सत्य के साथ • आपके साथशुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026
ADVERTISEMENTविज्ञापन के लिए संपर्क करेंCPN NEWS • YOUR BRAND HERE
ताज़ा खबर
Delhi Air Pollution: करोड़ों रुपये खर्च के बावजूद प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण नहीं: डॉ. एम. एल. भास्करChhath Puja Preparation: छठ महापर्व से पहले ही व्यवस्थाएं दुरुस्त करने में जुटी दिल्ली सरकार: दीपक गाबाCongress Rally: रामलीला मैदान में इंडिया ब्लॉक की रैली को सफल बनाने का महेंद्र भास्कर ने किया आह्वानGhaziabad Crime: पत्नी के जिम ट्रेनर ने घर में घुसकर पति पर चाकू से किया हमला, CCTV में कैद हुई वारदात; दोनों आरोपी गिरफ्तारDelhi Financial Assistance: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 51 नवविवाहित महिलाओं को दिए एक-एक लाख रुपये, करवा चौथ पर मिला खास तोहफाDelhi-Mumbai Expressway Accident: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर खड़ी बस में घुसी कार, पति-पत्नी और 12 साल की बेटी की मौत; दो बच्चे गंभीर घायलDelhi Robbery: लाहौरी गेट में दिनदहाड़े 2.30 करोड़ रुपये की लूट, पिस्टल दिखाकर कर्मचारियों को धमकाया; CCTV खंगाल रही पुलिसDelhi Lawyers Strike: ACP और SHO के तबादले के बाद वकीलों की हड़ताल खत्म, शिकायतों की जांच के लिए तय हुई समयसीमा

Delhi Lawyers Strike: ACP और SHO के तबादले के बाद वकीलों की हड़ताल खत्म, शिकायतों की जांच के लिए तय हुई समयसीमा

5 मिनट पढ़ें

नई दिल्ली में पुलिस और वकीलों के बीच चल रहे विवाद के बाद जिला अदालतों में वकीलों की अनिश्चितकालीन हड़ताल समाप्त हो गई है। दिल्ली पुलिस के दो अधिकारियों के तबादले और लंबित शिकायतों की जांच निर्धारित समयसीमा में पूरी करने पर सहमति बनने के बाद वकीलों ने न्यायिक कार्य से दूरी बनाने का फैसला वापस ले लिया। इस घटनाक्रम के बाद दिल्ली की जिला अदालतों में कामकाज फिर से शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। विवाद के केंद्र में शाहदरा थाने में एक वकील पर कथित हमले के मामले में पुलिस की कार्रवाई और उसके बाद थाने में हुए घटनाक्रम को लेकर उठे सवाल हैं।

दिल्ली पुलिस मुख्यालय ने 28 अक्टूबर को ACP मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के SHO इंस्पेक्टर अरुण कुमार के तबादले के आदेश जारी किए। ACP मनस्वी वशिष्ठ को गांधी नगर के SDPO पद से हटाकर स्पेशल पुलिस यूनिट फॉर वुमन एंड चिल्ड्रेन (SPUWAC) में भेजा गया, जबकि इंस्पेक्टर अरुण कुमार को शाहदरा थाने से हटाकर दिल्ली पुलिस की सिक्योरिटी यूनिट में तैनात किया गया। वकील इन अधिकारियों के निलंबन और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे थे। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार पुलिस ने तबादलों को नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया है। इसलिए तबादले को अपने आप में किसी अधिकारी के खिलाफ आरोपों की पुष्टि नहीं माना जा सकता।

इस विवाद की शुरुआत कड़कड़डूमा कोर्ट के अधिवक्ता ललित बंसल पर कथित हमले के मामले से हुई थी। रिपोर्टों के मुताबिक, पार्किंग को लेकर हुए विवाद में ललित बंसल को गंभीर चोटें आई थीं। इसके बाद मामले में पुलिस की कार्रवाई और आरोपियों के साथ किए गए व्यवहार को लेकर वकीलों ने सवाल उठाए। वकीलों का आरोप था कि मामले में कार्रवाई को लेकर आश्वासन दिए जाने के बावजूद संबंधित लोगों को गिरफ्तार नहीं किया गया और उन्हें कथित तौर पर छोड़ दिया गया। इस घटनाक्रम से नाराज कई अधिवक्ता 23 अक्टूबर को शाहदरा थाने पहुंचे थे, जहां पुलिस अधिकारियों और वकीलों के बीच विवाद बढ़ गया।

वकीलों की ओर से लगाए गए आरोपों के अनुसार, थाने में अपनी शिकायत और पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाने के दौरान ACP मनस्वी वशिष्ठ ने कथित तौर पर अपना रिवॉल्वर दिखाया और वहां मौजूद अधिवक्ताओं को धमकाया। इस आरोप ने विवाद को और गंभीर बना दिया। हालांकि, इस घटनाक्रम से जुड़े आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी। दूसरी ओर, 26 अक्टूबर को ACP मनस्वी वशिष्ठ की शिकायत पर कुछ वकीलों के खिलाफ भी FIR दर्ज की गई थी। इस तरह मामला पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायतों के साथ-साथ वकीलों के खिलाफ दर्ज मामले की जांच से भी जुड़ गया।

विवाद के बढ़ने के बाद दिल्ली की सभी जिला अदालतों की बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी थी। वकीलों की मांग थी कि संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए। हड़ताल के कारण जिला अदालतों में न्यायिक कामकाज प्रभावित हुआ। कई मामलों की सुनवाई और आदेशों पर असर पड़ने की जानकारी सामने आई। इससे उन लोगों को भी परेशानी हुई, जो अपने मुकदमों की सुनवाई, जमानत या अन्य कानूनी कार्यवाही के लिए अदालत पहुंच रहे थे।

28 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस, बार काउंसिल ऑफ दिल्ली और विभिन्न जिला अदालतों की बार एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों के बीच बैठक हुई। बैठक में दोनों पुलिस अधिकारियों के तबादलों के साथ-साथ शिकायतों और दर्ज FIR की जांच के लिए समयसीमा निर्धारित करने पर सहमति बनी। समन्वय समिति ने इसके बाद हड़ताल समाप्त करने का फैसला लिया और अधिवक्ताओं से तत्काल न्यायिक कार्य फिर से शुरू करने की अपील की। इस सहमति के तहत शाहदरा बार एसोसिएशन के सदस्यों की ओर से पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज शिकायतों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।

समझौते में अन्य कानूनी मामलों की जांच को लेकर भी समयसीमा तय की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शाहदरा थाने में दर्ज FIR नंबर 248/2026 में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए प्रभावी कदम उठाने पर सहमति बनी है। यदि आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार नहीं किया जाता है, तो कानून के अनुसार गैर-जमानती वारंट (NBW) और लुकआउट सर्कुलर (LOC) जैसी कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है। वहीं, वकीलों के खिलाफ दर्ज FIR नंबर 252/2026 की जांच एक सप्ताह के भीतर पूरी करने का निर्णय लिया गया है। इन समयसीमाओं का उद्देश्य दोनों पक्षों से जुड़े मामलों की जांच को आगे बढ़ाना और विवाद के समाधान की दिशा में कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

वकीलों की हड़ताल समाप्त होने के बाद अब पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायतों, अधिवक्ता पर कथित हमले और वकीलों के खिलाफ दर्ज FIR की जांच पर नजर रहेगी। अधिकारियों के तबादले से अदालतों में कामकाज दोबारा शुरू करने का रास्ता जरूर खुला है, लेकिन विवाद से जुड़े आरोपों का अंतिम समाधान जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा। इस मामले में निष्पक्ष जांच, संबंधित पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। अब देखना होगा कि तय समयसीमा के भीतर जांच कितनी आगे बढ़ती है और पुलिस तथा बार एसोसिएशनों के बीच बनी सहमति को किस तरह लागू किया जाता है।

इस खबर पर आपकी प्रतिक्रिया?

आपकी राय

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *