1984 Sikh Riots: 84 के सिख दंगा पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग को लेकर हुआ विचार-विमर्श : निर्मल जैन
नई दिल्ली (रविंद्र कुमार)। वर्ष 1984 में दिल्ली में हुए सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों को न्याय दिलाने और दशकों बाद भी न्याय की प्रतीक्षा कर रहे परिवारों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने के लिए दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग की ओर से एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। विकास भवन स्थित आयोग के कार्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में दंगों के दौरान जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। साथ ही न्यायिक प्रक्रिया, मामलों की जांच और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम में पूर्व न्यायमूर्ति एस.एन. ढींगरा और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सरदार आर.पी. सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष निर्मल जैन ने की। आयोग के सदस्य कुलदीप सिंह और एम. मोहम्मद हारून भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने 1984 के दंगों से जुड़े मामलों, पीड़ित परिवारों के लंबे संघर्ष और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे।
पूर्व न्यायमूर्ति एस.एन. ढींगरा ने अपने संबोधन में 1984 के दंगों से संबंधित मामलों और उनकी न्यायिक प्रक्रिया का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने दिल्ली में दंगों से जुड़े लगभग 250 से 300 मामलों के निरस्त होने तथा बाद में गठित विशेष जांच दल यानी एसआईटी की कार्रवाई के विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था किसी की जागीर नहीं है, बल्कि इसे और अधिक मजबूत, निष्पक्ष और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने समाज में जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया, ताकि भविष्य में इस प्रकार की भयावह घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सरदार आर.पी. सिंह ने 1984 के सिख विरोधी दंगों का उल्लेख करते हुए तत्कालीन कांग्रेस सरकार की भूमिका और पीड़ितों को न्याय मिलने में हुई देरी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इतने संवेदनशील मामले में पीड़ित परिवारों को दशकों तक न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ा, जो व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दंगों में प्रभावित परिवारों की पीड़ा और न्याय की उनकी मांग को लगातार उठाया जाना चाहिए, ताकि उनके साथ हुई घटनाओं को भुलाया न जाए।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि 1984 के दंगों में जान गंवाने वाले निर्दोष लोगों को याद रखना और उनके परिवारों को न्याय दिलाने की आवाज बुलंद करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। वक्ताओं ने कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सामाजिक सद्भाव, आपसी संवेदनशीलता और मजबूत न्याय व्यवस्था जरूरी है। कार्यक्रम के अंत में दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष निर्मल जैन तथा आयोग के सदस्य कुलदीप सिंह और एम. मोहम्मद हारून ने सभी अतिथियों और कार्यक्रम में शामिल लोगों का आभार व्यक्त किया।





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