सत्य के साथ • आपके साथगुरुवार, 5 नवंबर 2026
ADVERTISEMENTविज्ञापन के लिए संपर्क करेंCPN NEWS • YOUR BRAND HERE
ताज़ा खबर
Yamuna River Safari: यमुना क्रूज सफारी से दिल्ली-एनसीआर में पर्यटन को मिलेगा नया आयाम : डॉ. यूके चौधरीDelhi Traffic Jam: दिवाली से पहले साउथ एक्स रिंग रोड पर कई किलोमीटर लंबा जाम, विकास मार्ग पर पैदल मार्च के चलते आज ट्रैफिक डायवर्जनParvinder Singh Jhota Murder Case: झोटा हत्याकांड में पंजाब सरकार और इंसाफ कमेटी के बीच समझौता, पत्नी को 2 करोड़ मुआवजा और सरकारी नौकरी, 6 नवंबर को होगा पोस्टमार्टमSharad Pawar Health Update: शरद पवार फिर मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती, पीएम मोदी ने फोन कर पूछा हालचाल, बोले- आप आराम करिए, हम और सुप्रिया देश संभालेंगेSchool Child Death: मयूर विहार के निजी स्कूल में तीसरी कक्षा की बच्ची की अचानक मौत, CPR ट्रेनिंग और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवालChain Snatching: आनंद विहार में तीन झपटमारी की वारदातों का खुलासा, पांच पुराने मामलों में शामिल आरोपी गिरफ्तारIllegal Firecrackers: दिल्ली के शाहदरा में 311.97 किलो अवैध पटाखे बरामद, ANTF ने 26 वर्षीय युवक को किया गिरफ्तारGambling Arrest: दिल्ली के मंडोली एक्सटेंशन में ताश के पत्तों से जुआ खेलते दो आरोपी गिरफ्तार, 1,000 रुपये नकद बरामद

जोशीमठ मामले पर उच्चतम न्यायालय 16 जनवरी को याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत

2 मिनट पढ़ें

उच्चतम न्यायालय उत्तराखंड के जोशीमठ में जमीन धंसने से उत्पन्न संकट को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने के लिये अदालत के हस्तक्षेप के अनुरोध वाली याचिका पर 16 जनवरी को सुनवाई करने पर मंगलवार को सहमत हो गया। प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा की पीठ ने हालांकि, तत्काल सुनवाई के लिए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा दायर याचिका को सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया और कहा कि हर जरूरी चीज सीधे न्यायालय के पास नहीं आनी चाहिए। पीठ ने कहा, ‘इस पर गौर करने के लिए लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित संस्थाएं हैं। हर जरूरी चीज हमारे पास नहीं आनी चाहिए। हम इसे सुनवाई के लिए 16 जनवरी को सूचीबद्ध करेंगे।’

याचिका का उल्लेख स्वामी सरस्वती की ओर से पेश अधिवक्ता परमेश्वर नाथ मिश्रा ने किया। याचिकाकर्ता सरस्वती ने दावा किया है कि यह घटना बड़े पैमाने पर औद्योगीकरण के कारण हुई है और उन्होंने उत्तराखंड के लोगों के लिए तत्काल वित्तीय सहायता और मुआवजे की मांग की है। याचिका में इस चुनौतीपूर्ण समय में जोशीमठ के निवासियों को सक्रिय रूप से समर्थन देने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है। संत की दलील में कहा गया है, ‘याचिका में कहा गया है, ‘‘मानव जीवन और उनके पारिस्थितिकी तंत्र की कीमत पर किसी भी विकास की जरूरत नहीं है और अगर ऐसा कुछ भी होता है, तो उसे युद्ध स्तर पर तत्काल रोकना राज्य और केंद्र सरकार का दायित्व है।’

बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब जैसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों और अंतरराष्ट्रीय स्कीइंग गंतव्य औली का प्रवेश द्वार कहलाने वाला जोशीमठ जमीन धंसने के कारण एक बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है। जोशीमठ में जमीन धीरे-धीरे धंस रही है और घरों, सड़कों और खेतों में बड़ी- बड़ी दरारें पड़ रही हैं। स्थानीय लोगों ने कहा कि कई घर धंस गए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जोखिम वाले घरों में रह रहे 600 परिवारों को तत्काल वहां से हटा कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का आदेश दिया है।

इस खबर पर आपकी प्रतिक्रिया?

आपकी राय

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *