Delhi Air Pollution: करोड़ों रुपये खर्च के बावजूद प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण नहीं: डॉ. एम. एल. भास्कर
नई दिल्ली। दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या को लेकर रोहिणी जिला कांग्रेस कमेटी के एससी विभाग के चेयरमैन डॉ. एम. एल. भास्कर ने सरकार की प्रदूषण नियंत्रण नीतियों की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राजधानी में प्रदूषण कम करने के लिए वर्षों से करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद वायु गुणवत्ता अब भी चिंता का विषय बनी हुई है। उन्होंने सरकार से प्रदूषण नियंत्रण पर खर्च की गई राशि का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक करने और योजनाओं के परिणामों की समीक्षा करने की मांग की।
डॉ. एम. एल. भास्कर के अनुसार, दिल्ली में पीएम 10 का स्तर वर्ष 2016 में 284.2 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया था, जो वर्ष 2025 में घटकर 197.3 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रह गया। इसी अवधि में पीएम 2.5 का स्तर 131.3 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से घटकर 96.4 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों में गिरावट के बावजूद राजधानी में प्रदूषण का स्तर चिंता का विषय बना हुआ है और नागरिकों को स्वच्छ हवा उपलब्ध कराने के लिए अधिक प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।
डॉ. भास्कर ने मांग की कि सरकार प्रदूषण नियंत्रण के लिए आवंटित बजट, खर्च की गई राशि और उससे प्राप्त परिणामों का पारदर्शी विवरण जनता के सामने रखे। उन्होंने कहा कि प्रदूषण कम करने के लिए योजनाएं बनाना और अभियान चलाना पर्याप्त नहीं है। इनके प्रभावी क्रियान्वयन के साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वायु गुणवत्ता में वास्तविक सुधार हो। उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी योजनाओं की नियमित समीक्षा और उनकी प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक करने पर जोर दिया।
उन्होंने वाहनों से होने वाले उत्सर्जन, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, खुले में कचरा जलाने और औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले प्रदूषकों को वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में शामिल बताया। उनके मुताबिक, इन स्रोतों पर प्रभावी निगरानी रखने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की जरूरत है। निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, वाहनों के उत्सर्जन पर निगरानी और खुले में कचरा जलाने की घटनाओं को रोकने जैसे उपायों को लगातार लागू करना जरूरी है।
डॉ. भास्कर ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए सरकारी विभागों के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए और योजनाओं की प्रभावशीलता का नियमित आकलन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रदूषण कम करने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए गए, उन पर कितना खर्च हुआ और उनसे वायु गुणवत्ता में कितना सुधार आया। उनके अनुसार, खर्च और परिणामों से संबंधित जानकारी सार्वजनिक होने से जवाबदेही बढ़ेगी और भविष्य की योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
डॉ. एम. एल. भास्कर ने स्वच्छ हवा को दिल्लीवासियों के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताते हुए कहा कि प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों का असर आम लोगों को दिखाई देना चाहिए। उन्होंने सरकार से ऐसी ठोस और प्रभावी कार्ययोजना लागू करने की मांग की, जिससे प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर नियंत्रण हो और राजधानी की वायु गुणवत्ता में निरंतर सुधार सुनिश्चित किया जा सके।





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