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SSB Cyber Fraud Advisory: हनी ट्रैप और संदिग्ध APK फाइलों से सावधान रहें जवान, SSB ने जारी की साइबर सुरक्षा एडवाइजरी

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SSB Cyber Fraud Advisory: हनी ट्रैप और संदिग्ध APK फाइलों से सावधान रहें जवान, SSB ने जारी की साइबर सुरक्षा एडवाइजरी

सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने अपने जवानों और कर्मचारियों को बढ़ते साइबर अपराधों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। बल ने ऑनलाइन हनी ट्रैप, फर्जी पहचान के जरिए दोस्ती, संदिग्ध वीडियो कॉल, अनजान लिंक और मोबाइल में संदिग्ध APK फाइल इंस्टॉल करने के खतरों के प्रति आगाह किया है। 14 अक्टूबर 2026 को सामने आई इस एडवाइजरी का उद्देश्य जवानों को निजी जानकारी की चोरी, ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग और आर्थिक धोखाधड़ी से बचाना है। SSB ने स्पष्ट किया है कि साइबर अपराधी लोगों का विश्वास जीतने के बाद उनकी संवेदनशील जानकारी का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं।

SSB के मुताबिक, हनी ट्रैप में फंसाने के लिए साइबर अपराधी कई बार फर्जी पहचान के साथ सोशल मीडिया या मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर संपर्क करते हैं। शुरुआत में सामान्य बातचीत और दोस्ती के जरिए विश्वास कायम किया जाता है। इसके बाद भावनात्मक जुड़ाव का फायदा उठाकर निजी तस्वीरें, वीडियो या अन्य संवेदनशील जानकारियां हासिल करने की कोशिश की जाती है। ऐसी सामग्री मिलने के बाद पीड़ित को बदनाम करने या उसे सार्वजनिक करने की धमकी देकर पैसे मांगे जा सकते हैं। इसी खतरे को देखते हुए जवानों को अनजान लोगों से ऑनलाइन बातचीत करते समय सावधानी बरतने और निजी तस्वीरें या वीडियो साझा करने से बचने की सलाह दी गई है।

एडवाइजरी में संदिग्ध वीडियो कॉल को लेकर भी चेतावनी दी गई है। किसी अनजान व्यक्ति की पहचान की पुष्टि किए बिना उस पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है। जवानों को सलाह दी गई है कि यदि कोई व्यक्ति वीडियो कॉल के दौरान अनुचित गतिविधियों के लिए दबाव बनाता है या बातचीत के बाद पैसों की मांग करता है, तो सतर्क रहें। किसी भी तरह की धमकी या ब्लैकमेलिंग की स्थिति में दबाव में आकर पैसे देने के बजाय मामले की शिकायत संबंधित अधिकारियों और साइबर अपराध से जुड़ी एजेंसियों से करनी चाहिए।

SSB ने मोबाइल में अनजान स्रोत से APK फाइल डाउनलोड करने और इंस्टॉल करने के खतरे पर भी विशेष जोर दिया है। APK यानी एंड्रॉयड पैकेज किट वह फाइल होती है, जिसका इस्तेमाल एंड्रॉयड फोन में एप्लिकेशन इंस्टॉल करने के लिए किया जाता है। हालांकि, अविश्वसनीय वेबसाइट, मैसेज या सोशल मीडिया के जरिए भेजी गई APK फाइल में नुकसान पहुंचाने वाला सॉफ्टवेयर हो सकता है। ऐसी फाइल इंस्टॉल होने पर मोबाइल में मौजूद निजी जानकारी, बैंकिंग विवरण और अन्य संवेदनशील डेटा खतरे में पड़ सकता है। इसलिए किसी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजी गई APK फाइल को बिना जांचे इंस्टॉल नहीं करना चाहिए और एप्लिकेशन केवल भरोसेमंद स्रोतों से ही डाउनलोड करने चाहिए।

साइबर ठगी के दूसरे तरीकों को लेकर भी जवानों को आगाह किया गया है। अपराधी कभी बैंक कर्मचारी तो कभी सरकारी विभाग या किसी विश्वसनीय संस्था का प्रतिनिधि बनकर लोगों को फोन कर सकते हैं। वे खाते के बंद होने, इनाम मिलने या किसी जरूरी काम का हवाला देकर जल्दबाजी में निर्णय लेने के लिए दबाव बना सकते हैं। ऐसे मामलों में OTP, PIN, पासवर्ड और बैंक खाते से जुड़ी जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। अनजान लिंक पर क्लिक करने, संदिग्ध QR कोड स्कैन करने और अपुष्ट वेबसाइट पर व्यक्तिगत जानकारी दर्ज करने से भी बचना जरूरी है। किसी भी वित्तीय लेनदेन से पहले संबंधित व्यक्ति या संस्था की पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करनी चाहिए।

SSB ने साइबर सुरक्षा जागरूकता सप्ताह के समापन के बाद यह संदेश जारी करते हुए जवानों से डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की अपील की है। बल ने संदिग्ध गतिविधि सामने आने पर तुरंत सतर्क होने, जानकारी की जांच करने और उसके बाद ही कोई कदम उठाने पर जोर दिया है। यदि कोई व्यक्ति साइबर वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार होता है, तो उसे जल्द से जल्द राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए या सरकारी पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। समय रहते शिकायत करने से मामले की जांच और ठगी गई रकम को रोकने की संभावना बेहतर हो सकती है।

सशस्त्र सीमा बल केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल है। इसकी जिम्मेदारी भारत-नेपाल सीमा के 1,751 किलोमीटर और भारत-भूटान सीमा के 699 किलोमीटर हिस्से की सुरक्षा करना है। सीमा निगरानी के साथ-साथ बल सीमा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा, सीमा पार अपराधों की रोकथाम और तस्करी जैसी अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने में भी भूमिका निभाता है। अब साइबर सुरक्षा को लेकर जारी एडवाइजरी के जरिए SSB ने अपने कर्मियों को यह संदेश दिया है कि डिजिटल दुनिया में भी सतर्कता और पहचान की पुष्टि उतनी ही जरूरी है जितनी अन्य सुरक्षा जिम्मेदारियों में।

 

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