उत्तर प्रदेश के बिजनौर स्थित महात्मा विदुर स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में रैगिंग का एक और मामला सामने आया है। आरोप है कि मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में सीनियर छात्रों ने एक जूनियर एमबीबीएस छात्र का सिर मुंडवा दिया और उसके साथ मानसिक उत्पीड़न तथा अभद्रता की। पीड़ित छात्र के पिता ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में 13 सीनियर छात्रों के नाम और उनके कमरों की जानकारी दिए जाने की बात सामने आई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए एनएमसी ने कॉलेज की प्राचार्या से 24 घंटे के भीतर जांच रिपोर्ट और की गई कार्रवाई का विवरण मांगा है।
शिकायत के अनुसार, कॉलेज के बॉयज हॉस्टल में जूनियर छात्रों के साथ नियमित रूप से रैगिंग की जा रही थी। आरोप है कि शाम करीब पांच बजे से सात बजे के बीच जूनियर विद्यार्थियों को परेशान किया जाता था, उनके साथ अभद्र व्यवहार किया जाता था और उन्हें धमकियां भी दी जाती थीं। पीड़ित छात्र के पिता का कहना है कि इस तरह के व्यवहार के कारण उनका बेटा मानसिक रूप से परेशान है और इसका असर उसकी पढ़ाई पर भी पड़ सकता है।
शिकायत में वर्ष 2024 बैच के सीनियर छात्रों पर रैगिंग करने का आरोप लगाया गया है। छात्र के पिता ने हॉस्टल प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पीड़ित छात्र ने पहले हॉस्टल वार्डन से शिकायत की थी, लेकिन मामले की निष्पक्ष जांच नहीं की गई और आरोपियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग का रुख किया। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के एंटी-रैगिंग सेल ने कॉलेज प्रशासन से शिकायत में उठाए गए सभी 11 बिंदुओं पर स्पष्ट जवाब मांगा है। प्राचार्या को निर्धारित समय में कार्रवाई रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग यह जानना चाहता है कि घटना के संबंध में कॉलेज प्रशासन को कब जानकारी मिली, शिकायत पर क्या कदम उठाए गए और हॉस्टल में रैगिंग रोकने के लिए क्या व्यवस्था की गई है।
मेडिकल कॉलेज की प्राचार्या डॉ. ललिता चौधरी के अनुसार, मामले की प्रारंभिक जांच कर रिपोर्ट एनएमसी को भेज दी गई है। जिन सीनियर छात्रों के नाम सामने आए हैं, उनके अभिभावकों को कॉलेज बुलाया गया है। प्राचार्या ने कहा कि छात्रों को चेतावनी दी गई है और यदि इसके बाद भी उनके व्यवहार में सुधार नहीं होता है, तो निलंबन जैसी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। कॉलेज प्रशासन की ओर से आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और संबंधित नियमों के आधार पर की जाएगी।
यह पहली बार नहीं है जब महात्मा विदुर स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में रैगिंग की शिकायत सामने आई हो। इससे पहले अप्रैल 2026 में भी एक जूनियर एमबीबीएस छात्र के साथ रैगिंग का मामला सामने आया था। उस मामले में कॉलेज प्रशासन ने जांच के बाद 11 छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की थी। कार्रवाई के तहत कुछ छात्रों पर जुर्माना लगाने के साथ अलग-अलग अवधि के लिए निलंबित किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, एक छात्र को 10 हजार रुपये जुर्माने और छह सप्ताह के निलंबन, दूसरे को 10 हजार रुपये जुर्माने और चार सप्ताह के निलंबन तथा एक अन्य को पांच हजार रुपये जुर्माने और दो सप्ताह के निलंबन की सजा दी गई थी। आठ अन्य छात्रों को दो सप्ताह के लिए निलंबित किया गया था।
ताजा शिकायत में पहले के मामले में कार्रवाई का सामना कर चुके कुछ छात्रों के नाम दोबारा सामने आने की बात भी कही गई है। इससे कॉलेज में रैगिंग रोकने के लिए बनाई गई व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। संस्थान में 19 सदस्यीय एंटी-रैगिंग कमेटी गठित है, जिसमें प्राचार्या अध्यक्ष, 10 फैकल्टी सदस्य और आठ विद्यार्थी शामिल हैं। इसके बावजूद लगातार शिकायतें सामने आने से हॉस्टल की निगरानी और शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई करने की जरूरत रेखांकित हुई है।
मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग को रोकने के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के नियमों के तहत संस्थानों को शिकायत मिलने पर तत्काल जांच और उचित कार्रवाई करनी होती है। रैगिंग केवल शारीरिक उत्पीड़न तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिक दबाव, धमकी, अपमानजनक व्यवहार और पढ़ाई के माहौल को प्रभावित करने वाली गतिविधियां भी गंभीर चिंता का विषय हैं। बिजनौर के इस मामले में अब एनएमसी की निगरानी में कॉलेज प्रशासन की जांच और आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल 13 छात्रों के खिलाफ शिकायत में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है।





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