Rahul Gandhi: ‘गले लगाना ही विदेश नीति’, राहुल गांधी का PM मोदी पर तंज; मेलोनी का भी किया जिक्र
नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति को लेकर तंज कसा है। कांग्रेस के राष्ट्रीय सम्मेलन ‘रचनात्मक कांग्रेस’ में बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री विदेश नीति को विदेशी नेताओं से गले मिलने से जोड़कर देखते हैं। उन्होंने इस दौरान इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का भी मजाकिया अंदाज में जिक्र किया।
कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि यह विचार कहां से आया कि विदेशी नेताओं को गले लगाना ही विदेश नीति है। उन्होंने इस सोच को लेकर प्रधानमंत्री पर व्यंग्य किया और कहा कि लोगों के दिमाग में कभी-कभी अजीब विचार आ जाते हैं।
राहुल गांधी ने अपनी बात को हल्के-फुल्के अंदाज में समझाने के लिए मंच पर मौजूद कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित को गले लगा लिया। इस पर संदीप दीक्षित ने मजाक करते हुए पूछा कि कहीं राहुल उन्हें मेलोनी समझकर तो गले नहीं लगा रहे। राहुल गांधी ने भी मजाकिया अंदाज में जवाब दिया कि वह अभी उस स्तर तक नहीं पहुंचे हैं। उनके इस जवाब के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच हंसी का माहौल बन गया।
इसके बाद राहुल गांधी ने दोबारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि विदेशी नेताओं से मुलाकात और गले मिलने को विदेश नीति का आधार मानने का विचार कहां से आया।
राहुल गांधी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और ईरान-अमेरिका संबंधों को लेकर भी केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ईरान लंबे समय से भारत का मित्र रहा है, जबकि अमेरिका और रूस के साथ भी भारत के संबंध हैं। ऐसे में भारत इन सभी देशों के साथ अपने संबंधों का इस्तेमाल करके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी कूटनीतिक ताकत और भूमिका को मजबूत कर सकता था।
कांग्रेस नेता ने कहा कि ईरान में युद्ध शुरू होने के बाद भारत के सामने अपनी कूटनीतिक क्षमता दिखाने का बड़ा अवसर था। उनके मुताबिक भारत को अपनी ताकत और रणनीतिक स्थिति को पहचानकर वैश्विक स्तर पर सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए थी।
राहुल गांधी ने इस संदर्भ में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अगर भारत ने अपनी ताकत को पहचाना होता और नेतृत्व इंदिरा गांधी जैसा होता, तो यह देश के लिए दुनिया का सबसे बड़ा अवसर साबित हो सकता था।
राहुल गांधी के बयान के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति और भारत की वैश्विक कूटनीतिक भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। कांग्रेस लगातार केंद्र सरकार की विदेश नीति को लेकर सवाल उठाती रही है, जबकि भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं और विभिन्न देशों के नेताओं के साथ संबंधों को भारत की वैश्विक स्थिति मजबूत करने की रणनीति के तौर पर पेश किया जाता रहा है।



