Home आमने सामने फुटपाथों पर कब्जा जनता के अधिकारों का हनन, सुप्रीम कोर्ट के फैसले...

फुटपाथों पर कब्जा जनता के अधिकारों का हनन, सुप्रीम कोर्ट के फैसले को जमीन पर उतारे सरकार : भीष्म शर्मा

0
3
भीष्म शर्मा

फुटपाथों पर कब्जा जनता के अधिकारों का हनन, सुप्रीम कोर्ट के फैसले को जमीन पर उतारे सरकार : भीष्म शर्मा

नई दिल्ली, (रविंद्र कुमार): सुप्रीम कोर्ट द्वारा पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित और अतिक्रमण-मुक्त फुटपाथ सुनिश्चित करने के निर्देशों का स्वागत करते हुए दिल्ली कांग्रेस के उपाध्यक्ष एवं घोंडा विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक भीष्म शर्मा ने दिल्ली सरकार और संबंधित विभागों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का फैसला राजधानी के लाखों पैदल यात्रियों के अधिकारों की बड़ी जीत है, लेकिन यमुनापार में वर्षों से फुटपाथों पर जारी अतिक्रमण यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर सरकारी एजेंसियां अब तक क्या कर रही थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार और कथित मिलीभगत के चलते लोनी रोड, मंडोली रोड, भजनपुरा, कृष्णा नगर सहित यमुनापार के अनेक इलाकों में फुटपाथ अतिक्रमण की चपेट में हैं। भीष्म शर्मा ने कहा कि दिल्ली में फुटपाथ पैदल यात्रियों के लिए बनाए गए हैं, लेकिन आज स्थिति यह है कि कई प्रमुख मार्गों पर फुटपाथ पर दुकानदारों का सामान, रेहड़ी-पटरी और अवैध बाजार नजर आते हैं। इसके कारण आम नागरिकों को मजबूर होकर सड़क पर चलना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इससे सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांगजनों को होती है तथा हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है। उन्होंने विशेष रूप से लोनी रोड का जिक्र करते हुए कहा कि यह यमुनापार का बेहद महत्वपूर्ण और व्यस्त मार्ग है, लेकिन अतिक्रमण के कारण पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित आवागमन मुश्किल हो गया है। इसी तरह मंडोली रोड, भजनपुरा और कृष्णा नगर सहित अनेक इलाकों में फुटपाथों पर कब्जे की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। उन्होंने कहा कि कहीं दुकानों का सामान फुटपाथ पर फैला है तो कहीं अवैध पटरी बाजार और रेहड़ी-पटरी के कारण पैदल चलने की जगह तक नहीं बचती। भीष्म शर्मा ने आरोप लगाया कि अतिक्रमण केवल लापरवाही का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे भ्रष्टाचार का खेल भी जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि निगम कर्मियों और स्थानीय पुलिस की कथित मिलीभगत के कारण कई स्थानों पर अतिक्रमण को संरक्षण मिलने की शिकायतें सामने आती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अवैध पटरी बाजार और रेहड़ी-पटरी वालों से कथित उगाही के कारण कार्रवाई प्रभावी नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए। भीष्म शर्मा ने कहा कि मामला केवल बाजारों और मुख्य सड़कों तक सीमित नहीं है। जीटीबी अस्पताल सहित यमुनापार के अन्य प्रमुख अस्पतालों के बाहर भी फुटपाथ अतिक्रमण की समस्या से जूझ रहे हैं। अस्पतालों में आने वाले मरीजों, बुजुर्गों और दिव्यांगों को भीड़ और अतिक्रमण के बीच सड़क पर चलने को मजबूर होना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों जैसे संवेदनशील स्थानों के बाहर फुटपाथों का अतिक्रमण तत्काल हटाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब दिल्ली सरकार, नगर निगम, PWD, पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियों को संयुक्त रूप से अभियान चलाकर यमुनापार के फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त करना चाहिए। केवल एक-दो दिन की कार्रवाई से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए नियमित निगरानी, स्थायी प्रवर्तन व्यवस्था और अधिकारियों की जवाबदेही तय करना जरूरी है। शर्मा ने कहा कि फुटपाथ पर कब्जा करने वाला व्यक्ति केवल सरकारी जमीन पर कब्जा नहीं करता, बल्कि वह आम नागरिक के सुरक्षित आवागमन के अधिकार पर कब्जा करता है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली में फुटपाथों को उनका मूल स्वरूप वापस दिलाया जाना चाहिए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here