दिल्ली के त्रिलोकपुरी इलाके में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर विवाद सामने आया है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने त्रिलोकपुरी का दौरा कर स्थानीय लोगों से मुलाकात की और उनकी शिकायतें सुनीं। इस दौरान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के तहत मतदाताओं के नाम हटाए जाने का मुद्दा प्रमुखता से उठा। स्थानीय लोगों ने सवाल किया कि यदि किसी पात्र मतदाता का नाम सूची से हटा दिया जाता है, तो उसे इसकी जानकारी कैसे मिलेगी और वह अपने मताधिकार का इस्तेमाल किस तरह कर पाएगा। इस पूरे मामले में सबसे गंभीर शिकायत त्रिलोकपुरी निवासी कमलेश ने की है। उनका आरोप है कि उनके जीवित पति विजेंद्र को सरकारी रिकॉर्ड में मृत बताकर मतदाता सूची से उनका नाम हटा दिया गया।
स्थानीय लोगों का दावा है कि त्रिलोकपुरी के चार मतदान केंद्रों यानी बूथों पर कुल 416 मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। इसके अलावा पूरे इलाके में पांच हजार से अधिक नाम हटाए जाने का भी आरोप लगाया जा रहा है। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। राहुल गांधी के इलाके में पहुंचने पर इंदिरा कैंप के निवासियों ने उन्हें अपनी समस्याओं से अवगत कराया। लोगों ने बताया कि मतदाता सूची में नाम नहीं होने से उन्हें अपने मतदान के अधिकार को लेकर चिंता है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि नाम हटाने की प्रक्रिया में यदि किसी तरह की गलती होती है, तो प्रभावित व्यक्ति को समय रहते इसकी जानकारी और सुधार का अवसर मिलना चाहिए। राहुल गांधी ने स्थानीय निवासियों से बातचीत कर उनकी शिकायतें सुनीं। इस दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और वोट चोरी के आरोपों से जुड़ा मुद्दा भी चर्चा में आया।
दौरे के दौरान राहुल गांधी एक छोटे बच्चे के साथ बैठकर बातचीत करते हुए भी नजर आए। बच्चे ने बाद में बताया कि राहुल गांधी ने उससे मतदान केंद्रों पर वोट काटे जाने के बारे में बात की थी। इस मुलाकात के दौरान स्थानीय लोगों ने मतदाता सूची में नामों की स्थिति और कथित गड़बड़ियों को लेकर अपनी चिंताएं साझा कीं। हालांकि, कितने मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और किन कारणों से हटाए गए हैं, इसकी वास्तविक स्थिति संबंधित चुनाव अधिकारियों के रिकॉर्ड और आधिकारिक जांच से ही स्पष्ट हो सकेगी।
त्रिलोकपुरी की निवासी कमलेश ने अपने परिवार से जुड़ी शिकायत बताते हुए कहा कि उनके परिवार के अन्य सदस्यों के नाम मतदाता सूची में मौजूद हैं, लेकिन उनके पति विजेंद्र का नाम सूची से गायब है। कमलेश के मुताबिक, जब बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO उनके घर पहुंचे, तो उन्होंने बताया कि कमलेश, उनके बेटे और बहू के नाम मतदाता सूची में दर्ज हैं, लेकिन उनके पति विजेंद्र का नाम उसमें नहीं है। कमलेश का दावा है कि जब उन्होंने अपने पति का नाम हटाए जाने का कारण पूछा, तो उन्हें बताया गया कि रिकॉर्ड के अनुसार उनके पति की मृत्यु हो चुकी है। इस जानकारी पर उन्होंने हैरानी जताई और कहा कि उनके पति जीवित हैं तथा उनके सामने मौजूद हैं। कमलेश ने सवाल उठाया कि जब कोई व्यक्ति जीवित है, तो उसे रिकॉर्ड में मृत दर्ज किए जाने की स्थिति में वह मतदान कैसे कर सकेगा और अपने अधिकारों का इस्तेमाल कैसे करेगा।
इस शिकायत ने मतदाता सूची में दर्ज व्यक्तिगत विवरणों की सटीकता और नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि विजेंद्र को मृत दर्ज किए जाने की जानकारी किस रिकॉर्ड या दस्तावेज के आधार पर सामने आई और उनका नाम हटाने के पीछे आधिकारिक कारण क्या है। संबंधित चुनाव अधिकारियों का पक्ष भी सामने आना बाकी है। ऐसे में इस मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले रिकॉर्ड की जांच और अधिकारियों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। यदि किसी जीवित व्यक्ति को गलती से मृत दर्ज किया गया है या किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया गया है, तो संबंधित रिकॉर्ड में सुधार की आवश्यकता होगी।
मतदाता सूची में नाम दर्ज होना मतदान करने के लिए आवश्यक है। इसलिए सूची में नाम हटने, गलत जानकारी दर्ज होने या किसी पात्र मतदाता का नाम शामिल नहीं होने की शिकायतों का समय पर समाधान जरूरी है। मतदाताओं को अपने नाम की स्थिति की जांच करने और किसी त्रुटि की स्थिति में निर्धारित चुनावी प्रक्रिया के तहत सुधार के लिए आवेदन करने का अवसर मिलना चाहिए। त्रिलोकपुरी में नाम कटने के दावों और विजेंद्र से जुड़ी शिकायत के बीच अब संबंधित चुनाव अधिकारियों की भूमिका अहम हो गई है। आधिकारिक आंकड़ों, नाम हटाए जाने के कारणों और शिकायतों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामले में कितनी गड़बड़ियां हुई हैं और कितने मतदाता प्रभावित हुए हैं। फिलहाल स्थानीय लोगों के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि चुनाव अधिकारी इन शिकायतों की जांच कर क्या कार्रवाई करते हैं और प्रभावित लोगों को मतदाता सूची में आवश्यक सुधार कराने में कितनी मदद मिलती है।





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