदरत का कहर: बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से अब तक 30 मौतें, जनजीवन ठप

पूर्वोत्तर भारत के चार प्रमुख राज्य—असम, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर—इस समय भयंकर प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे हैं। बीते कई दिनों से लगातार हो रही मूसलधार बारिश ने क्षेत्र के अधिकांश हिस्सों में कहर बरपा रखा है। तेज बारिश के कारण नदियों में उफान आ गया है, जिससे कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इसके साथ ही भूस्खलन की घटनाओं ने तबाही को और भी बढ़ा दिया है।

अब तक मिली जानकारी के अनुसार, इस आपदा के चलते कुल 30 लोगों की जान जा चुकी है। मृतकों में बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं। कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं और कुछ के लापता होने की भी खबर है। भारी बारिश और बाढ़ के कारण हजारों लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करना पड़ा है।

असम के विभिन्न जिलों में ब्रह्मपुत्र नदी और उसकी सहायक नदियाँ खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। कई गांव जलमग्न हो चुके हैं और सैकड़ों एकड़ खेतों में खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं। स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए हैं, सड़कें बह गई हैं और यातायात पूरी तरह बाधित हो गया है।

मिजोरम में लगातार बारिश के चलते राजधानी आइजोल और अन्य जिलों में भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। कई मकान ध्वस्त हो गए हैं और रास्ते बंद हो गए हैं। आपातकालीन सेवाएं सक्रिय कर दी गई हैं और एनडीआरएफ की टीमों को राहत और बचाव कार्य के लिए तैनात किया गया है।

अरुणाचल प्रदेश में तवांग, पश्चिम सियांग और लोअर सुबनसिरी जिलों में बाढ़ का पानी गांवों में घुस गया है। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के लिए नौकाओं और हेलिकॉप्टरों की सहायता ली जा रही है। वहीं मणिपुर के पहाड़ी इलाकों में लैंडस्लाइड के कारण कई रास्ते बंद हो गए हैं, जिससे गांवों का संपर्क कट गया है।

मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि अगले 72 घंटों के दौरान असम, मिजोरम, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। विभाग ने इन राज्यों के सभी जिलों में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। स्थानीय प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है और राहत कैंपों में आवश्यक सामान, दवाइयाँ और भोजन भेजा जा रहा है।

पूर्वोत्तर राज्यों में इस तरह की स्थिति हर साल मानसून के दौरान देखने को मिलती है, लेकिन इस बार बारिश की तीव्रता ने सारी सीमाएं लांघ दी हैं। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून की प्रणाली अस्थिर हो रही है, जिससे कुछ इलाकों में रिकॉर्ड तोड़ बारिश हो रही है और विनाशकारी बाढ़ की आशंका बढ़ रही है।

इन चार राज्यों में राहत कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं, लेकिन खराब मौसम और दुर्गम इलाकों की वजह से चुनौती और भी कठिन हो गई है। फिलहाल सरकार और स्थानीय प्रशासन की पूरी कोशिश है कि लोगों की जान और संपत्ति की रक्षा की जा सके।

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