National Conference Crisis: उमर अब्दुल्ला सरकार से नाराज मुबारक गुल 4 नवंबर को करेंगे बड़े खुलासे, प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताएंगे अगला कदम
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सरकार और सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के भीतर चल रही नाराजगी के बीच वरिष्ठ विधायक मुबारक गुल ने अपने अगले कदम को लेकर बड़ा ऐलान किया है। ईदगाह विधानसभा क्षेत्र से छह बार विधायक रह चुके मुबारक गुल 4 नवंबर को श्रीनगर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी के अंदर चल रहे घटनाक्रम पर अपनी बात रखेंगे। उन्होंने संकेत दिया है कि अब तक उन्होंने कई मुद्दों पर चुप्पी बनाए रखी थी, लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी के भीतर हुए घटनाक्रम और अपने रुख के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे।
मुबारक गुल की नाराजगी मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला मंत्रिमंडल के हालिया विस्तार के बाद सामने आई है। 27 अक्टूबर को मंत्रिमंडल में चार नए चेहरों को शामिल किया गया था। इस फेरबदल में अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्लाह, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद वानी उर्फ कालू को मंत्री बनाया गया। वहीं, पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। मुबारक गुल भी उनमें शामिल थे। उनके समर्थक लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि पार्टी नेतृत्व उन्हें सरकार में उचित जिम्मेदारी दे।
मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने मुबारक गुल को पार्टी का महासचिव नियुक्त किया था। यह नियुक्ति उस समय हुई जब अली मोहम्मद सागर को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। हालांकि, 30 अक्टूबर को पार्टी की ओर से नया आदेश जारी कर अली मोहम्मद सागर को अगले आदेश तक महासचिव पद पर बने रहने को कहा गया। इस घटनाक्रम के बाद मुबारक गुल की नियुक्ति को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई। गुल के समर्थकों में इस फैसले को लेकर नाराजगी बताई जा रही है। अब 4 नवंबर की प्रेस कॉन्फ्रेंस में वह इस पूरे विवाद पर अपना पक्ष रख सकते हैं।
मुबारक गुल के समर्थक ईदगाह विधानसभा क्षेत्र में लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, उनके समर्थन में कफन रैलियां और मशाल जुलूस भी निकाले गए हैं। गुल ने कहा है कि फिलहाल वह अपने कार्यकर्ताओं को शांत कराने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कहना है कि समर्थकों की नाराजगी को देखते हुए उन्हें पार्टी के हालिया फैसलों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। ऐसे में उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस को नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर चल रहे असंतोष के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यह विवाद केवल मुबारक गुल तक सीमित नहीं है। पार्टी के करीब 20 असंतुष्ट विधायकों ने हाल ही में बैठक कर अपनी मांगों का एक चार्टर तैयार किया था। इन विधायकों की प्रमुख मांग है कि उमर अब्दुल्ला सरकार में अक्टूबर 2024 से लगातार मंत्री बने हुए चारों मंत्रियों को हटाकर नए और वरिष्ठ नेताओं को मौका दिया जाए। इसके अलावा मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी और शमी ओबेरॉय को पद से हटाने, पार्टी के चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरा करने और जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल कराने के मुद्दे पर केंद्र सरकार के सामने अधिक मजबूती से पक्ष रखने की मांग भी शामिल है।
असंतुष्ट विधायकों ने अनुच्छेद 370 और 35A से जुड़े मुद्दों पर भी पार्टी नेतृत्व से स्पष्ट और आक्रामक रुख अपनाने की मांग की है। उनका कहना है कि विधानसभा चुनाव के दौरान जनता से किए गए वादों को पूरा करने के लिए सरकार और पार्टी को ठोस कदम उठाने चाहिए। विधायकों ने पार्टी के भीतर एक सलाहकार समूह बनाने, अनुशासन संबंधी मामलों के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने और संगठन के मीडिया एवं संचार तंत्र को मजबूत करने जैसे सुझाव भी दिए हैं। पार्टी नेतृत्व की ओर से नाराज नेताओं से बातचीत की कोशिश की जा रही है, लेकिन असंतुष्ट विधायक फिलहाल अपनी मांगों पर कायम बताए जा रहे हैं।
इस बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह के संभावित इस्तीफे को लेकर भी राजनीतिक हलचल बनी हुई है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर 2024 के विधानसभा चुनाव के जनादेश से पीछे हटने का आरोप लगाया है। उनके पार्टी और लोकसभा सदस्यता छोड़ने की चर्चा के बीच पार्टी नेतृत्व संभावित राजनीतिक विकल्पों पर विचार कर रहा है। इससे नेशनल कॉन्फ्रेंस के सामने संगठनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चुनौती बढ़ गई है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस नेतृत्व ने असंतुष्ट विधायकों को मनाने के लिए वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है। अली मोहम्मद सागर, उनके बेटे सलमान सागर और पार्टी सांसद शमी ओबेरॉय सहित कई नेताओं ने नाराज विधायकों से बातचीत की है। सूत्रों के मुताबिक, असंतुष्ट नेताओं को भविष्य में मंत्रिमंडल में बदलाव की संभावना और मुख्यमंत्री के लिए अतिरिक्त सलाहकार नियुक्त करने जैसे विकल्पों पर भी चर्चा हुई है। हालांकि, अभी तक इस बातचीत से कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।
अब सभी की निगाहें 4 नवंबर को मुबारक गुल की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हैं। वह पार्टी के भीतर चल रहे विवाद, महासचिव पद को लेकर पैदा हुई स्थिति और मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अपनी नाराजगी पर क्या रुख अपनाते हैं, यह आने वाले दिनों की राजनीति को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि गुल केवल अपनी नाराजगी जाहिर करेंगे या पार्टी नेतृत्व के खिलाफ कोई बड़ा संगठनात्मक अथवा राजनीतिक कदम उठाने की घोषणा करेंगे।





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