UP Child Trafficking: बच्चों की तस्करी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश, दिल्ली की नर्स समेत 6 गिरफ्तार; 5-5 लाख में होता था सौदा
उत्तर प्रदेश के संभल जिले में बच्चों की तस्करी करने वाले एक गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। असमोली थाना पुलिस ने मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह में दिल्ली की एक नर्स और हाई-प्रोफाइल सोसाइटी में बच्चों को बेचने वाली महिला भी शामिल हैं। जांच में सामने आया है कि चार-चार साल के दो बच्चों का कथित तौर पर पांच-पांच लाख रुपये में सौदा किया गया था।
संभल के एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने शुक्रवार को बहजोई स्थित कार्यालय में मामले का खुलासा करते हुए बताया कि गिरोह ने मेले से दो बच्चों का अपहरण किया था। पुलिस की सक्रियता के बाद आरोपियों ने दूसरे बच्चे को गांव में ही छोड़ दिया था।
मामले की शुरुआत 4 अगस्त को गांव ओबरी में लगे मेले से हुई। यहां गांव निवासी सलमान के चार वर्षीय बेटे उवैस का अपहरण हो गया। परिजनों की सूचना पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। इसके बाद 8 अगस्त को इसी मेले से हजरतनगर गढ़ी थाना क्षेत्र के बराही गांव निवासी नाजिर हुसैन के चार वर्षीय बेटे सुलेमान के भी गायब होने की जानकारी सामने आई।
दो बच्चों के लगातार अपहरण से पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच तेज कर दी। थाना पुलिस, सर्विलांस टीम और एसओजी को जांच में लगाया गया। पुलिस ने आरोपियों तक पहुंचने के लिए करीब 80 किलोमीटर के क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। जांच के दौरान एक बाइक और एक कार को ट्रेस किया गया, जिसके आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में ऐंचोड़ा कंबोह थाना क्षेत्र के अशरफपुर गांव निवासी फरीद, मुरादाबाद के कुंदरकी थाना क्षेत्र के सादात निवासी फैसल, पाकबड़ा निवासी शमशाद, दिल्ली के शिव विहार निवासी कोमल, नंदनगरी निवासी वंदना जैन और करावल नगर निवासी गुड्डी शामिल हैं।
पुलिस जांच में सामने आया कि उवैस के अपहरण में उसके रिश्ते के साले सलमान उर्फ सुल्तान और उसकी पत्नी साजिया की भी कथित भूमिका थी। दोनों रामपुर के खजुरिया थाना क्षेत्र के ऊधमपुरा गांव में रहते हैं। पुलिस अब पूरे नेटवर्क में उनकी भूमिका और अन्य संभावित लोगों के संबंध में भी जांच कर रही है।
एसपी के अनुसार, पहला बच्चा अपहरण करने के बाद दिल्ली लाया गया था। पुलिस का दावा है कि उसे दिल्ली की कोमल और वंदना जैन को 2.40 लाख रुपये में बेच दिया गया। इसके बाद दोनों महिलाओं ने कथित तौर पर बच्चे का पांच लाख रुपये में दूसरे परिवार के साथ सौदा किया।
पुलिस के मुताबिक, दूसरे चार वर्षीय बच्चे का भी पांच लाख रुपये में सौदा तय किया गया था। हालांकि, 8 अगस्त को बच्चे के अपहरण के बाद आरोपियों को पुलिस के पीछा करने की भनक लग गई। इसके बाद पुलिस को गुमराह करने के लिए बच्चे को वापस गांव ओबरी में छोड़ दिया गया।
पूछताछ में पुलिस को कथित तौर पर यह जानकारी भी मिली कि गिरोह बच्चों को अपहरण करने के बाद अलग-अलग लोगों तक पहुंचाता था और उनसे मोटी रकम वसूलता था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने इससे पहले कितने बच्चों को निशाना बनाया और इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, वाहनों की आवाजाही और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया है। अधिकारियों का कहना है कि बच्चों की तस्करी जैसे गंभीर अपराध में शामिल अन्य संदिग्धों की पहचान के लिए जांच जारी है।
इस मामले ने बच्चों की सुरक्षा और मेले जैसे सार्वजनिक आयोजनों में निगरानी व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस अब गिरोह के कथित खरीददारों और अन्य संपर्कों की जानकारी जुटा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।



