Delhi Air Pollution: दीपावली से पहले ही जहरीली हो रही दिल्ली की हवा, सरकार केवल बयानबाजी कर रही है : महेंद्र भास्कर
नई दिल्ली (स्पर्श भारद्वाज)। राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। दीपावली से पहले ही दिल्ली की हवा की गुणवत्ता उस स्तर तक पहुंच गई है, जो आमतौर पर दीपावली के बाद देखने को मिलती है। ऐसे में त्योहार के बाद प्रदूषण की स्थिति कितनी गंभीर हो सकती है, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। यह कहना है करोलबाग जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र भास्कर का। उन्होंने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार केवल हवाबाजी और बयानबाजी में विश्वास करती है, जबकि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए जमीनी स्तर पर प्रभावी काम दिखाई नहीं दे रहा है।
महेंद्र भास्कर ने कहा कि पिछले कई दिनों से मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और दिल्ली सरकार के मंत्री प्रदूषण रोकने के लिए किए जा रहे इंतजामों और बनाई जा रही योजनाओं का दावा कर रहे हैं, लेकिन वायु गुणवत्ता के आंकड़े इन दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। उनके मुताबिक, दीपावली से पहले ही दिल्ली की हवा बेहद खराब स्थिति में पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण को लेकर घोषणाएं करने के बजाय सरकार को उन उपायों पर काम करना चाहिए, जिनका असर सीधे तौर पर हवा की गुणवत्ता में दिखाई दे।
महेंद्र भास्कर के अनुसार, मंगलवार को शाम 4 बजे दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI 350 अंक दर्ज किया गया, जो बहुत खराब श्रेणी में आता है। उन्होंने कहा कि मौसम विभाग ने पूरे सप्ताह दिल्ली और एनसीआर में सुबह के समय धुंध छाए रहने की चेतावनी दी है। वहीं, डिसीजन सपोर्ट सिस्टम के अनुमान के अनुसार, अगले तीन दिनों के दौरान दिल्ली के PM2.5 प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी और बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, खुले में कचरा जलाना और औद्योगिक उत्सर्जन भी प्रदूषण के प्रमुख स्रोत हैं। इन सभी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण योजनाओं की नियमित समीक्षा करने और उनकी प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की। महेंद्र भास्कर ने कहा कि दिल्ली सरकार को प्रदूषण नियंत्रण पर किए गए खर्च का पारदर्शी विवरण भी जनता के सामने रखना चाहिए। इसके साथ ही ऐसी कार्ययोजना लागू की जानी चाहिए, जिसके परिणाम वायु गुणवत्ता में स्पष्ट रूप से दिखाई दें। उन्होंने स्वच्छ हवा को दिल्लीवासियों के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताते हुए कहा कि राजधानी के लोगों को प्रदूषण के कारण लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
महेंद्र भास्कर ने बताया कि मंगलवार सुबह दिल्ली में धुंध की चादर छाए रहने के कारण लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। उनके द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार शाम 4 बजे दिल्ली का औसत AQI 350 अंक रहा। इसी साल 20 जनवरी को AQI 378 अंक दर्ज किया गया था और मंगलवार का स्तर 287 दिनों के बाद दिल्ली का सबसे खराब AQI बताया गया। जहांगीरपुरी में वायु गुणवत्ता सबसे खराब रही, जहां AQI 452 अंक दर्ज किया गया, जो गंभीर श्रेणी में आता है। इसके अलावा दिल्ली के 10 निगरानी केंद्रों पर AQI 400 अंक के पार रहा।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में लगातार तीसरे दिन हवा की गुणवत्ता खराब दर्ज की गई। 2 नवंबर को दिल्ली का AQI 324 अंक था, जबकि 1 नवंबर को यह 261 अंक दर्ज किया गया था। उनके अनुसार, हवा में मौजूद हानिकारक PM2.5 कणों में भी बढ़ोतरी हुई है। 2 नवंबर को दिल्ली के PM2.5 प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान 8.583 प्रतिशत था, जो मंगलवार यानी 3 नवंबर को बढ़कर 15.301 प्रतिशत तक पहुंच गया। महेंद्र भास्कर ने इन आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि प्रदूषण की स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है।
अंत में महेंद्र भास्कर ने दिल्ली सरकार से अपील की कि वह केवल दावे और बयान देने के बजाय जमीनी स्तर पर प्रदूषण नियंत्रण के लिए काम करे। उन्होंने कहा कि वाहनों, निर्माण गतिविधियों, खुले में कचरा जलाने और औद्योगिक उत्सर्जन से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ठोस कार्रवाई जरूरी है। साथ ही सरकार को अपनी योजनाओं और उन पर हुए खर्च की जानकारी जनता के सामने रखनी चाहिए, ताकि लोग यह जान सकें कि प्रदूषण से निपटने के लिए वास्तव में क्या कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिल्लीवासियों को स्वच्छ हवा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।





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